अमेरिका ने बंद किया रास्‍ता तो इन देशों ने बिछाए रेड कार्पेट, क्यों भारतीय टैलेंट की मुरीद है दुनिया?

वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिभा की मांग को देखते हुए, जर्मनी, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारतीयों का स्वागत करने के लिए अपने वीजा और माइग्रेशन नियमों को आसान बना दिया है.

Western countries open their doors to Indian talent
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

नई दिल्ली: जब अमेरिका ने भारतीय टेक्नोलॉजी पेशेवरों के लिए वीजा नियम सख्त किए और फीस बढ़ाकर मुश्किलें खड़ी कर दीं, तो यह सोचा गया कि इससे भारतीय टैलेंट का पलायन रुक जाएगा. लेकिन हुआ ठीक इसका उल्टा. वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिभा की मांग को देखते हुए, जर्मनी, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारतीयों का स्वागत करने के लिए अपने वीजा और माइग्रेशन नियमों को आसान बना दिया है.

जहां अमेरिका में वीजा प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक कठिन और महंगी हो गई है, वहीं अन्य देश रेड कार्पेट बिछाकर भारतीय प्रोफेशनल्स को आकर्षित करने में जुट गए हैं. इन देशों को न सिर्फ भारत की आईटी और इंजीनियरिंग प्रतिभा चाहिए, बल्कि वे जानते हैं कि भारतीयों का योगदान उनकी अर्थव्यवस्था में तेजी ला सकता है.

जर्मनी का भारतीयों को खुला आमंत्रण

भारत और भूटान में जर्मनी के राजदूत फिलिप अकरमन ने हाल ही में एक वीडियो संदेश के ज़रिए भारतीय युवाओं और प्रोफेशनल्स को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि जर्मनी में टैलेंटेड भारतीयों के लिए दरवाजे हमेशा खुले हैं. उन्होंने बर्लिन की माइग्रेशन नीति की तुलना जर्मन कारों की गुणवत्ता से करते हुए कहा, "जर्मनी की माइग्रेशन पॉलिसी स्थिर, भरोसेमंद और आधुनिक है. यहां नियम ओवरनाइट नहीं बदलते. जो टैलेंटेड हैं, उनका हम स्वागत करते हैं."

जर्मनी की यह पहल खासतौर पर उन भारतीयों के लिए फायदेमंद है जो इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, रिसर्च और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में काम करना चाहते हैं. देश की कम होती जनसंख्या और कुशल श्रमिकों की कमी को भरने के लिए जर्मनी विदेशी टैलेंट को अवसर देना चाहता है.

कनाडा का भारत के लिए नया दृष्टिकोण

हाल के महीनों में भारत-कनाडा संबंधों में तनाव देखा गया था, लेकिन अब कनाडा ने भी अपने रुख में बदलाव के संकेत दिए हैं. 'Build Canada' पॉलिसी के तहत, कनाडा उन H-1B वीजा धारकों को आकर्षित करना चाहता है, जो अमेरिका की नई वीजा पॉलिसी से परेशान हैं.

कनाडा की नई योजना के मुख्य बिंदु:

  • कनाडा सरकार का मानना है कि अमेरिका के कड़े रुख के कारण करीब 1.20 लाख H-1B वीजा धारक अब नए विकल्प तलाश रहे हैं.
  • अगर यह टैलेंट कनाडा आता है, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था में करीब 30 अरब डॉलर (2.65 लाख करोड़ रुपये) का इजाफा हो सकता है.
  • कनाडा की GDP में 1% की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है.
  • ‘Build Canada’ फोरम ने सरकार को सुझाव दिया है कि $1.4 लाख डॉलर से अधिक वेतन और कम से कम 3 साल के कॉन्ट्रैक्ट वाले पेशेवरों को विशेष वीजा सुविधा दी जाए.

यह नीति स्पष्ट करती है कि कनाडा भारतीय पेशेवरों को सिर्फ संख्या के रूप में नहीं देखता, बल्कि उन्हें कुशल मानव पूंजी के रूप में समझता है, जो तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं.

ब्रिटेन ने भी बढ़ाया भारत की तरफ हाथ

ब्रिटेन, जो पहले ब्रेग्जिट के बाद प्रवासन मुद्दों को लेकर सख्त हो गया था, अब भारतीय आईटी पेशेवरों और छात्रों के लिए वीजा प्रक्रिया को आसान बना रहा है. नई नीतियों के तहत:

  • ग्रेजुएशन के बाद दो साल तक नौकरी ढूंढने का मौका मिलेगा.
  • भारतीयों के लिए यूके हाई स्किल्ड वर्क वीजा अब पहले से अधिक सहज हो गया है.
  • टेक और हेल्थ सेक्टर में भारत से स्किल्ड वर्कर्स की भर्ती पर ज़ोर दिया जा रहा है.

ब्रिटेन को समझ में आ गया है कि उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और इनोवेशन की दिशा में भारत की युवा पीढ़ी एक महत्वपूर्ण साझेदार हो सकती है.

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