Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने विवादित टैरिफ (आयात शुल्क) नीति का जोरदार बचाव किया है. उन्होंने कहा कि टैरिफ न केवल अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित हुए हैं, बल्कि देश को पहले से कहीं अधिक समृद्ध और शक्तिशाली बना दिया है. रविवार, 9 नवंबर 2025 को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लंबी पोस्ट करते हुए टैरिफ नीति के खिलाफ बोलने वालों को “फूल्स यानी मूर्ख” कहा.
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि उनकी नीतियों की वजह से अमेरिका आज “दुनिया की सबसे अमीर और सम्मानित अर्थव्यवस्था” बन गया है. उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था कम महंगाई, मजबूत शेयर बाजार और बढ़ते निवेशों के चलते अभूतपूर्व उछाल पर पहुंची. ट्रंप के मुताबिक, “अमेरिकियों के 401k रिटायरमेंट अकाउंट्स अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं, और यह मेरी नीतियों की वजह से संभव हुआ है.”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सरकार अब टैरिफ से “ट्रिलियंस ऑफ डॉलर” कमा रही है, एक ऐसी राशि जो अमेरिका के 37 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज को घटाने में मदद कर सकती है. हालांकि, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है.
“हर अमेरिकी को मिलेगा 2000 डॉलर का फायदा”
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में एक और बड़ा दावा किया कि टैरिफ नीति के कारण अमेरिका में “रिकॉर्ड स्तर का निवेश” हो रहा है, और देशभर में नई फैक्ट्रियां और उत्पादन इकाइयाँ खुल रही हैं. उन्होंने लिखा, “हम अब इतनी कमाई कर रहे हैं कि बहुत जल्द हर अमेरिकी को 2000 डॉलर का बोनस या डिविडेंड दिया जा सकेगा.” हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि यह योजना कब और कैसे लागू होगी, या यह राशि किस फंड से दी जाएगी.
आलोचकों ने जताई शंका
ट्रंप के बयानों ने एक बार फिर अमेरिकी आर्थिक नीति को लेकर बहस छेड़ दी है. अर्थशास्त्रियों और उनके राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि टैरिफ से विदेशी वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं, जिससे अंततः आम जनता को महंगाई का सामना करना पड़ता है.
कई विशेषज्ञों का तर्क है कि ट्रंप के “ट्रिलियंस ऑफ डॉलर” वाले दावे अतिशयोक्तिपूर्ण हैं, क्योंकि अमेरिकी टैरिफ आमदनी का एक बड़ा हिस्सा व्यापारिक नुकसान और बढ़े हुए उपभोक्ता दामों से संतुलित हो जाता है.
चुनावी वर्ष में ट्रंप की आर्थिक पिच
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2028 की दिशा में एक चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” के अपने पुराने नारे को दोहराते हुए वे अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर और विदेशी प्रभाव से मुक्त बताने की कोशिश कर रहे हैं.
हालांकि, आलोचक यह भी कहते हैं कि टैरिफ नीति ने चीन और यूरोप जैसे देशों के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ाया है और कई अमेरिकी कंपनियों को आयातित कच्चे माल की ऊंची लागत झेलनी पड़ी है.
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