वॉशिंगटन/मुंबई: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति अब भारत की फार्मा इंडस्ट्री के लिए गंभीर चुनौती बनती नजर आ रही है. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका दवाओं के आयात पर भारी टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है. इसके बाद मंगलवार, 17 जून को भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई.
निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2% फिसला और प्रमुख कंपनियों के शेयर 4% तक गिर गए. बाजार में अनिश्चितता साफ दिखाई दी और निवेशकों की चिंता गहराती जा रही है.
भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए बड़ा झटका
ट्रंप के बयान के बाद फार्मा कंपनियों के स्टॉक्स में गिरावट की लहर दौड़ गई:
86 हजार करोड़ रुपये का सालाना दवा व्यापार
भारत हर साल अमेरिका को करीब 10 अरब डॉलर (₹86,200 करोड़) की दवाएं निर्यात करता है. भारत की दवाएं अमेरिकी फार्मा बाजार का लगभग 6% हिस्सा हैं. इनमें से अधिकांश जेनरिक दवाएं होती हैं, जो अमेरिका में सस्ती दवा विकल्प के तौर पर बेहद लोकप्रिय हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका टैरिफ लगाता है तो भारतीय कंपनियों की मार्जिन, बिक्री और बाजार हिस्सेदारी तीनों पर सीधा असर होगा.
ट्रंप की मंशा: मेड इन USA को बढ़ावा
ट्रंप लगातार विदेशी दवाओं, खासतौर पर भारत और चीन से आने वाले सस्ते फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स को अमेरिकी कंपनियों के लिए खतरा मानते रहे हैं. उनका उद्देश्य है कि विदेशी कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करें, ताकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा और नौकरियों में वृद्धि हो.
हालांकि, अभी टैरिफ की दर स्पष्ट नहीं है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह 10% से 25% के बीच हो सकती है. ट्रंप पहले भी अप्रैल में ऐसी योजना लाने की बात कर चुके हैं, जिसे 90 दिनों के लिए टाल दिया गया था. लेकिन अब उनके रुख से लगता है कि यह फैसला जल्द आ सकता है.
भारत के लिए क्या जोखिम?
भारतीय कंपनियों की अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता: भारतीय फार्मा कंपनियों की आमदनी का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है. टैरिफ लगने की स्थिति में कंपनियों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मुश्किल होगी.
भारत सरकार की तैयारी
भारत सरकार इस मामले पर सतर्क और सक्रिय है. सूत्रों के मुताबिक, भारत ने अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील से पहले यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि दवाओं पर नया टैरिफ न लगाया जाए.
दोनों देशों के बीच 9 जुलाई तक ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की कोशिश हो रही है, ताकि भारतीय फार्मा सेक्टर को नुकसान से बचाया जा सके. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्रंप के बार-बार बदलते रुख पर भी अपनी चिंता जताई है.
अमेरिका के मरीजों पर असर
अगर टैरिफ लगाया गया तो अमेरिका में दवाओं की लागत बढ़ना तय है. भारतीय जेनरिक दवाओं की वजह से अमेरिका में कई गंभीर बीमारियों के इलाज के खर्च को नियंत्रित रखा जा सका है. अगर सस्ते विकल्प महंगे हो जाते हैं तो इसका सीधा असर वहां के आम मरीजों की जेब पर पड़ेगा.
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