नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर से ‘येलो बुक’ यानी वीवीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल के नियमों का उल्लंघन करने को लेकर चर्चा में हैं. इस बार मलेशिया की यात्रा के दौरान उन्होंने सुरक्षा नियमों की अनदेखी की, जिससे सुरक्षा एजेंसी सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) ने चिंता जताई है. सीआरपीएफ ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को एक पत्र भेजकर इस मामले की जानकारी दी है और भविष्य में नियमों का सख्ती से पालन करने की मांग की है.
येलो बुक क्या है?
भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य वीवीआईपी लोगों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने कई सख्त दिशा-निर्देश बनाए हैं, जिन्हें ‘येलो बुक’ के नाम से जाना जाता है. यह सुरक्षा नियम वीवीआईपी के जीवन और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए बनाये गए हैं. सभी वीवीआईपी नेताओं को इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है ताकि सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी और व्यवस्थित हो सके.
राहुल गांधी के नियम उल्लंघन का इतिहास
राहुल गांधी हमेशा से ‘येलो बुक’ के नियमों को लेकर विवादों में रहे हैं. वे कई बार बिना पूर्व सूचना के विदेश यात्रा करते रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगता है. पिछले नौ महीनों में उन्होंने छह बार सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया है. 2020 से लेकर अब तक राहुल गांधी ने कुल 113 बार सुरक्षा प्रोटोकॉल के नियमों को तोड़ा है, जिसमें भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारी भीड़ में जाने का मामला भी शामिल है.
सीआरपीएफ की चिंता और सुरक्षा व्यवस्था पर असर
सीआरपीएफ के वीवीआईपी सुरक्षा प्रमुख सुनील जून ने मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे पत्र में कहा है कि राहुल गांधी की इस लापरवाही से उनकी और सुरक्षा स्टाफ की चिंता बढ़ गई है. येलो बुक के मुताबिक, विदेश यात्रा से कम से कम 15 दिन पहले सुरक्षा एजेंसी को सूचित करना जरूरी होता है ताकि सुरक्षा का उचित इंतजाम किया जा सके. राहुल ने इटली, वियतनाम, दुबई, कतर, लंदन और मलेशिया की यात्राओं के दौरान यह प्रक्रिया पूरी नहीं की, जिससे सुरक्षा में खामियां उत्पन्न हुईं.
नियम क्यों तोड़े जाते हैं?
राहुल गांधी की तरह कई नेता सुरक्षा प्रोटोकॉल के नियमों का उल्लंघन करते रहे हैं. ऐसा अक्सर व्यक्तिगत सुरक्षा और निजता की वजह से किया जाता है. राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी पर भी इसी तरह की लापरवाही के आरोप लगे थे. हालांकि यह नियम सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक हैं, फिर भी कई वीवीआईपी नेताओं की तरफ से इन्हें नजरअंदाज किया जाता है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो जाती है.
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