Utpanna Ekadashi 2025: मार्गशीर्ष मास की पावन बेला में आने वाली उत्पन्ना एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है. यह न केवल एक पौराणिक कथा से जुड़ी हुई तिथि है, बल्कि इसे “साल की पहली एकादशी” भी कहा जाता है. इस दिन का व्रत और पूजन साधक के जीवन में शुभता, समृद्धि और शांति लाता है. माना जाता है कि इस एकादशी से वर्ष की सभी एकादशियों की शुरुआत होती है, इसलिए इसे “उत्पत्ति की एकादशी” भी कहा जाता है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय असुर मुर ने देवताओं को पराजित कर स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया था. तब भगवान विष्णु ने उस राक्षस का अंत करने के लिए युद्ध किया, लेकिन युद्ध के दौरान भगवान विश्राम में चले गए. उसी समय उनके शरीर से एक दिव्य तेजस्विनी कन्या उत्पन्न हुई, जिसने मुर राक्षस का वध कर ब्रह्मांड को भयमुक्त किया. भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उस कन्या को आशीर्वाद दिया — “तुम मेरे शरीर से एकादशी के दिन उत्पन्न हुई हो, इसलिए तुम्हारा नाम ‘एकादशी’ रहेगा. जो भी इस तिथि पर व्रत और पूजन करेगा, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाएंगे.” इसी कारण मार्गशीर्ष मास की उत्पन्ना एकादशी को देवी एकादशी का जन्मदिन माना जाता है.
पूजन विधि और व्रत का महत्व
इस दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और देवी एकादशी की पूजा करते हैं. व्रत रखने वाले भक्त दिनभर उपवास रखते हैं और रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करते हैं. ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में पुण्य की वृद्धि होती है और सभी दुखों का अंत होता है. शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि अगले जन्मों में मोक्ष की प्राप्ति भी होती है.
राहुकाल का समय (Utpanna Ekadashi 2025 Rahu Kaal Time)
पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी के दिन राहुकाल का समय सुबह 9:25 बजे से 10:45 बजे तक रहेगा. इस दौरान कोई भी शुभ कार्य, जैसे पूजा या यात्रा की शुरुआत, नहीं करनी चाहिए. राहुकाल को अशुभ काल माना गया है, इसलिए इसे टालना ही उत्तम होता है.
उत्पन्ना एकादशी के शुभ मुहूर्त (Utpanna Ekadashi 2025 Puja Shubh Muhurat)
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. भारत-24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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