Prayagraj Magh Mela 2026: प्रयागराज के पावन संगम तट पर 44 दिनों तक चलने वाले ऐतिहासिक माघ मेले का शुभारंभ शनिवार, 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के पहले स्नान के साथ हो गया. गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर आस्था का यह महासंगम देखने को मिल रहा है, जहां देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालु पुण्य अर्जित करने के लिए पवित्र स्नान कर रहे हैं. सुबह से ही संगम क्षेत्र “हर-हर गंगे” और “जय गंगा मैया” के जयघोष से गूंज उठा.
माघ मेले की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज में आध्यात्मिक वातावरण पूरी तरह से जीवंत हो गया है. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि माघ स्नान की परंपरा आज भी भारतीय जनमानस में गहराई से रची-बसी है.
#WATCH | Prayagraj, UP | People take a holy dip at Triveni Sangam on the occassion of Paush Purnima, the first 'snaan' and also the first day of Magh Mela 2026. pic.twitter.com/2pp72Zib9z
— ANI (@ANI) January 3, 2026
माघ मास और कल्पवास का विशेष धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास में संगम पर स्नान और कल्पवास करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. शास्त्रों में उल्लेख है कि इस काल में संयम, साधना और भक्ति से किया गया जीवन आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है. इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु अगले 44 दिनों तक संगम तट पर रहकर कल्पवास करेंगे.
कल्पवासी इस अवधि में सादा जीवन, नियमित स्नान, जप-तप और सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक साधना करते हैं. माना जाता है कि माघ मास में संगम स्नान से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है.
लाखों श्रद्धालुओं ने किया पवित्र संगम स्नान
माघ मेले के पहले ही दिन संगम तट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. मेला अधिकारी ऋषि राज ने बताया कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पहले से व्यापक तैयारियां की थीं. उनके अनुसार पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर सुबह 8 बजे तक लगभग 65 लाख श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान कर चुके थे. श्रद्धालु संगम नोज समेत विभिन्न घाटों पर स्नान कर रहे हैं. कल्पवासियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है, जो पूरे मेले की अवधि तक यहीं रहकर धार्मिक अनुष्ठान करेंगे.
सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके लिए लगभग 8 किलोमीटर लंबा स्नान घाट तैयार किया गया है, जहां गहरे पानी वाले क्षेत्रों में डीप वॉटर बैरिकेडिंग लगाई गई है. संगम नोज पर एनडीआरएफ, जल पुलिस और पीएसी के जवान पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात हैं.
पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी के लिए 300 से अधिक एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. संगम नोज पर बनाए गए वॉच टावर से पुलिसकर्मी 24 घंटे पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रख रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके.
ग्राउंड जीरो पर मौजूद प्रशासनिक अमला
प्रशासनिक अधिकारी सुबह से ही मेला क्षेत्र में मौजूद रहकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं. श्रद्धालुओं से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है. आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक प्लान को विशेष रूप से लागू किया गया है.
पांटून पुल नंबर एक और महावीर मार्ग को झूंसी की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए खोला गया है, जबकि दूसरे पांटून पुल को झूंसी से मेला क्षेत्र में आने वालों के लिए आरक्षित किया गया है. इससे भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है.
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