इस गांव में न जन्म की इजाजत, न ही मौत की अनुमति; जानिए दुनिया की इस अनोखी जगह का सच

Svalbard Archipelago Viral Story: दुनिया में कुल 195 देश हैं और हर देश की अपनी अलग पहचान है. लेकिन धरती पर एक ऐसी जगह भी मौजूद है, जहां किसी बच्चे को जन्म लेने की इजाजत नहीं है और न ही किसी व्यक्ति को मरने की अनुमति.

Viral Neither birth nor death is allowed this village about the unique place Svalbard Archipelago
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Svalbard Archipelago Viral Story: दुनिया में कुल 195 देश हैं और हर देश की अपनी अलग पहचान है. लेकिन धरती पर एक ऐसी जगह भी मौजूद है, जहां किसी बच्चे को जन्म लेने की इजाजत नहीं है और न ही किसी व्यक्ति को मरने की अनुमति. यह बात सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन यह पूरी तरह सच है. यह अनोखी जगह नॉर्वे के अंतर्गत आने वाले स्वालबार्ड (Svalbard) द्वीपसमूह में स्थित है, जिसे दुनिया के सबसे उत्तरी बसे हुए इलाकों में गिना जाता है.

हाल ही में 7 जनवरी को ट्रैवल इन्फ्लुएंसर राधिका नोमलर्स ने इंस्टाग्राम पर स्वालबार्ड की यात्रा से जुड़ा एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने इस जगह से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य बताए. वीडियो में उन्होंने सबसे पहले इसी नियम का जिक्र किया कि यहां जन्म और मृत्यु दोनों ही प्रतिबंधित हैं.

क्यों गैरकानूनी है स्वालबार्ड में जन्म और मृत्यु?

स्वालबार्ड, नॉर्थ पोल से करीब 1,300 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां का मौसम बेहद कठोर है. राधिका के मुताबिक, इस इलाके में कोई आधुनिक अस्पताल मौजूद नहीं है, और यही वजह है कि यहां गर्भवती महिलाओं को बच्चे के जन्म से कई हफ्ते पहले नॉर्वे के मेनलैंड भेज दिया जाता है.

उन्होंने बताया कि स्वालबार्ड की जमीन पर्माफ्रॉस्ट से ढकी हुई है, यानी यहां की मिट्टी साल भर जमी रहती है. इस कारण शवों का प्राकृतिक रूप से विघटन नहीं हो पाता. बीते वर्षों में इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आई थीं. इसी के चलते यहां दफनाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई और किसी की मृत्यु होने पर शव को द्वीप से बाहर ले जाना अनिवार्य कर दिया गया.

बुजुर्गों और बीमार लोगों को छोड़ना पड़ता है द्वीप

स्वालबार्ड में न तो कोई रिटायरमेंट होम है और न ही लंबी अवधि की मेडिकल देखभाल की सुविधाएं. जैसे ही कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा बीमार हो जाता है या उम्र के उस पड़ाव पर पहुंचता है, जहां वह खुद का ख्याल नहीं रख सकता, उसे द्वीप छोड़ना पड़ता है.

राधिका के अनुसार, यह जगह मुख्य रूप से युवाओं, कामकाजी लोगों और शारीरिक रूप से मजबूत व्यक्तियों के लिए है. स्वालबार्ड को कभी भी रिटायरमेंट डेस्टिनेशन के तौर पर नहीं बनाया गया.

जहां महीनों तक नहीं उगता सूरज

स्वालबार्ड को ‘लैंड ऑफ द मिडनाइट सन’ भी कहा जाता है. यहां सर्दियों के दौरान कई महीनों तक 24 घंटे अंधेरा रहता है, जबकि गर्मियों में सूरज महीनों तक डूबता ही नहीं. यह प्राकृतिक घटना दुनिया के बहुत कम हिस्सों में देखने को मिलती है.

यही नहीं, स्वालबार्ड में दुनिया का मशहूर ग्लोबल सीड वॉल्ट भी स्थित है, जिसे प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध और जलवायु परिवर्तन से मानवता की कृषि विरासत को बचाने के लिए बनाया गया है. इसे अक्सर “मानव सभ्यता की बीमा पॉलिसी” कहा जाता है.

दुनिया का एकमात्र वीजा-फ्री इलाका

स्वालबार्ड को और भी खास बनाती है इसकी वीजा-फ्री व्यवस्था. यह सुविधा 1920 की स्वालबार्ड संधि के कारण संभव है, जिसके तहत इस संधि पर हस्ताक्षर करने वाले देशों के नागरिक यहां बिना वीजा के रह और काम कर सकते हैं.

भारत ने भी फरवरी 1920 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे. राधिका के मुताबिक, यहां आने के लिए कोई औपचारिक इमिग्रेशन प्रक्रिया नहीं है. अगर कोई व्यक्ति अपना खर्च उठा सकता है और काम ढूंढ सकता है, तो वह यहां रह सकता है.

इंसानों से ज्यादा पोलर बीयर

स्वालबार्ड में इस समय करीब 2,500 से 3,000 लोग रहते हैं, जबकि पोलर बीयर की संख्या इंसानों से कहीं ज्यादा है. यही वजह है कि यहां बिना राइफल के बाहर निकलना कानूनन अपराध माना जाता है. इसके अलावा, आर्कटिक पक्षियों की सुरक्षा के लिए यहां बिल्लियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि स्थानीय जैव विविधता को नुकसान न पहुंचे.

न सेना, न अपराध, फिर भी हथियार जरूरी

स्वालबार्ड में कोई सेना नहीं है, और इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित जगहों में से एक माना जाता है. यहां अपराध के मामले बेहद कम हैं. लोग अपने घरों के दरवाजे तक बंद नहीं करते और आपसी भरोसा बहुत मजबूत है.

हालांकि, पोलर बीयर के खतरे को देखते हुए हथियार रखना जरूरी है. राधिका ने बताया कि यह जगह भले ही अजीब नियमों वाली लगे, लेकिन शायद यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है.

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