Pakistan Turkey Tensions: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए तुर्की और कतर कई हफ्तों से पर्दे के पीछे शांति का एक पुल खड़ा करने में जुटे थे. दुनिया भर में इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयास माना जा रहा था.
लेकिन अब वहीं से एक अप्रत्याशित विवाद उभर आया है. विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि अंकारा में हुई गुप्त वार्ताओं के दौरान पाकिस्तानी सैन्य प्रतिनिधिमंडल के व्यवहार ने तुर्की को इतना नाराज़ कर दिया कि तुर्की की खुफिया एजेंसी के प्रमुख को सीधे जनरल असीम मुनीर को कड़ा संदेश भेजना पड़ा.
वार्ता के कमरे में आखिर हुआ क्या?
खबरें बताती हैं कि पाकिस्तानी प्रतिनिधि न केवल अपनी कठोर मांगों पर अड़ गए बल्कि कई मौकों पर तुर्की और कतर दोनों की मध्यस्थता को नजरअंदाज करते दिखे. यह रवैया न सिर्फ अप्रत्याशित था, बल्कि कूटनीतिक शिष्टाचार के लिहाज से अस्वीकार्य भी माना गया. अंकारा को ऐसा लगा कि पाकिस्तान की तरफ से यह टीम पारस्परिक सम्मान के बुनियादी नियमों के साथ न्याय नहीं कर रही थी और इससे पूरी प्रक्रिया को झटका लगा.
“इज्जत नहीं, तो साझेदारी नहीं”
सूत्र बताते हैं कि तुर्की की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी (MIT) के प्रमुख ने यह व्यवहार “सीधी बेइज्जती” करार दिया और जनरल मुनीर को साफ चेतावनी दी कि अगर यही रवैया जारी रहा, तो तुर्की इस पूरी प्रक्रिया से हाथ खींच लेगा.
इसके बाद तुर्की ने पाकिस्तान के सैन्य ढांचे के साथ अपनी प्रत्यक्ष भागीदारी कम कर दी है. बैकडोर चैनल, जो अब तक सक्रिय थे, अचानक से लगभग निष्क्रिय पड़ गए हैं, यह स्थिति इस क्षेत्र की राजनीति पर गहरा असर डाल सकती है.
क्या बदल रही है क्षेत्रीय राजनीति की दिशा?
पाकिस्तान और तुर्की वर्षों से एक-दूसरे को रणनीतिक साथी बताते रहे हैं. भारत-पाक संघर्ष के दौरान भी तुर्की ने खुले तौर पर पाकिस्तान का समर्थन किया था. अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी अंकारा ने अक्सर मध्यस्थ की भूमिका निभाई है. लेकिन यह घटना दोनों देशों के सैन्य तालमेल में दरार, भरोसे की कमी और क्षेत्रीय समीकरणों में एक नई अनिश्चितता का संकेत दे रही है.
अफगानिस्तान सवालों के घेरे में
अफगानिस्तान पहले से ही पाकिस्तान के साथ संबंधों में तनाव झेल रहा है. ऐसे में तुर्की की नाराज़गी उस शांति प्रक्रिया को और जटिल बना सकती है जिस पर काबुल, इस्लामाबाद और अंकारा सभी दांव लगा बैठे थे. अगर यह गतिरोध आगे बढ़ता है, तो क्षेत्र में सुरक्षा और कूटनीति दोनों ही नई दिशा ले सकती हैं.
यह भी पढ़ें- कहीं दमघोंटू हवा में तो नहीं रह रहे आप? सिर्फ एक टैप में ऐसे चल जाएगा पता, जानिए पूरी जानकारी