किस्मत हो तो ऐसी! 2 दोस्तों के हाथ लगा 15.34 कैरेट का बेशकीमती हीरा, कीमत जान हो जाएंगे होश फाख्ता

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से एक अनोखा किस्सा सामने आया है, जिसने दो दोस्तों की पूरी जिंदगी बदल दी. सतीश खटीक और साजिद मोहम्मद नामक दो युवकों को एक खदान से 15.34 कैरेट का हीरा मिला है.

Two friends in Madhya Pradesh struck luck as they discovered a 15.34-carat diamond from the ground
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मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से एक अनोखा किस्सा सामने आया है, जिसने दो दोस्तों की पूरी जिंदगी बदल दी. सतीश खटीक और साजिद मोहम्मद नामक दो युवकों को एक खदान से 15.34 कैरेट का हीरा मिला है, जिसकी कीमत 50 लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है. यह हीरा न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि उनके जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत भी है.

बुरे वक्त में आई राहत

सतीश और साजिद दोनों का परिवार पहले आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. एक मीट की दुकान चलाने वाले सतीश और दूसरे फ्रूट स्टॉल पर काम करने वाले साजिद के लिए घर का खर्च चलाना भी मुश्किल था. लेकिन इस अनमोल खजाने के मिलने के बाद, उनकी सारी मुश्किलें एक पल में हल हो गईं.

रत्नगर्भा पन्ना ने बदली किस्मत

पन्ना जिले का कृष्ण कल्याणपुर क्षेत्र रत्नों के लिए प्रसिद्ध है, और यहां की उथली खदान से इन दोनों युवकों ने यह बेशकीमती हीरा खोज निकाला. एक महीने की मेहनत के बाद, दोनों दोस्तों को वह अद्भुत हीरा मिला, जिसने उनके भाग्य को पलट दिया. सतीश और साजिद ने 14 नवंबर से 31 दिसंबर तक खदान का पट्टा लिया था, और इसी दौरान उन्हें यह दुर्लभ हीरा मिला.

नीलामी से मिलेंगे अच्छे दिन

इस हीरे को सतीश ने कार्यालय में जमा कर दिया है और यह नीलामी में रखा जाएगा. नीलामी से मिलने वाली राशि से ये दोनों दोस्त न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारेंगे, बल्कि परिवार की खुशी के लिए भी खर्च करेंगे. सतीश का कहना है कि वे नीलामी से मिलने वाली रकम से अपने परिवार की मदद करेंगे और एक व्यवसाय शुरू करेंगे.

परिवार के लिए उठाएंगे कदम

साजिद और सतीश ने नीलामी से मिली रकम को बराबर-बराबर बांटने का फैसला किया है. पहले, वे अपनी बहनों की शादी में खर्च करेंगे, फिर शेष पैसों से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाएंगे. इस हीरे के मिलने से उनका जीवन पूरी तरह बदलने जा रहा है.

यह दोनों दोस्त पन्ना की खदान में पहले भी अपनी किस्मत आजमाने गए थे, लेकिन इस बार 20 दिन में उन्होंने वो कर दिखाया जो उनके परिवार वाले दशकों से नहीं कर पाए थे. साजिद के दादा और पिता ने भी इस क्षेत्र में काम किया था, लेकिन उन्हें कोई बड़ी सफलता नहीं मिली थी. अब ये दोस्त पन्ना के इतिहास में अपना नाम दर्ज करने जा रहे हैं.

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