Venezuela News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने पूरी दुनिया की भू-राजनीति में हलचल मचा दी है. वेनेजुएला को लेकर ट्रंप ने ऐसा दावा किया है, जिसने न सिर्फ लैटिन अमेरिका बल्कि संयुक्त राष्ट्र, रूस, चीन और ईरान तक को चिंता में डाल दिया है. ट्रंप का कहना है कि निकोलस मादुरो के सत्ता से हटने के बाद वेनेजुएला का भविष्य अमेरिका तय करेगा और उसके विशाल तेल भंडार का दोहन भी खुद करेगा. इस बयान ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या अमेरिका अब खुले तौर पर किसी संप्रभु देश का प्रशासन संभालने की दिशा में बढ़ चुका है.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद वेनेजुएला में सत्ता का सुरक्षित हस्तांतरण होने तक अमेरिका ही वहां का प्रशासन चलाएगा. उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल संसाधनों का इस्तेमाल करेगा और अन्य देशों को भी बड़े पैमाने पर तेल बेचेगा. हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया कब तक चलेगी और कब वेनेजुएला को पूरी तरह स्वतंत्र प्रशासन सौंपा जाएगा.
हमले और मादुरो की गिरफ्तारी पर ट्रंप के दावे
ट्रंप ने दावा किया कि वेनेजुएला में हुई कार्रवाई के दौरान कुछ अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, लेकिन किसी की मौत नहीं हुई. उनके मुताबिक वेनेजुएला की सेना अमेरिकी कार्रवाई के लिए तैयार थी, फिर भी वह पूरी तरह पराजित हो गई. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि कोई और सत्ता में आए और हालात फिर से वही हो जाएं जो बीते वर्षों में बने रहे, इसलिए फिलहाल देश का संचालन अमेरिका खुद करेगा. उन्होंने यह भी दावा किया कि मादुरो की गिरफ्तारी बेहद गोपनीय और अंधेरे में की गई. ट्रंप के शब्दों में, “काराकास की बत्तियां लगभग बुझ चुकी थीं, चारों तरफ अंधेरा था और हालात बेहद खतरनाक थे.”
ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई का भी जिक्र
अपने बयान में ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने समुद्र के रास्ते आने वाली करीब 97 प्रतिशत नशीली दवाओं को नष्ट कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक-एक ड्रग बोट औसतन 25 हजार लोगों की जान ले लेती है. ट्रंप ने इसे अमेरिका की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि दुनिया का कोई और देश ऐसा नहीं कर सकता.
संयुक्त राष्ट्र की चिंता: “खतरनाक मिसाल”
अमेरिकी कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र ने गहरी चिंता जताई है. यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मादुरो की गिरफ्तारी और सैन्य कार्रवाई को एक खतरनाक उदाहरण बताया. उनके प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने कहा कि महासचिव इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इस तरह की कार्रवाइयों के दूरगामी और गंभीर परिणाम हो सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र ने यह भी दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर का सम्मान हर हाल में जरूरी है और वेनेजुएला के मामले में इन नियमों का उल्लंघन होता नजर आ रहा है.
रूस का कड़ा विरोध
रूस ने अमेरिकी एयरस्ट्राइक और दखल की तीखी आलोचना की है. रूस का कहना है कि ऐसे बहाने बेकार हैं जिनके जरिए किसी संप्रभु देश में सैन्य हस्तक्षेप को सही ठहराया जाता है. रूस ने जोर देकर कहा कि लैटिन अमेरिका को शांति का क्षेत्र बने रहना चाहिए और वेनेजुएला को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अपनी किस्मत खुद तय करने का अधिकार मिलना चाहिए.
चीन के लिए बढ़ी चिंता
ट्रंप के ऐलान के बाद चीन की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं. चीन वेनेजुएला के सबसे बड़े तेल खरीदारों में से एक रहा है और उसने उसे भारी कर्ज भी दे रखा है. अब अगर वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर अमेरिका का नियंत्रण होता है, तो यह चीन के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए बड़ा झटका हो सकता है. चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति के खिलाफ की गई यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और लैटिन अमेरिका व कैरेबियन क्षेत्र की शांति के लिए गंभीर खतरा है.
वैश्विक राजनीति में नया तनाव
वेनेजुएला को लेकर ट्रंप का यह बयान सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की राजनीति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कानून पर गहरा असर डाल सकता है. एक तरफ अमेरिका अपने कदम को रणनीतिक जीत बता रहा है, तो दूसरी ओर दुनिया के कई बड़े देश इसे खतरनाक हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी मान रहे हैं.
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