दुश्मनों का हाल बेहाल! पहली बार सामने आई "भैरव" स्पेशल फोर्स की वीडियो, खासियत जानकर रह जाएंगे दंग

Bhairav Unit: भारतीय सेना तेजी से बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए खुद को लगातार आधुनिक बना रही है. पारंपरिक हथियारों के साथ अब तकनीक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुकी है और इसी दिशा में सेना ने एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है.

Video of Bhairav Special Force surfaced for the first time stunned to know its specialty
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Bhairav Unit: भारतीय सेना तेजी से बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए खुद को लगातार आधुनिक बना रही है. पारंपरिक हथियारों के साथ अब तकनीक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुकी है और इसी दिशा में सेना ने एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है. सेना ने अब तक एक लाख से ज्यादा सैनिकों को ड्रोन ऑपरेशन की ट्रेनिंग दी है, जिससे वे युद्ध के मैदान में निगरानी, लक्ष्य पहचान और सटीक हमले जैसे कार्य कर सकें. यह पहल भविष्य के युद्धों में सेना की ताकत को कई गुना बढ़ाने वाली मानी जा रही है.

ड्रोन युद्ध आधुनिक सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है. भारतीय सेना ने इस सच्चाई को स्वीकार करते हुए बड़े पैमाने पर अपने जवानों को ड्रोन तकनीक में प्रशिक्षित किया है. ये सैनिक अब अलग-अलग तरह के ड्रोन का इस्तेमाल कर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं, सीमापार मौजूद ठिकानों की जानकारी जुटा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर सटीक हमला भी कर सकते हैं. इससे सैनिकों की जान को खतरे में डाले बिना ऑपरेशन को अंजाम देना संभव हो गया है.

‘भैरव’ नाम की नई स्पेशल फोर्स का गठन

ड्रोन युद्ध क्षमता को और मजबूत करने के लिए भारतीय सेना ने ‘भैरव’ नाम की एक नई स्पेशल फोर्स तैयार की है. इस फोर्स के सभी जवान ड्रोन संचालन में पूरी तरह दक्ष हैं. ये सैनिक दुश्मन के इलाके में गहराई तक घुसकर ड्रोन की मदद से उनके ठिकानों, हथियारों और सैनिकों को निशाना बना सकते हैं. खास तौर पर दक्षिणी कमान के रेगिस्तानी इलाके में तैनात ‘भैरव’ बटालियन ने अपनी तैयारियों से यह साबित कर दिया है कि वह किसी भी चुनौती से निपटने में सक्षम है.

इन्फैंट्री से चुने गए जवान, विशेष प्रशिक्षण

‘भैरव’ बटालियन के लिए जवानों का चयन इन्फैंट्री रेजिमेंट से किया गया है. इन सैनिकों को पारंपरिक पैदल सेना के कौशल के साथ-साथ आधुनिक युद्ध तकनीकों की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है. ड्रोन ऑपरेशन, हाई-टेक सर्विलांस, तेज और सटीक हमले, तथा सीमित संसाधनों में स्वतंत्र रूप से ऑपरेशन करना इनके प्रशिक्षण का मुख्य हिस्सा है.

क्यों बनाई गईं ‘भैरव’ बटालियन

भारतीय सेना मुख्यालय ने देश-विदेश में हुए हालिया युद्धों और संघर्षों का गहन अध्ययन करने के बाद ‘भैरव’ बटालियन की अवधारणा विकसित की है. इसका उद्देश्य ऐसी फोर्स तैयार करना है जो तेज, आक्रामक और तकनीक-आधारित हो. ये बटालियन सामरिक और ऑपरेशनल दोनों स्तरों पर स्पेशल ऑपरेशन करने में सक्षम होंगी. फिलहाल 15 ‘भैरव’ बटालियन तैयार की जा चुकी हैं, जिन्हें देश की दोनों सीमाओं पर तैनात किया गया है. भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाकर 25 करने की योजना है.

पैरा फोर्स और इन्फैंट्री के बीच की कड़ी

‘भैरव’ बटालियन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे पैरा स्पेशल फोर्सेज और सामान्य इन्फैंट्री बटालियन के बीच की दूरी को कम कर सकें. ये यूनिट्स जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई कर सकती हैं और सीमित समय में दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं. इन्हें सामरिक स्तर से लेकर गहरी ऑपरेशनल कार्रवाई तक की जिम्मेदारी दी जाएगी.

बदलते युद्ध और नई रणनीति

एक ‘भैरव’ बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर ने बताया कि आज के युद्ध पारंपरिक नहीं रह गए हैं. आधुनिक संघर्ष हाइब्रिड प्रकृति के हो चुके हैं, जिनमें साइबर, ड्रोन, सूचना युद्ध और पारंपरिक हथियारों का मिश्रण होता है. ऐसे में सेना का तकनीक-सक्षम होना बेहद जरूरी है. ‘भैरव’ बटालियन इसी पुनर्गठन प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिन्हें भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

रेगिस्तान में खास तैयारी और रणनीति

दक्षिणी कमान की रेगिस्तानी ‘भैरव’ बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर के अनुसार, रेगिस्तान में युद्ध के अपने अलग खतरे और चुनौतियां होती हैं. यहां अत्यधिक तापमान, सीमित संसाधन और खुले इलाके में दुश्मन से मुकाबला करना पड़ता है. इसी वजह से ‘भैरव’ को एक टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और आत्मनिर्भर यूनिट के रूप में विकसित किया गया है, जो भविष्य में मल्टी-डोमेन ऑपरेशन करने में सक्षम होगी.

स्थानीय समझ और ‘सपूतों की धरती’ की अवधारणा

रेगिस्तानी ‘भैरव’ बटालियन को ‘सपूतों की धरती’ की सोच पर विकसित किया गया है. इसमें शामिल अधिकांश सैनिक राजस्थान के ही हैं, जिन्हें इलाके, मौसम, भाषा और स्थानीय परिस्थितियों की गहरी समझ है. यह बटालियन राजपूताने की वीरता और शौर्य की परंपरा से प्रेरित है, जो इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है.

कठिन प्रशिक्षण और ‘अखंड प्रहार’ अभ्यास

स्थापना के बाद पिछले पांच महीनों में ‘भैरव’ बटालियन ने बेहद कठोर प्रशिक्षण से गुजरते हुए अपनी युद्ध क्षमता को निखारा है. आधुनिक तकनीक और ड्रोन आधारित ऑपरेशन के साथ-साथ जवानों ने ‘अखंड प्रहार’ नामक अभ्यास में अपनी तैयारियों का सफल प्रदर्शन किया. इस अभ्यास को दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने भी देखा और जवानों की क्षमता की सराहना की.

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