तुर्की ने रच दिया इतिहास, किया मानवरहित फाइटर जेट 'Kizilelma' का सफल परिक्षण, भारत को भी खतरा!

तुर्की ने हाल ही में रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. देश के विकसित मानवरहित फाइटर जेट किज़िलेल्मा ने हवा में लक्ष्य विमान को मिसाइल से निशाना बनाकर सफलतापूर्वक मार गिराया.

Turkey successfully tests unmanned fighter jet Kizilelma
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तुर्की ने हाल ही में रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. देश के विकसित मानवरहित फाइटर जेट किज़िलेल्मा ने हवा में लक्ष्य विमान को मिसाइल से निशाना बनाकर सफलतापूर्वक मार गिराया. यह परीक्षण तुर्की के सिनोप तट पर किया गया, और इसके दौरान किज़िलेल्मा ने अपने एईएसए रडार (AESA Radar) के माध्यम से लक्ष्य की पहचान की और बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल की मदद से विमान को नष्ट किया.

विशेष रूप से यह उल्लेखनीय है कि तुर्की इस तकनीक को विकसित करने वाला पहला देश बन गया है, जिसने मानवरहित फाइटर जेट को हवा में अन्य विमान को मार गिराने के लिए सक्षम किया. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सफलता मानवरहित युद्ध प्रणालियों में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है.

किज़िलेल्मा: तकनीक और क्षमताएँ

किज़िलेल्मा को तुर्की की अग्रणी ड्रोन कंपनी बायकर डिफेंस ने विकसित किया है. इस ड्रोन में एक सिंगल टर्बोफैन इंजन है और यह उड़ान के दौरान 6000 किलोग्राम तक का वजन संभाल सकता है. हथियार भार के तौर पर यह 1500 किलोग्राम तक ले जा सकता है. इसके अलावा इसमें तोयगुन टारगेटिंग सिस्टम लगा हुआ है, जो इसे विभिन्न प्रकार की मिसाइलों और हमलों के लिए सक्षम बनाता है.

रडार के मामले में, किज़िलेल्मा में स्वदेशी AESA रडार लगाया गया है, जो दुश्मन की पहचान करने और उसे ट्रैक करने में बेहद प्रभावी है. विश्लेषकों के अनुसार, यह ड्रोन अपने फाइटर जेट समकक्षों की तुलना में रडार पर कम संकेत छोड़ता है, जिससे दुश्मन के लिए इसे पहचानना कठिन होता है.

तुर्की की रणनीति और भारत के लिए खतरा

तुर्की ने अपनी यह नई तकनीक न केवल घरेलू सुरक्षा के लिए विकसित की है, बल्कि यह वैश्विक डिफेंस बाजार में भी अपनी स्थिति मजबूत करने का संकेत देती है. तुर्की ने पहले ही बड़ी संख्या में ड्रोन पाकिस्तान को सप्लाई किए हैं, जिसमें टी-2 और अकिंसी ड्रोन शामिल हैं. इन ड्रोन का उपयोग सीमा पर संभावित संघर्षों में किया जा सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि किज़िलेल्मा की क्षमताएँ और तुर्की की ड्रोन्स पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के हाथ में आने से भारत के लिए सुरक्षा चुनौती बढ़ सकती है. इसके अलावा, तुर्की ने ड्रोन तकनीक को मालदीव और बांग्लादेश जैसे अन्य देशों तक भी पहुंचाया है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण प्रभावित हो सकते हैं.

किज़िलेल्मा के युद्धक्षेत्र में प्रभाव

किज़िलेल्मा अब हवा से हवा में और हवा से जमीन पर दोनों तरह के हमलों के लिए सक्षम है. इसके मानवरहित होने के कारण यह मिशनों में जोखिम कम करता है. तुर्की की कंपनी बायकर ने वर्ष 2023 और 2024 में केवल ड्रोन निर्यात से लगभग 2 अरब डॉलर की कमाई की. इसका 90 प्रतिशत आय विदेशों में ड्रोन्स बेचकर प्राप्त हुआ. पिछले चार वर्षों में यह कंपनी तुर्की की शीर्ष रक्षा और एयरोस्पेस फर्म बन गई है.

परीक्षण के दौरान 5 एफ-16 फाइटर जेट भी मर्जिफोन एयर बेस से उड़ान भरते हुए ड्रोन के प्रदर्शन का हिस्सा बने. भविष्य में किज़िलेल्मा को तुर्की के युद्धपोत TCG Anadolu पर बायकर के टीबी-3 किलर ड्रोन के साथ तैनात करने की योजना है, जिससे समुद्री और हवाई दोनों मोर्चों पर नियंत्रण और क्षमताएँ बढ़ जाएँगी.

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