बीजिंग: चीन ने हाल ही में आयोजित अपने मिलिट्री डे परेड के दौरान एक बेहद ख़तरनाक और तकनीकी रूप से उन्नत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का प्रदर्शन किया, जिसे DF-5C के नाम से जाना जाता है. इस मिसाइल ने सैन्य विशेषज्ञों और वैश्विक रक्षा विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है क्योंकि यह मिसाइल धरती पर किसी भी कोने तक मार करने में सक्षम बताई जा रही है.
DF-5C को चीन की मिसाइल तकनीक में एक गेमचेंजर माना जा रहा है, जो न केवल अत्यधिक दूरी तक हमला कर सकती है, बल्कि एक साथ 10 न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने की क्षमता भी रखती है. इसकी तुलना अमेरिका और रूस की आधुनिक मिसाइल प्रणालियों से की जा रही है और इसे चीन की रणनीतिक शक्ति का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
क्या है DF-5C मिसाइल?
DF-5C एक लिक्विड-फ्यूल आधारित इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसका विकास चीन की स्ट्रैटेजिक फोर्सेस द्वारा किया गया है. यह मिसाइल DF-5 सीरीज़ का उन्नत संस्करण है, जिसमें कई तकनीकी सुधार किए गए हैं, जिससे इसे अब "ऑल टाइम रेडी-टू-लॉन्च" सिस्टम में तब्दील किया गया है.
मिलिट्री डे परेड के दौरान चीन के सैन्य अधिकारियों ने इसे अपनी "ग्लोबल स्ट्राइक कैपेबिलिटी" का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह मिसाइल कहीं से भी लॉन्च की जा सकती है और विश्व के किसी भी क्षेत्र को निशाना बना सकती है.
DF-5C क्यों है ख़ास?
1. लंबी दूरी की मारक क्षमता
DF-5C की अधिकतम रेंज 20,000 किलोमीटर से अधिक मानी जा रही है.
यानी यह मिसाइल अंटार्कटिका को छोड़कर पृथ्वी के लगभग हर क्षेत्र को टारगेट करने में सक्षम है.
2. मल्टीपल वॉरहेड कैपेसिटी (MIRV)
3. नया नोजल और थर्मल शील्ड टेक्नोलॉजी
DF-5C के रॉकेट नोजल को सिलिकॉन या रबर कंपोजिट मैटेरियल से तैयार किया गया है, जो इसे अत्यधिक गर्मी और लंबे समय तक स्टोरेज के लिए उपयुक्त बनाता है.
यह इस बात का संकेत है कि मिसाइल को फ्यूल भरने के बाद लंबे समय तक रखा जा सकता है, जो पहले लिक्विड फ्यूल सिस्टम की सबसे बड़ी कमजोरी थी.
लिक्विड ईंधन और उससे जुड़ी चिंताएं
परंपरागत रूप से, लिक्विड फ्यूल वाली मिसाइलों को फ्यूलिंग में समय लगता है और फ्यूल एक बार भरने के बाद अधिक देर तक स्टोर नहीं किया जा सकता. इसके अलावा, उपयोग में आने वाले रसायन जैसे कि हाइड्राज़ीन और नाइट्रोजन टेट्रॉक्साइड बेहद ज़हरीले और अस्थिर होते हैं.
लेकिन DF-5C के नए डिजाइन से संकेत मिलता है कि चीन ने इन सभी खतरों को तकनीकी रूप से नियंत्रित करने में सफलता पा ली है. नोजल पर लगी झिल्ली जैसी कोटिंग इसे वातावरण और तापमान के असर से सुरक्षित रखती है. यही कारण है कि इसे अब लॉन्ग-स्टैंडबाय वर्जन माना जा रहा है.
वैश्विक शक्ति संतुलन पर असर
विश्लेषकों का मानना है कि DF-5C के आने से एशिया और दुनिया के न्यूक्लियर स्ट्रैटेजिक बैलेंस में परिवर्तन आ सकता है. अब चीन के पास ऐसी मिसाइल है जो:
इससे अमेरिका और रूस जैसे देशों को अपने रक्षा कवच को फिर से मूल्यांकन करने की ज़रूरत पड़ेगी.
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