छन्नी नहीं मिली तो चाय छानने के लिए युवक ने लगाया देसी जुगाड़, वीडियो देखते ही मुंह से निकलेगा 'Technologia'

वीडियो में दिख रहा है कि मजदूर ने झाड़ियों की सूखी टहनियों और डंठलों की मदद से खुद की एक देसी छन्नी तैयार की है. चाय को वह अपने लंचबॉक्स के एक हिस्से में इस जुगाड़ू छन्नी से छानता है और कमाल ये है कि चाय की पत्तियां अंदर ही रह जाती हैं, यानी छन्नी पूरी तरह से कामयाब रही.

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Image Source: Social Media

भारत में अगर किसी चीज़ की कभी कमी नहीं रही है, तो वो जुगाड़ की कला है. यहां के लोग छोटी-छोटी परेशानियों का ऐसा देसी हल निकालते हैं कि बड़ी से बड़ी तकनीक भी उनके सामने फीकी लगने लगती है. एक ऐसा ही अनोखा वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक मजदूर जंगल के बीच चाय बना रहा है. लेकिन चाय छानने के लिए उसके पास न तो छन्नी है, न ही कोई कपड़ा. फिर भी उसने जो तरीका अपनाया, उसने इंटरनेट पर लोगों को हैरान कर दिया है.

जंगल में बनाया देसी ‘छन्नी सेटअप’

वीडियो में दिख रहा है कि मजदूर ने झाड़ियों की सूखी टहनियों और डंठलों की मदद से खुद की एक देसी छन्नी तैयार की है. चाय को वह अपने लंचबॉक्स के एक हिस्से में इस जुगाड़ू छन्नी से छानता है और कमाल ये है कि चाय की पत्तियां अंदर ही रह जाती हैं, यानी छन्नी पूरी तरह से कामयाब रही.

चाय लवर्स के लिए संकटमोचक आइडिया

सोचिए, अगर आप किसी आउटडोर ट्रिप या जंगल जैसी जगह पर हैं, जहां सुविधाएं शून्य हैं, और आप चाय तो बना लेते हैं लेकिन छानने का कोई साधन नहीं है ऐसे में ये वीडियो आपके लिए किसी 'जुगाड़ गाइड' से कम नहीं. ये तरीका दिखाता है कि रचनात्मक सोच और थोड़़ी सी समझदारी से किसी भी परेशानी को हल किया जा सकता है.

सोशल मीडिया पर छाया देसी टैलेंट

वीडियो को इंस्टाग्राम पर @hiralal_dagla नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है और इसे अब तक 39 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है. लोगों ने इसे न सिर्फ एक अनोखा जुगाड़ माना, बल्कि इसे 'देसी टेक्नोलॉजी' की उपाधि भी दे डाली है.

यूजर्स के शानदार रिएक्शन

वीडियो पर लोगों के मजेदार रिएक्शन भी देखने को मिल रहे हैं. एक यूज़र ने लिखा: “ये भारत है, जुगाड़ यहां कण-कण में बसता है.” दूसरे ने तारीफ करते हुए कहा, “इसको बोलते हैं असली चाय लवर!” वहीं, एक यूज़र का कहना था: “डॉली चायवाला और इस भाई का मुकाबला होना चाहिए.” किसी ने इसे राजस्थानी दिमाग का चमत्कार बताया तो किसी ने इसे मजबूरी में किया गया कमाल माना.