Gold Price: सोना सदियों से सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है. जब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ती है, युद्ध या मंदी का डर पैदा होता है, तब आम निवेशक ही नहीं बल्कि सरकारें और सेंट्रल बैंक भी सोने की तरफ रुख करते हैं. लेकिन साल 2025 में एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला.
जहां एक तरफ सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं, वहीं दूसरी ओर दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों ने इसकी खरीदारी में भारी कटौती कर दी. यही वजह है कि अब बाजार में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि जब सरकारें ही पीछे हट रही हैं, तो क्या आने वाले समय में सोने के दाम गिर सकते हैं?
2025 में सेंट्रल बैंकों की खरीद में बड़ी गिरावट
साल 2025 वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कई चुनौतियों से भरा रहा. इसी दौरान सेंट्रल बैंकों के व्यवहार में बड़ा बदलाव देखने को मिला. भारत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2024 में जहां करीब 72.6 टन सोना खरीदा था, वहीं 2025 में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 4.02 टन रह गया. यानी करीब 94 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
यह ट्रेंड सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक,
यानी एक साल में ही सेंट्रल बैंक गोल्ड खरीद करीब 70 फीसदी तक घट गई.
जब सेंट्रल बैंक बोले कुछ, किया कुछ और
दिलचस्प बात यह है कि 2025 की शुरुआत में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के एक सर्वे में लगभग 95 फीसदी सेंट्रल बैंकों ने कहा था कि वे अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाना चाहते हैं.
आमतौर पर सेंट्रल बैंक सोने को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि:
लेकिन हकीकत यह रही कि ऊंची कीमतों और घरेलू आर्थिक दबावों के चलते कई देशों ने खरीदारी रोक दी या घटा दी.
क्यों बदली सेंट्रल बैंकों की रणनीति?
लेकिन 2025 में जब सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं, तो खरीद महंगी हो गई और कई देशों ने ब्रेक लगा दिया.
किन देशों ने खरीदा, किन्होंने कम किया?
2025 में भी कुछ देशों ने सोना खरीदा, लेकिन तस्वीर पहले जैसी नहीं रही.
इसके उलट यूरोप में बढ़ती अनिश्चितता के चलते पोलैंड और कजाकिस्तान जैसे देशों ने खरीद बढ़ाकर जोखिम से बचाव की कोशिश की.
डेढ़ साल में 60 फीसदी से ज्यादा चढ़ा सोना
बीते करीब डेढ़ साल में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है.
इसके पीछे कई वजहें रहीं:
इसके साथ ही निजी निवेशकों और ETF फंड्स की मांग भी तेजी से बढ़ी, जिससे कीमतों को और सहारा मिला.
आगे क्या सोना गिरेगा या चढ़ेगा?
भले ही सेंट्रल बैंकों की खरीद घटी हो, लेकिन बड़े वैश्विक बैंक अब भी सोने को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर डॉलर और ब्याज दरों में कटौती सोने को आगे भी सहारा दे सकती है.
अगर वैश्विक बाजार में सोना $5400 प्रति औंस तक पहुंचता है, तो भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत बड़ा उछाल दिखा सकती है.
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