Saudi Arab Strike Yemen: अरब दुनिया में लंबे समय तक रणनीतिक साझेदार माने जाने वाले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रिश्तों में अब खुली दरार दिखाई देने लगी है. यमन संकट ने दोनों देशों को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां दोस्ती की जगह टकराव की भाषा सुनाई दे रही है. सऊदी अरब का यह कहना कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा एक “रेड लाइन” है, इस बात का संकेत है कि वह अब किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है.
तनाव तब और गहरा गया जब सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हवाई हमला किया. सऊदी का दावा है कि यह हमला उस वक्त किया गया जब UAE के जहाज वहां हथियार और बख्तरबंद वाहन उतार रहे थे. सऊदी अरब ने इस दावे के समर्थन में वीडियो फुटेज भी जारी किए हैं, जिनमें कथित तौर पर हथियारों की अनलोडिंग दिखाई गई है.
BREAKING: Saudi Arabia launches strikes against Houthi forces in Yemen.
— Eyal Yakoby (@EYakoby) December 30, 2025
The Arab world is directly opposed to the Muslim Brotherhood, while Europe and Tucker Carlson shills for them. pic.twitter.com/Nbxuek6EeA
सऊदी नैरेटिव के मुताबिक ये जहाज UAE के फुजैराह बंदरगाह से रवाना हुए थे और जानबूझकर उनके ट्रैकिंग सिस्टम बंद रखे गए थे. इन जहाजों के जरिए भारी मात्रा में हथियार यमन के सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) तक पहुंचाए जा रहे थे, जिसे UAE का समर्थन हासिल है.
सऊदी की कड़ी चेतावनी और ‘रेड लाइन’
सऊदी अरब ने UAE जैसे करीबी देश पर यह गंभीर आरोप लगाया है कि वह सऊदी की दक्षिणी सीमा के पास सैन्य दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. सऊदी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह सीमित कार्रवाई क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बन रहे हालात को रोकने के लिए की गई है और इसमें संपत्ति को न्यूनतम नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई.
रॉयटर्स के अनुसार, सऊदी अरब ने यमन में मौजूद UAE के सैनिकों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने को कहा है. हालांकि हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन मुकल्ला पोर्ट को भारी क्षति पहुंची है.
STC की प्रतिक्रिया और यमन में राजनीतिक हलचल
सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल ने मुकल्ला पर हुए हमले को सीधी आक्रामकता बताया है और UAE से सैन्य सहायता की मांग की है. इसके जवाब में यमन की सऊदी समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल ने UAE के साथ संयुक्त रक्षा समझौते को रद्द कर दिया है और सीमाओं पर 72 घंटे के लिए प्रतिबंध लागू कर दिए हैं. प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशाद अल-अलीमी के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि यमन के भीतर सत्ता संतुलन और अधिक अस्थिर हो गया है.
यमन में तीन ताकतें और बंटा हुआ देश
गृह युद्ध से जूझ रहे यमन में फिलहाल तीन प्रमुख गुट सक्रिय हैं. हूती विद्रोही देश के बड़े हिस्से पर कब्जा जमाए हुए हैं और उन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है. दक्षिणी इलाकों में सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल प्रभावी है, जिसे UAE का समर्थन माना जाता है.
वहीं अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार की ओर से प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है. तीनों गुट यमन के अलग-अलग हिस्सों पर नियंत्रण बनाए हुए हैं, जिससे देश व्यावहारिक रूप से तीन हिस्सों में बंटा हुआ नजर आता है.
यमन संकट और सऊदी-UAE संबंधों की पृष्ठभूमि
अल जज़ीरा ने हमद बिन खलीफा यूनिवर्सिटी में पब्लिक पॉलिसी के प्रोफेसर सुल्तान बराकत के हवाले से लिखा है कि UAE वर्ष 2014 में सना पर हूती विद्रोहियों के कब्जे को पलटने के लिए सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन में शामिल हुआ था.
लेकिन समय के साथ दोनों देशों की रणनीतियों में अंतर आता चला गया. बराकत के अनुसार, UAE ने सऊदी अरब से बिना परामर्श किए यमन में स्वतंत्र फैसले लेने शुरू किए, जिससे दक्षिणी अलगाववादी आंदोलन को मजबूती मिली.
साझा दुश्मन, अलग-अलग लक्ष्य
हालांकि सऊदी अरब और UAE 2015 से हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक साथ लड़ते रहे हैं, लेकिन उनके दीर्घकालिक लक्ष्य अलग रहे हैं. सऊदी अरब यमन की एकता बनाए रखना चाहता है, जबकि UAE समर्थित STC दक्षिण यमन को अलग राष्ट्र के रूप में देखता है. यमन का युद्ध अब केवल एक गृह संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह खाड़ी क्षेत्र की शक्ति राजनीति का केंद्र बन चुका है, जहां सहयोग की जगह प्रतिस्पर्धा ने ले ली है.
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