दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियों में से एक अमेरिका ने दशकों तक पाकिस्तान को विभिन्न प्रकार के हथियार, युद्धक विमान और सैन्य तकनीकें मुहैया कराई हैं. हाल ही के वर्षों में पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में उतार-चढ़ाव भले ही देखने को मिले हों, लेकिन कुछ खास हथियार सिस्टम आज भी पाकिस्तान की सेना में अमेरिकी योगदान की मौजूदगी को दर्शाते हैं.
भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में बढ़े तनाव के बाद से अमेरिका और चीन दोनों ने पाकिस्तान को अपने-अपने स्तर पर सैन्य सहायता बढ़ाई है. अमेरिका ने हाल ही में AIM-120 AMRAAM जैसी उन्नत मिसाइलों के लिए मंजूरी दी है, जो पाकिस्तान की हवाई शक्ति को मजबूती देती है.
1. F-16 लड़ाकू विमान
F-16 फाइटर जेट अमेरिका द्वारा निर्मित एक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जिसे पाकिस्तान ने सबसे पहले 1980 के दशक में प्राप्त किया था. इस विमान ने पाकिस्तान की वायुसेना की क्षमताओं को कई वर्षों तक बढ़ाया और उसे क्षेत्रीय हवाई संतुलन में बनाए रखने में मदद की.
मुख्य विशेषताएं:
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इन विमानों के रखरखाव और अपग्रेड को लेकर अमेरिका और पाकिस्तान के बीच खींचतान रही है. फिर भी, अमेरिका समय-समय पर इन विमानों के लिए स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी सहायता प्रदान करता रहा है.
2. AIM-120 AMRAAM मिसाइल
2025 में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को AIM-120 AMRAAM (Advanced Medium-Range Air-to-Air Missile) की आपूर्ति की मंजूरी दी गई. यह मिसाइल आधुनिक युद्ध में अत्यधिक प्रभावी मानी जाती है.
विशेषताएं:
AMRAAM मिसाइलें पाकिस्तान को हवाई मुकाबले में तकनीकी बढ़त देती हैं, विशेषकर भारत के Su-30MKI और Rafale जैसे विमानों के मुकाबले में.
3. AH-1 Cobra अटैक हेलीकॉप्टर
1980 के दशक में पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा Bell AH-1 Cobra अटैक हेलीकॉप्टर दिए गए थे. यह हेलीकॉप्टर टैंक-विरोधी और घनी आबादी वाले इलाकों में ऑपरेशन के लिए उपयुक्त माना जाता है.
प्रमुख उपयोग:
समय के साथ इन हेलीकॉप्टरों के लिए स्पेयर पार्ट्स की कमी हुई, जिससे उनका उपयोग सीमित हो गया. हालांकि, पाकिस्तान ने इन्हें अपग्रेड करने की कोशिश की और कुछ नए हेलीकॉप्टर जैसे T129 (तुर्की) से उनकी जगह भरने की योजना भी बनाई.
4. अन्य अमेरिकी हथियार और सिस्टम
a. C-130 Hercules ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट:
पाकिस्तान की वायुसेना में C-130 एयरक्राफ्ट भी शामिल हैं, जो अमेरिका से प्राप्त किए गए थे. इनका उपयोग मालवाहन, सैनिकों की तैनाती और मानवीय सहायता अभियानों में होता है.
b. M109 हॉवित्जर आर्टिलरी गन:
अमेरिका से पाकिस्तान को प्राप्त यह तोप प्रणाली जमीनी युद्ध में पाकिस्तान की सेना को गहरी मारक क्षमता प्रदान करती है.
c. नाइट विजन और कम्युनिकेशन गियर:
अमेरिका ने पहले पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए नाइट विजन इक्विपमेंट और संचार प्रणाली जैसे उपकरण भी दिए थे.
पाकिस्तान-अमेरिका रक्षा सहयोग
अमेरिका और पाकिस्तान के रक्षा संबंधों की नींव 1950 के दशक में पड़ी थी, जब शीत युद्ध के दौर में पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ मिलकर सैन्य समझौते किए थे. CENTO और SEATO जैसे गठबंधनों के तहत पाकिस्तान को हथियार और प्रशिक्षण दिया गया.
प्रमुख ऐतिहासिक सहयोग:
अमेरिका की भूमिका, चीन बना प्रमुख आपूर्तिकर्ता
हाल के वर्षों में पाकिस्तान के लिए अमेरिका की भूमिका सीमित हो गई है. अब हथियारों के मामले में चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा सहयोगी बन चुका है. Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार, 2020-2024 की अवधि में पाकिस्तान द्वारा आयात किए गए कुल हथियारों का 81% हिस्सा चीन से आया.
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