इधर बातचीत नाकाम, उधर तबाही शुरू... TTP ने पाकिस्तानी सेना पर किया बड़ा हमला, 7 जवानों की मौत

पाकिस्तान के लिए आतंकवाद एक बार फिर गंभीर चुनौती बन गया है. अफगान तालिबान के साथ शांति वार्ता विफल होते ही आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तानी सेना पर बड़ा हमला किया है.

TTP launched a major attack on Pakistani army
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के लिए आतंकवाद एक बार फिर गंभीर चुनौती बन गया है. अफगान तालिबान के साथ शांति वार्ता विफल होते ही आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तानी सेना पर बड़ा हमला किया है. यह हमला इतना घातक था कि इसमें एक कैप्टन रैंक के अधिकारी सहित सात सैनिक मारे गए, जबकि 17 से अधिक सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं.

इस हमले ने पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा संकट को फिर से उजागर कर दिया है, खासकर तब जब देश पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है.

यह हमला कैसे हुआ?

घटना की पुष्टि पाकिस्तान सेना के मीडिया विभाग ISPR (Inter-Services Public Relations) ने की है. रिपोर्टों के अनुसार, सेना का एक काफिला खैबर पख्तूनख्वा के कुर्रम कबायली इलाके से गुजर रहा था, जो अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है. इसी दौरान आतंकवादियों ने सड़क किनारे आईईडी (Improvised Explosive Device) विस्फोट किया और उसके बाद फायरिंग शुरू कर दी.

मुठभेड़ में कैप्टन नोमान नामक अधिकारी सहित सात सैनिक मौके पर ही मारे गए. हमले के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और आतंकियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की, जिसमें सात आतंकवादी मारे गए.

यह इलाका लंबे समय से TTP की सक्रियता का गढ़ माना जाता है, और यह हमला दर्शाता है कि संगठन अभी भी पाकिस्तान के भीतर संगठित और सक्षम है.

“फील्ड मार्शल” काजिम की साजिश

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस हमले की योजना कुर्रम जिले के टीटीपी कमांडर अहमद काजिम ने बनाई थी. आतंकियों के बीच वह “फील्ड मार्शल” के नाम से कुख्यात है. पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने उस पर 10 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया हुआ है.

काजिम पर आरोप है कि उसने पिछले कुछ वर्षों में 100 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या करवाई है. माना जा रहा है कि हाल ही में पाकिस्तानी सेना द्वारा चलाए गए एक अभियान में TTP के आठ आतंकवादियों के मारे जाने का बदला लेने के लिए यह हमला किया गया.

अफगान तालिबान से रिश्तों में दरार

इस हमले की अहमियत इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि यह घटना पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच वार्ता विफल होने के तुरंत बाद हुई. इस्तांबुल में दोनों पक्षों के बीच हाल ही में बातचीत हुई थी, जिसका उद्देश्य टीटीपी के खिलाफ संयुक्त रणनीति बनाना था, लेकिन यह वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी.

पाकिस्तान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि टीटीपी को अफगानिस्तान की जमीन से पनाह और समर्थन मिलता है. वहीं, अफगान तालिबान सार्वजनिक रूप से इन आरोपों से इनकार करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों समूहों के बीच वैचारिक और जातीय जुड़ाव साफ दिखता है.

वार्ता के असफल रहने के बाद खैबर पख्तूनख्वा, उत्तरी वज़ीरिस्तान और कुर्रम जैसे सीमावर्ती इलाकों में TTP की गतिविधियाँ और हमले तेजी से बढ़े हैं.

बढ़ती आतंकी हिंसा

हाल के आंकड़े बताते हैं कि 2025 में अब तक खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी हमलों में 298 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें 117 पुलिसकर्मी और 181 आम नागरिक शामिल हैं. इसके अलावा लगभग 486 लोग घायल हुए हैं.

यह आंकड़े बताते हैं कि आतंकवाद पर काबू पाने के लिए पाकिस्तान के प्रयास कितने नाकाम साबित हो रहे हैं. सेना ने कई बार “क्लियर-ऑपरेशन” चलाने का दावा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि टीटीपी लगातार अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में फिर से पकड़ बना रहा है.

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