US-EU Tariff: अमेरिका-EU के बीच ट्रेड वॉर, भारत को होगा बंपर फायदा! क्या है 'Mother of All Deals'?

वैश्विक व्यापार में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है. अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच टैरिफ को लेकर पनपी तनातनी ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में न केवल अस्थिरता पैदा की है, बल्कि भारत के लिए नए अवसर भी खोले हैं.

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

US-EU Tariff: वैश्विक व्यापार में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है. अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच टैरिफ को लेकर पनपी तनातनी ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में न केवल अस्थिरता पैदा की है, बल्कि भारत के लिए नए अवसर भी खोले हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस स्थिति से अपनी व्यापारिक स्थिति मजबूत कर सकता है और निर्यात में बड़े स्तर पर बढ़त हासिल कर सकता है.

यह पूरी स्थिति एक प्रकार के “व्यापारिक युद्ध” की तरह है, जहाँ एक पक्ष का दबाव दूसरे पक्ष को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन किसी तीसरे खिलाड़ी भारत को फायदा होता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड विवाद और उससे जुड़े टैरिफ फैसले ने अमेरिका और यूरोप को आमने-सामने खड़ा कर दिया है. इसी के कारण यूरोपीय यूनियन के सामने भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने का स्पष्ट अवसर खुला है.

अमेरिका-ईयू टैरिफ जंग: स्थिति का जायजा

17 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूरोपीय देशों- जैसे डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड के आयात पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की. यह टैरिफ ग्रीनलैंड के अमेरिकी कब्जे के अस्वीकार के संदर्भ में जुड़ा हुआ है.

टैरिफ 1 फरवरी से लागू होगा और जून तक बढ़कर 25% तक पहुँच जाएगा, जब तक अमेरिका “ग्रीनलैंड की पूर्ण खरीद” को लेकर अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो जाता. इस कदम से यूरोपीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ा है और यूरोप अब अन्य देशों के साथ व्यापारिक समझौते मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित हो रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोपीय यूनियन इस स्थिति का फायदा उठाते हुए भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने के लिए तैयार है. यह समझौता भारत को अमेरिका-यूरोप के बीच बढ़ते तनाव से होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई करने में मदद कर सकता है.

भारत-ईयू FTA: अंतिम चरण में वार्ता

सूत्रों के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA वार्ता अब अंतिम दौर में है. 27 जनवरी को दिल्ली में होने वाले शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है. इस बैठक में यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी मौजूद रहेंगे.

विशेष रूप से इस शिखर सम्मेलन का समापन 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के दिन होने की उम्मीद है, जब दोनों नेता मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शामिल होंगे.

व्यापारिक अवसर और भारत का लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक व्यापार में अस्थिरता के बीच भारत स्थिर और भरोसेमंद साझेदार साबित हो सकता है. अमेरिकी टैरिफ के चलते यूरोप अपने व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए भारत जैसे बड़े निर्यातक देश की ओर झुकेगा.

सामान्य व्यापारिक परिस्थितियों में अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव भारत के लिए चुनौती बन सकता है, लेकिन मौजूदा स्थिति इसे एक लाभकारी अवसर में बदल रही है. भारत की निर्यात क्षमता बढ़ेगी और यूरोप के बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच मजबूत होगी.

इसके अलावा, भारत ने मिडिल ईस्ट के देशों के साथ भी FTA कर रखे हैं, जिससे अमेरिकी टैरिफ के संभावित नुकसान को पहले ही काफी हद तक कम किया जा चुका है. अब भारत की नजर यह देखने पर है कि यूरोपीय संघ के साथ इस नई व्यापारिक डील से किस प्रकार का आर्थिक लाभ और निर्यात बढ़त हासिल हो सकती है.

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