'वायुशक्ति2026' युद्धाभ्यास: आठ एयरबेस, 125 से अधिक फाइटर जेट... ताकत प्रदर्शन करेगी भारतीय वायुसेना

ऑपरेशन सिंदूर के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी वायु शक्ति का प्रभावी प्रदर्शन कर चुकी भारतीय वायुसेना अब एक बार फिर अपनी सामरिक क्षमता और युद्धक तैयारी का भव्य प्रदर्शन करने जा रही है.

Vayu Shakti 2026 exercise Indian Air Force will demonstrate strength
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Vayushakti 2026: ऑपरेशन सिंदूर के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी वायु शक्ति का प्रभावी प्रदर्शन कर चुकी भारतीय वायुसेना अब एक बार फिर अपनी सामरिक क्षमता और युद्धक तैयारी का भव्य प्रदर्शन करने जा रही है. राजस्थान के पोकरण के नजदीक स्थित चांधन फील्ड फायरिंग रेंज में 12 फरवरी से भारतीय वायुसेना का मेगा एयर पावर एक्सरसाइज ‘वायुशक्ति 2026’ शुरू होने जा रहा है. इस अभ्यास का मुख्य और निर्णायक चरण 27 फरवरी को आयोजित किया जाएगा.

यह युद्धाभ्यास भारतीय वायुसेना के इतिहास के सबसे बड़े और सबसे जटिल एयर पावर वॉर गेम्स में शामिल माना जा रहा है, जिसमें आधुनिक तकनीक, मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस और वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों को शामिल किया गया है.

8 एयरबेस से उड़ान भरेंगे 125 से अधिक विमान

वायुशक्ति 2026 के दौरान पश्चिमी सीमा पर स्थित जोधपुर समेत कुल आठ एयरबेस से 125 से ज्यादा लड़ाकू, ट्रांसपोर्ट और सपोर्ट एयरक्राफ्ट दिन और रात दोनों समय उड़ान भरेंगे. इन विमानों के जरिए दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और समन्वित हमलों का अभ्यास किया जाएगा.

इस अभ्यास में वास्तविक युद्ध परिदृश्य तैयार किया जाएगा, जिसमें लंबी दूरी के हमले, तेज प्रतिक्रिया मिशन और मल्टी-लेयर एयर डिफेंस ऑपरेशन शामिल होंगे.

सुखोई-30 एमकेआई और राफेल संभालेंगे मोर्चा

इस विशाल वॉर गेम की अगुवाई भारतीय वायुसेना के दो सबसे आधुनिक और ताकतवर फाइटर जेट- सुखोई-30 एमकेआई और राफेल करेंगे. ये दोनों विमान हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमला करने की अपनी उन्नत क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे.

इन फाइटर जेट्स के जरिए यह दिखाया जाएगा कि भारतीय वायुसेना किसी भी ऊंचाई, दूरी और मौसम में सटीक प्रहार करने में पूरी तरह सक्षम है.

दो मोर्चों पर एक साथ युद्ध का अभ्यास

वायुशक्ति 2026 की सबसे अहम विशेषता यह है कि इसमें दो मोर्चों पर एक साथ युद्ध की स्थिति में ऑपरेशन करने का अभ्यास किया जाएगा. यह अभ्यास ‘कोऑर्डिनेटेड एयर पावर कॉन्सेप्ट’ पर आधारित होगा, जिसकी झलक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखने को मिली थी.

इस वॉर गेम में आक्रामक और रक्षात्मक दोनों प्रकार के मिशन शामिल होंगे, जिनमें दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भेदना, अपने ठिकानों की रक्षा करना और रणनीतिक लक्ष्यों को निष्क्रिय करना शामिल है.

24 फरवरी को फुल ड्रेस रिहर्सल

इस अभ्यास की फुल ड्रेस रिहर्सल 24 फरवरी को आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी प्रमुख ऑपरेशंस का रियल-टाइम परीक्षण किया जाएगा. इसके बाद 27 फरवरी को मुख्य कार्यक्रम होगा, जब चांधन फील्ड फायरिंग रेंज में करीब छह घंटे तक लगातार एयर ऑपरेशंस चलते रहेंगे.

मुख्य आयोजन के दौरान देश की सर्वोच्च राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की मौजूदगी की संभावना है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

अत्याधुनिक मिसाइलों की ताकत भी दिखेगी

वायुशक्ति 2026 के दौरान भारतीय वायुसेना अपनी अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का भी प्रदर्शन कर सकती है. इसमें राफेल लड़ाकू विमानों के लिए विकसित मेटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल और स्कैल्प क्रूज मिसाइल शामिल हैं.

मेटियोर मिसाइल को दुनिया की सबसे घातक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों में गिना जाता है, जबकि स्कैल्प मिसाइल दुश्मन के गहरे और सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता रखती है.

जोधपुर एयरबेस बनेगा कमांड सेंटर

पूरे युद्धाभ्यास का कमांड और कंट्रोल जोधपुर एयरबेस से संचालित किया जाएगा. इसके साथ ही हवा में तैनात AWACS (एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) लगभग छह घंटे तक लगातार उड़ान भरते हुए पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व करेगा.

AWACS को इस अभ्यास में एक ‘फ्लोटिंग वॉर रूम’ के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखेगा, मिशनों का समन्वय करेगा और रियल-टाइम कमांड फैसले लेने में मदद करेगा.

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