कभी टीम बस पर आतंकी हमला, तो कभी खिलाड़ी को मारी गोली... जानें कब-कब लहूलुहान हुआ क्रिकेट का मैदान?

क्रिकेट को हमेशा एक जेंटलमेन का खेल कहा गया है. यह खेल न सिर्फ खिलाड़ियों को जोड़ता है, बल्कि देशों के बीच भी एक पुल का काम करता है.

When did the cricket ground become bloody
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नई दिल्ली: क्रिकेट को हमेशा एक जेंटलमेन का खेल कहा गया है. यह खेल न सिर्फ खिलाड़ियों को जोड़ता है, बल्कि देशों के बीच भी एक पुल का काम करता है. लेकिन जब इस खेल पर राजनीति, आतंकवाद और हिंसा का साया पड़ता है, तब वही 'खेल' खून से लथपथ हो जाता है. हाल ही में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक में अफगानिस्तान के तीन स्थानीय क्रिकेटरों की मौत की खबर ने खेल प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है. यह कोई पहली बार नहीं है, जब क्रिकेट ने हिंसा की कीमत चुकाई हो. इससे पहले भी कई बार क्रिकेट को आतंकी हमलों और बम धमाकों ने लहूलुहान किया है.

आइए नजर डालते हैं उन काली घटनाओं पर, जब क्रिकेट के साथ खून की कहानी जुड़ गई.

2024: एयर स्ट्राइक में अफगानी क्रिकेटर्स की मौत

पाकिस्तानी सेना की एयर स्ट्राइक में अफगानिस्तान के तीन लोकल क्रिकेटरों की मौत से खेल जगत में मातम पसरा हुआ है. पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में की गई एयर स्ट्राइक में तीन अफगानी क्रिकेटर मारे गए. ये खिलाड़ी स्थानीय स्तर पर क्रिकेट खेलते थे और राष्ट्रीय स्तर पर चयन की उम्मीदें लगाए हुए थे. इस घटना के बाद अफगानिस्तान के क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और पाकिस्तान में होने वाली त्रिकोणीय सीरीज (पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका) से खुद को अलग कर लिया. सीरीज 17 नवंबर से पाकिस्तान में होनी थी, लेकिन अब उस पर भी संकट मंडरा रहा है.

2009: श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर आतंकी हमला

3 मार्च 2009 का दिन क्रिकेट इतिहास का सबसे खौफनाक दिन बन गया. श्रीलंका की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान दौरे पर थी और लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच खेलने जा रही थी. जैसे ही टीम बस स्टेडियम की ओर बढ़ रही थी, सशस्त्र आतंकवादियों ने टीम बस पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी.

  • इस हमले में 6 श्रीलंकाई खिलाड़ी और स्टाफ सदस्य घायल हुए.
  • हमले में 6 पाकिस्तानी पुलिसकर्मी और 2 आम नागरिकों की मौत हो गई.

इस घटना के बाद पाकिस्तान में लगभग 10 साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बंद रहा. अधिकांश टीमें वहां जाने से कतराने लगीं.

2021: मैच से पहले न्यूजीलैंड ने छोड़ा पाकिस्तान

सितंबर 2021 में न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम पाकिस्तान के दौरे पर थी. रावलपिंडी में पहला वनडे मैच शुरू होने से ठीक कुछ घंटे पहले न्यूजीलैंड ने अचानक दौरा रद्द कर दिया और पूरी टीम सुरक्षा कारणों से वापस अपने देश लौट गई.

न्यूजीलैंड को सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट दिया था कि टीम पर संभावित आतंकी हमला हो सकता है.

यह घटना पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के लिए बड़ा झटका थी, क्योंकि बोर्ड ने इंटरनेशनल क्रिकेट की वापसी की उम्मीदें लगा रखी थीं.

2002: कराची बम ब्लास्ट और न्यूजीलैंड का दौरा

साल 2002 में न्यूजीलैंड की टीम एक बार फिर पाकिस्तान दौरे पर थी. कराची में टेस्ट मैच से ठीक पहले कीवी टीम के होटल के बाहर एक जबरदस्त बम धमाका हुआ.

  • इस धमाके में 12 लोग मारे गए, हालांकि किसी खिलाड़ी को कोई जानलेवा चोट नहीं आई.
  • न्यूजीलैंड के फिजियोथैरेपिस्ट डेल शैकल को मामूली चोट आई थी.
  • इसके बाद न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने तुरंत पूरी टीम को वापस बुला लिया.

1987 और 1992: श्रीलंका में दो बार बम धमाके

क्रिकेट पर हमला सिर्फ पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं रहा है. 1987 में न्यूजीलैंड की टीम श्रीलंका दौरे पर गई थी. तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला खेलने के बाद टीम कोलंबो में रुकी हुई थी, जहां पास ही भयंकर बम धमाका हुआ.

  • धमाके में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.
  • इस घटना से डरे न्यूजीलैंड के खिलाड़ी और बोर्ड ने तुरंत श्रीलंका छोड़ने का फैसला लिया.

1992 में एक बार फिर न्यूजीलैंड की टीम श्रीलंका दौरे पर गई, लेकिन सुरक्षा चिंताओं के चलते एक बार फिर दौरा अधूरा रह गया.

2008: 26/11 केबाद इंग्लैंड का अधूरा दौरा

साल 2008 में मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले (26/11) ने भारत समेत पूरे विश्व को झकझोर दिया था. उस वक्त इंग्लैंड की क्रिकेट टीम भारत दौरे पर थी और सात मैचों की वनडे सीरीज खेल रही थी.

  • इंग्लैंड पांच मैच खेलने के बाद सीरीज 5-0 से हार चुका था, लेकिन बाकी बचे दो मैचों को खेलने से इनकार कर दिया.
  • इंग्लैंड की टीम ने दौरे को बीच में ही छोड़ने का फैसला लिया और तत्काल अपने देश लौट गई.
  • हालांकि बाद में टीम ने टेस्ट सीरीज के लिए भारत लौटने का फैसला किया, लेकिन तब तक हालात पूरी तरह बदल चुके थे.

क्रिकेट और राजनीति का टकराव कब तक?

इन सभी घटनाओं से एक बात स्पष्ट है कि क्रिकेट, जो शांति और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है, वह भी राजनीतिक और आतंकवादी ताकतों की चपेट में आ जाता है. जहां खिलाड़ी अपनी मेहनत से देश का नाम रोशन करने की कोशिश करते हैं, वहीं कुछ कट्टरपंथी ताकतें इसे निशाना बनाकर अपने नापाक मंसूबे पूरे करना चाहती हैं.

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