Union Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 को लेकर हलचल तेज हो चुकी है और अब इसकी तैयारियों से जुड़ी अहम जानकारियां सामने आने लगी हैं. संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इस बार आयात-निर्यात व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक, आगामी बजट में सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) की मौजूदा जटिल व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे न सिर्फ व्यापार को राहत मिलेगी बल्कि लंबे समय से चली आ रही कानूनी उलझनों पर भी लगाम लगेगी.
जानकारी के अनुसार, सरकार सीमा शुल्क स्लैब की संख्या को मौजूदा आठ से घटाकर पांच या छह करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. इसका मकसद टैरिफ स्ट्रक्चर को ज्यादा पारदर्शी और समझने में आसान बनाना है. इससे इंपोर्ट ड्यूटी को देश की औद्योगिक जरूरतों और व्यापारिक प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने में मदद मिलेगी. साथ ही, सीमा शुल्क वर्गीकरण को लेकर उठने वाले विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है.
विवाद, उलटी शुल्क संरचना और छूट पर लगेगी लगाम
इस सुधार प्रक्रिया का मुख्य फोकस सीमा शुल्क से जुड़े पुराने विवादों को सुलझाना, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर जैसी समस्याओं को दूर करना और विवेकाधीन छूटों को कम करना है. माना जा रहा है कि यह कदम हाल ही में हुए और चल रही अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील्स को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है. इसके अलावा सरकार पेपरलेस और अधिक सुगम कस्टम सिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में भी लगातार काम कर रही है.
पिछले दो वर्षों से चल रही है सुधार की तैयारी
सरकार पिछले दो सालों से सीमा शुल्क ढांचे में बदलाव की दिशा में सक्रिय है. स्लैब कम करने और अनावश्यक छूट खत्म करने पर लगातार काम किया जा रहा है. एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पिछले बजट में कस्टम स्ट्रक्चर में अहम सुधार किए गए थे, लेकिन इसे और सरल बनाने की गुंजाइश अब भी मौजूद है. इसी दिशा में बीते तीन-चार महीनों से गहन मंथन चल रहा है, जिसके नतीजे इस साल के बजट में सामने आ सकते हैं.
जीएसटी से तालमेल की कोशिश
सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) सीमा शुल्क व्यवस्था को रिवाइज्ड जीएसटी स्ट्रक्चर के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने पर काम कर रहा है. उद्देश्य एक ऐसी प्रणाली विकसित करना है जो ज्यादा सुसंगत, सुचारू और व्यापार-अनुकूल हो. विभाग उद्योग जगत की ओर से उठाए गए मुद्दों को सुलझाने के लिए भी सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है.
मुकदमेबाजी घटाने पर सरकार का जोर
सरकार का सबसे बड़ा फोकस सीमा शुल्क से जुड़े विवादों को कम करना है, क्योंकि यही आगे चलकर मुकदमेबाजी का कारण बनते हैं. बताया जा रहा है कि विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) और डोमेस्टिक टैरिफ एरिया के बीच टैरिफ स्ट्रक्चर को नए सिरे से परिभाषित करने की योजना पर भी काम चल रहा है. यह व्यापक एसईजेड सुधारों का हिस्सा माना जा रहा है.
वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024 तक 75 हजार से ज्यादा सीमा शुल्क मामले लंबित थे, जिनमें 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूली योग्य है. उद्योग जगत ने ऐसे मामलों में माफी या समाधान योजना लाने की मांग की है, जहां जानबूझकर कर चोरी नहीं की गई हो. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि सीमा शुल्क का सरलीकरण सरकार के सुधार एजेंडे का अगला बड़ा कदम होगा. ऐसे में बजट 2026 में इस दिशा में बड़े ऐलान की पूरी उम्मीद की जा रही है.
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