'मैं 200 रन भी बना लूं फिर भी वो खुश नहीं होते', किसके लिए ऐसी बात बोले वैभव सूर्यवंशी

भारतीय क्रिकेट की युवा फौज लगातार नए-नए सितारे उभार रही है, और इस लिस्ट में अब एक और दमदार नाम जुड़ गया है—वैभव सूर्यवंशी. राइजिंग स्टार्स एशिया कप में अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी से हर किसी का ध्यान खींचने वाले इस 15 वर्षीय खिलाड़ी ने यूएई के खिलाफ ऐसा तूफानी प्रदर्शन किया.

Vaibhav Suryavanshi Speaks on his perfomance father is not happy
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भारतीय क्रिकेट की युवा फौज लगातार नए-नए सितारे उभार रही है, और इस लिस्ट में अब एक और दमदार नाम जुड़ गया है—वैभव सूर्यवंशी. राइजिंग स्टार्स एशिया कप में अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी से हर किसी का ध्यान खींचने वाले इस 15 वर्षीय खिलाड़ी ने यूएई के खिलाफ ऐसा तूफानी प्रदर्शन किया, जिसे देखकर भारतीय क्रिकेट का भविष्य बेहद उज्ज्वल नजर आता है. वैभव ने टी-20 क्रिकेट में किसी भारतीय द्वारा संयुक्त रूप से दूसरा सबसे तेज़ शतक जड़कर इतिहास रच दिया.

यूएई के खिलाफ हुए मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी का बल्ला किसी तूफान की तरह बरसा. उन्होंने महज़ 32 गेंदों में शतक पूरा कर ऋषभ पंत के रिकॉर्ड की बराबरी की. 42 गेंदों में खेली गई उनकी 144 रनों की धुआंधार पारी में 11 चौकों और 15 गगनचुंबी छक्कों का तूफानी मेल देखने को मिला. उनकी इस विस्फोटक पारी की बदौलत इंडिया A ने 20 ओवरों में 297 का विशाल स्कोर खड़ा किया, जो किसी भी स्तर पर विपक्षी टीम को दबाव में डालने के लिए काफी है. मैच के बाद बीसीसीआई की ओर से जारी एक वीडियो में वैभव कमरे में वापस लौटने के बाद अपने पिता से बातचीत करते दिखे.

पिता की उम्मीदें और बेटे की सच्ची भावनाएं

वीडियो में वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी उन्हें शाबाशी देते हुए भी उस गेंद का जिक्र करते नजर आए, जिस पर वैभव आउट हुए थे. उन्होंने कहा कि उस गेंद पर भी वैभव छक्का मार सकते थे. यही बात वैभव ने मीडिया से बातचीत में दोहराते हुए बताया कि उनके पिता कभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते.वैभव के शब्दों में “चाहे मैं 200 रन क्यों न बना लूं, पिताजी हमेशा कहते हैं कि 10 रन और बना सकता था. लेकिन मेरी मां हमेशा खुश रहती हैं, चाहे मैं शतक लगाऊं या जीरो पर आउट हो जाऊं. वह बस इतना कहती हैं अच्छा खेलो, मन से खेलो.” यह बयान उनके खेल के साथ-साथ पारिवारिक समर्थन और दबाव के बीच मौजूद संतुलन को भी बारीकी से दर्शाता है.

वैभव का खेल और उनकी फिलॉसफी

अपनी बल्लेबाज़ी को लेकर वैभव ने बताया कि वह मैदान पर जाकर कुछ अलग करने का प्रयास नहीं करते. उनका मानना है कि खिलाड़ी को वही खेल खेलना चाहिए, जो उसके स्वाभाविक अंदाज़ का हिस्सा है. उन्होंने कहा “मैं बस अपनी नैचुरल गेम पर भरोसा करता हूं. बचपन से जो अभ्यास किया है, जिसे लेकर मेहनत की है, उसी को मैदान पर लागू करता हूं. अगर मैं कुछ ऐसा करूंगा जो मेरे खेल का हिस्सा नहीं है, तो न टीम को फायदा होगा और न मुझे.” उनकी यह सोच बताती है कि वैभव न सिर्फ तकनीकी रूप से मजबूत हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद परिपक्व हैं—यही गुण एक बड़े खिलाड़ी को बाकी से अलग करते हैं

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