अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को स्पष्ट संकेत दिया कि रूस के साथ व्यापार जारी रखने वाले किसी भी देश को अब भारी आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा. ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन और रिपब्लिकन सांसद मिलकर ऐसे कानून तैयार कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य रूस पर अधिकतम दबाव बनाना है, ताकि मॉस्को की वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को सीमित किया जा सके.
ट्रंप ने यह भी कहा कि केवल रूस ही नहीं, बल्कि ईरान के साथ व्यापार जारी रखने वाले राष्ट्रों पर भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा बाजार में अपने प्रभाव का इस्तेमाल उन देशों पर दबाव बढ़ाने के लिए करेगा जो वाशिंगटन की पाबंदियों की परवाह किए बिना मॉस्को या तेहरान के साथ आर्थिक साझेदारी रखते हैं.
रूसी तेल आयात पर 500% टैरिफ का प्रस्ताव
अमेरिका में हाल ही में एक नया बिल चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें रूस के तेल की खरीद और पुन: बिक्री करने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने की सिफारिश की गई है. यह प्रस्ताव रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल की संयुक्त पहल है.
दोनों नेताओं ने Sanctioning Russia Act 2025 पेश किया है, जिसका उद्देश्य उन देशों पर सेकेंडरी सैंक्शंस लागू करना है जो रूस से आयात जारी रखकर यूक्रेन युद्ध में उसकी आर्थिक मदद करते हैं. इस प्रस्ताव को अमेरिकी सीनेट में 100 में से 85 सांसदों का समर्थन मिला है, जो इसे बेहद प्रभावी और व्यापक बनाता है.
यदि यह कानून पास हो जाता है, तो रूसी तेल खरीदने वाले देशों की लागत कई गुना बढ़ सकती है, जिससे उनका ऊर्जा व्यापार पूरी तरह बाधित हो सकता है.
भारत पहले से झेल रहा अमेरिकी टैरिफ की मार
ट्रंप प्रशासन ने पहले ही भारत पर अत्यधिक ऊंचा टैरिफ लागू कर रखा है. कुल 50% टैरिफ, जिसमें 25% अतिरिक्त शुल्क सिर्फ इसलिए क्योंकि भारत रूस से तेल और गैस खरीदता है.
भारत ने इन आपत्तियों पर भी अपनी ऊर्जा नीति को नहीं बदला. दिल्ली ने स्पष्ट कहा कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देती है और रूस से खरीद जारी रखेगी क्योंकि इससे भारतीय बाजार में कीमतें स्थिर रहती हैं.
सर्गेई लावरोव से मिले एस. जयशंकर
ट्रंप की यह चेतावनी उस समय सामने आई है जब भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर दो दिन के रूस दौरे पर मॉस्को पहुंचे हैं. मंगलवार को उन्होंने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ विस्तृत वार्ता की.
जयशंकर ने कहा, “भारत और रूस के संबंध दशकों से वैश्विक राजनीति में स्थिरता के प्रतीक रहे हैं. हमारे द्विपक्षीय संबंध सिर्फ दोनों देशों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के हित में हैं.”
उन्होंने आगे कहा कि भारत और रूस कई नई परियोजनाओं और समझौतों पर अंतिम चरण में बातचीत कर रहे हैं. इनमें ऊर्जा, रक्षा, विज्ञान, अंतरिक्ष और निवेश से जुड़े प्रमुख करार शामिल हैं.
कूटनीति विशेषज्ञ मानते हैं कि जयशंकर का यह संदेश अप्रत्यक्ष रूप से ट्रंप के हालिया बयानों का जवाब है, जिसमें भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की धमकी दी गई थी.
भारत ने रूस से तेल खरीद कम की- ट्रंप
17 नवंबर को ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने हाल के महीनों में रूस से अपने तेल आयात में कमी की है. उन्होंने कहा, “अमेरिका भारत पर टैरिफ कम कर सकता है, क्योंकि भारत अब रूस से कम तेल खरीद रहा है. दोनों देश एक नए व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं.”
ट्रंप का यह बयान ब्लूमबर्ग की उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें कहा गया था कि भारत की 5 बड़ी रिफाइनरी कंपनियों ने दिसंबर 2024 की डिलीवरी के लिए रूस से कोई नया ऑर्डर नहीं दिया है.
हालांकि भारतीय सरकार ने इस कटौती को “अस्थायी और बाज़ार आधारित” बताया है, यह कहते हुए कि खरीद पूरी तरह कीमत और सप्लाई स्थितियों पर निर्भर करती है.
ये भी पढ़ें- चीन के पास 20 लाख सैनिक और 600 परमाणु हथियार, फिर भी कड़ी टक्कर दे सकता है जापान, जानें दोनों की ताकत