'हिंदुस्तान और हिंदुओं का सफाया होगा...' लश्कर सरगना का पहलगाम हमले के पहले वाला Video वायरल, देखें

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले से कुछ दिन पहले का लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक अहम आतंकी नेता का एक वीडियो सामने आया है, जिसने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है.

Video of LeT chief before Pahalgam attack goes viral
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नई दिल्ली/इस्लामाबाद: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले से कुछ दिन पहले का लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक अहम आतंकी नेता का एक वीडियो सामने आया है, जिसने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है. इस वीडियो में लश्कर-ए-तैयबा के सैन्य कमांडर सैफुल्लाह कसूरी को भारत और हिंदू समुदाय के खिलाफ कट्टर और उकसाऊ बयान देते हुए देखा गया है.

इस वीडियो ने न सिर्फ आतंकी हमले की पूर्व नियोजित साजिश को उजागर किया है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय आतंकी संगठन अब भी भारत के खिलाफ साजिशें रचने में लगे हुए हैं.

पहलगाम हमला, एक सोची-समझी साजिश

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में एक भयावह आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी. हमले के तरीके से यह स्पष्ट था कि यह कोई आकस्मिक या आतुरतावश किया गया हमला नहीं था, बल्कि पूरी योजना के साथ एक निर्दिष्ट उद्देश्य को लेकर किया गया नरसंहार था.

हमले के चश्मदीदों और जांच में यह सामने आया कि आतंकवादियों ने लोगों की पहचान, विशेषकर धर्म, पूछकर निशाना बनाया, और फिर नजदीक से गोली मारी. इस हमले की जिम्मेदारी बाद में लश्कर-ए-तैयबा के छद्म संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF)’ ने ली.

सैफुल्लाह कसूरी का वीडियो वायरल

इस हमले से ठीक पहले का एक वीडियो अब सामने आया है, जिसमें लश्कर का सैन्य प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी कट्टर इस्लामी विचारधारा का प्रचार करते हुए भारत में इस्लाम का राज लाने की धमकी देता है. वीडियो में वह कहता है, "हमारे काफिले न रुकेंगे, न थमेंगे, न झुकेंगे... और तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक पूरे हिंदुस्तान पर 'ला इलाहा इलल्लाह' (इस्लामी शासन) का झंडा न लहरा दें."

यह वीडियो, जो कथित रूप से लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके स्थित हेडक्वार्टर से रिकॉर्ड किया गया है, भारतीय एजेंसियों के लिए इस बात का पुख्ता प्रमाण बन गया है कि हमले की योजना पाकिस्तान की धरती पर बनाई गई थी.

धार्मिक घृणा फैलाने की कोशिश

कसूरी के बयान में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि उसका उद्देश्य धार्मिक आधार पर विभाजन और हिंसा फैलाना है. उसने अपने वीडियो में कहा, "हमने हर युद्धभूमि में दुश्मनों को पराजित किया है. इन बुतपरस्त हिंदुओं के सामने हम क्यों झुकें? इंशाअल्लाह, हिंदुस्तान में इनका सफाया होगा और इस्लाम का परचम पूर्व से पश्चिम तक फैलेगा."

ऐसे भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले वक्तव्य यह दर्शाते हैं कि ये आतंकी संगठन न केवल राजनीतिक या क्षेत्रीय उद्देश्यों के लिए लड़ रहे हैं, बल्कि धर्म के नाम पर सुनियोजित हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं.

पाकिस्तान की भूमिका पर फिर उठे सवाल

कसूरी ने अपने वीडियो में पाकिस्तान की ज़मीन का खुलकर जिक्र करते हुए उसका 'धन्यवाद' किया. उसने पाकिस्तान को "अल्लाह की दी हुई पनाहगाह" बताया और स्पष्ट किया कि उसे आतंकवाद फैलाने के लिए यह ज़मीन "वरदान" की तरह प्राप्त है.

हालांकि, पाकिस्तान सरकार और सेना हमेशा यह दावा करती रही हैं कि उनके देश में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है. लेकिन बार-बार ऐसे वीडियो और घटनाएं यह साबित करते हैं कि आतंकी संगठन पाकिस्तान में न केवल सक्रिय हैं, बल्कि उन्हें संरक्षण भी प्राप्त है.

भारत ने इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार आवाज उठाई है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने लश्कर के मुरीदके स्थित ठिकानों को निशाना भी बनाया था, लेकिन पाकिस्तान ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि वह स्थान कोई आतंकी अड्डा नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल (मस्जिद) है.

आतंकी संगठन और उनका बदलता चेहरा

लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों ने अब खुद को नए नामों और चेहरों में ढाल लिया है. TRF (द रेजिस्टेंस फ्रंट) और PAFF (पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट) जैसे नामों का उपयोग कर ये संगठन खुद को "स्थानीय विद्रोही" दिखाने की कोशिश करते हैं, लेकिन असल में इनके तार सीधे पाकिस्तान में बैठे आतंकियों से जुड़े होते हैं.

कसूरी जैसे नेताओं की गतिविधियां, भाषण और वीडियो यह दिखाते हैं कि भले ही नाम बदल जाएं, मकसद वही है- भारत के खिलाफ हिंसा, धार्मिक ध्रुवीकरण और अस्थिरता फैलाना.

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