पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमलों की गति तेजी से बढ़ी है, और अब यह एक सिलसिलेवार तरीके से हो रहे हैं, जो पहले की छिटपुट घटनाओं से कहीं अधिक खतरनाक साबित हो रहे हैं. पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान की सुरक्षा बलों पर अचानक हमलों में वृद्धि ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को फिर से एक गंभीर चुनौती के सामने ला खड़ा किया है. इन हमलों में जिस तेजी से वृद्धि हुई है, वह सवाल खड़ा करता है कि आख़िर TTP की मारक ताकत इतनी बढ़ी कैसे? इस सवाल का उत्तर पाकिस्तान के लिए अब एक नई और हैरान करने वाली कहानी बनकर उभरा है, जो अफगानिस्तान में छोड़े गए अमेरिकी और NATO हथियारों से जुड़ी हुई है.
अमेरिकी और NATO हथियारों का TTP तक पहुंचना
सुरक्षा एजेंसियों की जांच के बाद यह बात साफ हो गई है कि TTP को अफगानिस्तान में अमेरिकी और NATO की सेनाओं द्वारा छोड़े गए आधुनिक हथियारों ने एक नई ताकत दी है. अफगानिस्तान से अमेरिकी फौजों की जल्दबाजी में वापसी के दौरान बड़ी मात्रा में हथियार वहां छोड़ दिए गए थे, और इन्हीं हथियारों पर अब TTP जैसे आतंकी संगठन काबिज हो चुके हैं. इन हथियारों की बड़ी संख्या अब पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने का मुख्य कारण बन रही है.
TTP के पास कौन से आधुनिक हथियार हैं?
पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा के विभिन्न इलाकों में हुए ताजा ऑपरेशनों से यह बात सामने आई है कि आतंकियों के पास वही अत्याधुनिक हथियार हैं, जिन्हें अमेरिका और NATO ने अफगान सेना को सौंपे थे. इन हथियारों में M4 और M16 राइफलें, नाइट विजन गॉगल्स, उच्च गुणवत्ता वाले विस्फोटक और स्टील-हेडेड बुलेट्स शामिल हैं. खासतौर से ये बुलेट्स बुलेटप्रूफ जैकेट्स तक को भेद सकती हैं, जिससे TTP की मारक क्षमता पहले से कहीं अधिक घातक हो गई है. ये हथियार अब उन्हें सुरक्षा बलों के खिलाफ ज्यादा प्रभावी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाते हैं.
रात में भी हमला करना अब हुआ आसान
TTP के पास अब नाइट विजन जैसी अत्याधुनिक तकनीक है, जो उन्हें रात के अंधेरे में भी अपने निशाने को सटीक रूप से पहचानने की क्षमता देती है. इन तकनीकों के कारण, TTP अब रात के समय में भी सुरक्षा बलों पर सटीक हमले कर सकता है, जो पहले असंभव सा प्रतीत होता था. नाइट विजन गॉगल्स और ऑटोमैटिक राइफलों की मदद से आतंकवादियों के लिए घात लगाकर हमला करना अब और भी आसान हो गया है. इसका परिणाम यह हुआ है कि पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों, जैसे स्वात, डेरा इस्माइल खान, बाजौर और वज़ीरिस्तान में TTP के हमले अब ज्यादा घातक और तेज हो गए हैं.
पाकिस्तान की सुरक्षा पर खतरा क्यों बढ़ा?
विशेषज्ञों के अनुसार, अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद TTP को न केवल शरण मिली है, बल्कि उसे हथियारों और रसद की भी आसानी हो गई है. अमेरिका और NATO की छोड़ी गई सैन्य संपत्ति अब TTP के लिए एक युद्ध-खजाने की तरह साबित हो रही है, जिससे उन्हें अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत करने का मौका मिला है. यह स्थिति पाकिस्तान के लिए एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बन गई है, क्योंकि TTP अब अधिक संगठित, घातक और तकनीकी रूप से सक्षम हो चुका है.
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