वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने पूरी दुनिया को चौंका दिया, लेकिन यह कार्रवाई किसी अचानक लिए गए फैसले का नतीजा नहीं थी. अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों ने इस मिशन को अंजाम देने से पहले महीनों तक बेहद गोपनीय तरीके से योजना बनाई, अभ्यास किया और हर संभावित स्थिति के लिए खुद को तैयार रखा. डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर चलाए गए इस ऑपरेशन ने दिखा दिया कि आधुनिक सैन्य अभियान किस हद तक सूक्ष्म योजना और तकनीक पर निर्भर हो चुके हैं.
सूत्रों के अनुसार, मादुरो को पकड़ने की रणनीति पर अमेरिका में काफी समय से काम चल रहा था. डेल्टा फोर्स समेत अमेरिका की एलीट स्पेशल यूनिट्स ने मादुरो के सेफ हाउस की हूबहू नक़ल तैयार की थी. इसी नकली ढांचे में बार-बार अभ्यास किया गया कि कड़ी सुरक्षा वाले परिसर में बिना चूक कैसे घुसा जाए.इसी दौरान, CIA की एक सीमित टीम अगस्त से ही मादुरो की दिनचर्या, उनकी आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जुटा रही थी. खुफिया नेटवर्क इतना मजबूत था कि ऑपरेशन शुरू होते ही मादुरो की सटीक लोकेशन पल-पल अपडेट की जा रही थी.
मौसम और समय का इंतजार
सारी तैयारियां पूरी होने के बावजूद ऑपरेशन को तुरंत अंजाम नहीं दिया गया. ट्रंप ने चार दिन पहले ही हरी झंडी दे दी थी, लेकिन सैन्य योजनाकारों ने सलाह दी कि बेहतर मौसम और कम बादलों का इंतजार किया जाए, ताकि हवाई कार्रवाई में कोई बाधा न आए.जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के मुताबिक, शुक्रवार रात 10:46 बजे (ईएसटी) राष्ट्रपति ट्रंप ने ऑपरेशन ‘एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व’ के लिए अंतिम मंजूरी दी.
मार-ए-लागो से लाइव ऑपरेशन की निगरानी
फ्लोरिडा के मार-ए-लागो क्लब में मौजूद ट्रंप अपने शीर्ष सलाहकारों के साथ इस पूरे मिशन की लाइव स्ट्रीमिंग देख रहे थे. ऑपरेशन के हर चरण पर उनकी नजर थी. मिशन पूरा होने के बाद फॉक्स न्यूज़ से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई बड़े फैसले लिए हैं, लेकिन ऐसा ऑपरेशन उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था.
कैरिबियन में अभूतपूर्व सैन्य तैनाती
पेंटागन ने इस मिशन के लिए कैरिबियन क्षेत्र में भारी सैन्य जमावड़ा किया. एक एयरक्राफ्ट कैरियर, 11 युद्धपोत और दर्जनभर से ज्यादा F-35 फाइटर जेट तैनात किए गए. कुल मिलाकर 15 हजार से अधिक सैनिकों को इस क्षेत्र में भेजा गया, जिसे आधिकारिक तौर पर ड्रग्स विरोधी अभियान के नाम पर पेश किया गया था.इसके साथ ही, पश्चिमी गोलार्ध के 20 सैन्य ठिकानों से 150 से ज्यादा विमान ऑपरेशन में शामिल हुए. इनमें F-35, F-22 जेट और B-1 बॉम्बर्स तक शामिल थे. ट्रंप के मुताबिक, हर संभावित हालात से निपटने के लिए आसमान में लड़ाकू विमान मौजूद थे.
साइलेंट मूवमेंट और अचानक हमला
पेंटागन ने चुपचाप एयर टैंकर, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग में माहिर विमान भी इलाके में भेज दिए थे. हवाई हमलों में काराकास के आसपास मौजूद सैन्य ठिकानों और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया. ला कार्लोटा एयर बेस की तस्वीरों में जले हुए एंटी-एयरक्राफ्ट वाहन इस कार्रवाई की गवाही देते हैं. इसके बाद अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज भारी हथियारों के साथ काराकास में दाखिल हुईं. उनके पास स्टील काटने वाले उपकरण भी थे, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी मजबूत दरवाजे को तोड़ा जा सके.
कुछ सेकंड में टूटी सुरक्षा
शनिवार तड़के करीब 1 बजे (ईएसटी) सैनिक मादुरो के कंपाउंड तक पहुंच गए. वहां हल्का प्रतिरोध हुआ और एक हेलीकॉप्टर को भी गोली लगी, लेकिन वह उड़ान भरने में सक्षम रहा. इसके बाद स्पेशल फोर्सेज और FBI एजेंटों ने मिलकर उस सेफ हाउस में प्रवेश किया, जिसे बेहद सुरक्षित माना जाता था.ट्रंप के शब्दों में, “वे ऐसे दरवाजों से अंदर घुसे, जहां घुसना नामुमकिन समझा जाता था. स्टील के दरवाजे कुछ ही सेकंड में हटा दिए गए.”
एक ऑपरेशन, कई संदेश
मादुरो की गिरफ्तारी सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह अमेरिका की सैन्य और खुफिया क्षमताओं का खुला प्रदर्शन भी था. महीनों की योजना, तकनीक का सटीक इस्तेमाल और राजनीतिक इच्छाशक्ति—इन तीनों ने मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया. अब दुनिया की नजर इस पर है कि इस कदम के बाद वेनेजुएला और वैश्विक राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है.
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