न्यूयॉर्क: गाजा में दो वर्षों से जारी हिंसा को रोकने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गाजा पीस प्लान अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी हासिल कर चुका है. सोमवार को हुई वोटिंग में 15 सदस्य देशों ब्रिटेन, फ्रांस, सोमालिया सहित में से 13 ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. किसी भी देश ने इसका विरोध नहीं किया, जबकि रूस और चीन ने मतदान से दूरी बनाई.
इस प्रस्ताव के पारित होने के साथ ही ट्रंप का 20-बिंदुओं वाला रोडमैप अब एक अंतरराष्ट्रीय मैंडेट बन गया है, जिसके तहत गाजा में संघर्ष-विराम, पुनर्निर्माण, नई गवर्निंग व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र की स्थापना की जाएगी.
हालांकि, गाजा पर शासन करने वाले समूह हमास ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है, और इसे फिलिस्तीनियों पर अंतरराष्ट्रीय शासन थोपने की कोशिश बताया है.
UNSC की मंजूरी का क्या मतलब है?
सुरक्षा परिषद की मंजूरी से अब गाजा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक औपचारिक ढांचा तैयार किया जा सकेगा.
यह फ्रेमवर्क निम्न तीन मुख्य उद्देश्यों पर केंद्रित है—
अमेरिका का कहना है कि यह प्लान गाजा में एक "सुरक्षित, आत्मनिर्भर और स्थिर" माहौल तैयार करेगा, साथ ही यह भी सुनिश्चित करेगा कि इजरायल को किसी भी तरह के सुरक्षा खतरे का सामना न करना पड़े.
ट्रंप के 20-पॉइंट ब्लूप्रिंट में क्या है खास?
ट्रंप प्रशासन ने गाजा के लिए जो 20-बिंदु योजना बनाई है, उसमें कई बड़े बदलावों और नए अंतरराष्ट्रीय तंत्र की बात कही गई है. UNSC के प्रस्ताव में इस योजना को आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है.
मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. बोर्ड ऑफ पीस का गठन
सूत्रों के अनुसार, इस बोर्ड के चेयरमैन ट्रंप स्वयं हो सकते हैं, हालांकि इस पर औपचारिक घोषणा नहीं हुई है.
2. गाजा में इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स की तैनाती
योजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, जो—
यह फोर्स कई देशों के सैनिकों से मिलकर बनेगी और इजरायल, मिस्र व अंतरराष्ट्रीय कार्रवाईकर्ताओं के साथ समन्वय में काम करेगी.
3. भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य का संकेत
योजना में यह संकेत दिया गया है कि लंबे समय में एक "राजनीतिक समाधान" के तहत फिलिस्तीन का एक स्वतंत्र राज्य संभव हो सकता है, हालांकि इस पर कोई स्पष्ट अवधि या शर्त निर्धारित नहीं की गई है.
हमास का विरोध: "यह ट्रस्टीशिप है, शांति नहीं"
हमास ने UNSC के फैसले को "अस्वीकार्य" बताया है. समूह का कहना है कि—
हमास ने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्ताव की भाषा में फिलिस्तीनी जनता की मांगों और ऐतिहासिक मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है.
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