दुनिया के बड़े कूटनीतिक मंचों पर फिर से हलचल तेज़ हो गई है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिनके कार्यकाल और बयान हमेशा सुर्खियों में रहे हैं, अब एक बार फिर एशिया की ओर रुख कर रहे हैं. अक्टूबर में प्रस्तावित दक्षिण कोरिया यात्रा को केवल एक औपचारिक दौरे के रूप में नहीं, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उभरते नए समीकरणों के केंद्र बिंदु के रूप में देखा जा रहा है.
इस दौरे के दौरान ट्रंप ग्योंगजू में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरिया के किम जोंग उन से संभावित मुलाकात की चर्चाएं तेज़ हैं.
अलास्का में वार्ता विफल, अब चीन की ओर बढ़ते कदम
हाल ही में अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ संभावित बैठक की योजना थी, जिसका उद्देश्य अमेरिका-रूस के बीच बढ़ते तनाव को कम करना था. लेकिन यह बातचीत सफल नहीं हो सकी, जिसके बाद ट्रंप ने पुतिन की सार्वजनिक रूप से आलोचना भी की. इस असफल प्रयास के बाद ट्रंप अब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, APEC सम्मेलन के इतर दोनों नेताओं के बीच एक विशेष बैठक की योजना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, हालांकि अब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.
चीन से मिल सकता है बड़ा आर्थिक संकेत
सूत्रों की मानें तो शी जिनपिंग ने पिछले महीने ट्रंप और उनकी पत्नी को चीन आने का व्यक्तिगत न्योता भी दिया था, जिसे ट्रंप ने सहमति दी, पर अब तक तारीख तय नहीं हो पाई है.व्हाइट हाउस से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यह प्रस्तावित मुलाकात न केवल व्यापारिक और रक्षा मुद्दों पर होगी, बल्कि इसमें अमेरिका में चीनी निवेश को लेकर भी बातचीत संभव है. ट्रंप पहले भी मध्य-पूर्व के कई देशों जैसे कि सऊदी अरब, क़तर और यूएई की यात्राओं के दौरान अमेरिकी निवेश को प्राथमिकता दे चुके हैं.
क्या किम जोंग उन से भी होगी मुलाकात?
इस दौरे को लेकर एक और महत्वपूर्ण संकेत मिला है — उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से ट्रंप की मुलाकात की संभावना. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यंग ने ट्रंप से हाल ही में मुलाकात कर उन्हें APEC में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया और कहा कि यह किम से वार्ता का भी मंच बन सकता है. ट्रंप ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे किम से बातचीत के लिए "हमेशा तैयार" हैं और अगर यह मुलाकात होती है, तो दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ सकता है.
बीजिंग की परेड और ट्रंप की प्रतिक्रिया
कुछ समय पहले बीजिंग में एक सैन्य परेड आयोजित की गई थी, जिसमें किम जोंग उन, व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया था. इस पर ट्रंप ने अपनी नाराज़गी जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि “अब लगता है कि भारत और रूस, चीन के साथ खड़े हो रहे हैं.” हालांकि बाद में उन्होंने उस आयोजन को “भव्य और प्रभावशाली” भी बताया.
ट्रेड वॉर की पृष्ठभूमि में बढ़ती रणनीतिक हलचल
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर है. अप्रैल में ट्रंप प्रशासन ने चीनी उत्पादों पर 145% आयात शुल्क लगाया था, जिसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी वस्तुओं पर 125% शुल्क थोप दिया. हालांकि, हाल ही में ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से इन टैरिफ में नवंबर तक राहत देने का फैसला किया ताकि बातचीत के लिए माहौल बन सके.
यह भी पढ़ेंः Su57M1E: हवाई राक्षस है 5वीं पीढ़ी का यह फाइटर जेट, F35 भी इसके आगे फीका