पुतिन को मनाने की हर कोशिश नाकाम, नहीं रुक रहा रूस-यूक्रेन जंग, अब क्या करेंगे ट्रंप? जानें प्लान

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने हाल ही में रूस पर कड़ा रुख अपनाते हुए उसके दो सबसे बड़े तेल उद्यमों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की.

Trumps every attempt to persuade Putin fails russia ukraine
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने हाल ही में रूस पर कड़ा रुख अपनाते हुए उसके दो सबसे बड़े तेल उद्यमों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए अमेरिकी प्रयास लगातार विफल हो रहे हैं.
ट्रंप ने बुडापेस्ट में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रस्तावित शांति बैठक को भी अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया, जिससे संकेत मिलता है कि रूस-अमेरिका संबंध फिलहाल तनावपूर्ण बने हुए हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा, "जब भी मैं पुतिन से मिलता हूं, हमारी बातचीत अच्छी होती है, लेकिन इसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आता. इस बार हमने रूस को सीधे निशाना बनाने का फैसला किया है, ताकि युद्ध की वास्तविक जमीनी परिस्थितियों का मूल्यांकन किया जा सके."

ट्रंप के इस बयान से स्पष्ट होता है कि अमेरिका ने पुतिन की रणनीतियों और युद्ध के प्रभावों को गहराई से देखा और अब अमेरिका यूक्रेन संकट को सुलझाने के लिए कठोर कदम उठाने पर मजबूर है.

अलास्का में शुरुआती कूटनीतिक प्रयास

इस अगस्त में ट्रंप ने अलास्का में पुतिन का भव्य स्वागत किया था. उस समय उम्मीद की जा रही थी कि यह मुलाकात यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में पहला कदम हो सकती है.
अमेरिका ने संकेत दिए कि वह यूक्रेन को सीमित समय के लिए दरकिनार करके सीधे रूस से शांति वार्ता करने को तैयार है.

हालांकि, यूरोपीय मित्र देशों और यूक्रेनी नेतृत्व के लिए यह चिंता का विषय था, क्योंकि इससे यूक्रेन की आवाज़ दबने का खतरा उत्पन्न हो सकता था.

ट्रंप ने पुतिन को चेतावनी भी दी थी कि यदि वार्ता सार्थक नहीं हुई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. लेकिन उस बैठक में ना तो कोई समझौता हुआ और ना ही युद्धविराम की घोषणा की जा सकी. पुतिन ने अपनी स्थिति में कोई नरमी नहीं दिखाई.

अमेरिका ने अपनाए सभी विकल्प

ट्रंप प्रशासन ने यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए हर संभव कूटनीतिक विकल्प अपनाए. एक तरफ यूक्रेन को लंबी दूरी की टॉमहॉक मिसाइलें देने की योजना पर विचार किया गया. दूसरी ओर, ट्रंप ने सुझाव दिया कि यदि यूक्रेन कुछ क्षेत्रों पर रूस की पकड़ को मान ले, तो युद्ध को खत्म किया जा सकता है.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात कर दोहराया कि अमेरिका चाहता है कि युद्धविराम हो, लेकिन रूस चाहता है कि समझौता युद्ध के कारणों के निदान पर आधारित हो. इस पहल के बावजूद बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई.

रूस पर आर्थिक दबाव

अमेरिका ने अंततः रूस के दो सबसे बड़े तेल कंपनियों रोजनेफ्ट और लुकॉयल पर नए प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया. इसके साथ ही यूरोप ने भी रूस से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के आयात पर रोक लगाई.

रूस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पश्चिमी प्रतिबंधों का वह सामना करने में सक्षम है और अपनी आर्थिक व ऊर्जा क्षमताओं को विकसित करना जारी रखेगा.

जेलेंस्की की चिंता

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रूस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने से ही उसे बातचीत की मेज पर लाया जा सकता है. हालांकि, सर्दियों के आने के साथ ही यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर रूस के हमले बढ़ने की संभावना है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी प्रतिबंध तभी असर दिखाएंगे जब यह दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा बने. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन इस रुख पर स्थायी रहेगा या नहीं.

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