टोक्यो: जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने इतिहास रच दिया है. पूर्व आर्थिक सुरक्षा मंत्री साने ताकाइची को पार्टी का नया नेता चुना गया है, जिससे वे देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं. यह चुनाव तब हुआ जब प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने 7 सितंबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. 4 अक्टूबर को पार्टी ने नए अध्यक्ष के लिए मतदान कराया, जिसमें ताकाइची ने जीत दर्ज की.
साने ताकाइची बनाम शिंजिरो कोइजुमी
इस चुनाव में कुल पांच उम्मीदवार थे, लेकिन असली मुकाबला साने ताकाइची और कृषि मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बीच रहा. कोइजुमी, जो पूर्व प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइजुमी के बेटे हैं, ने जबरदस्त प्रतिस्पर्धा की, लेकिन अंततः रनऑफ वोटिंग में ताकाइची ने उन्हें हराया. पहले राउंड में ताकाइची को 183 और कोइजुमी को 164 वोट मिले थे, लेकिन किसी को भी बहुमत नहीं मिला था, जिससे पुनः वोटिंग की गई.
साने ताकाइची कौन हैं?
64 वर्षीय साने ताकाइची जापान की एक कंजर्वेटिव नेता हैं, जो अपने रूढ़िवादी और विवादास्पद विचारों के लिए जानी जाती हैं. वे नियमित रूप से यासुकुनी मंदिर जाती हैं, जो जापान की युद्ध विरासत से जुड़ा विवादित स्थल है. इसके अलावा, वे जापान के शांतिवादी संविधान में बदलाव और ताइवान के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की समर्थक रही हैं. उनके कूटनीतिक दृष्टिकोण में अमेरिका के साथ निवेश समझौतों की समीक्षा भी शामिल है.
विजयी भाषण में उम्मीद और बदलाव का संदेश
रनऑफ से पहले अपने भाषण में ताकाइची ने कहा कि देश में पार्टी को लेकर जो भ्रम है, वह उन्हें प्रेरणा देता है. वे लोगों की रोजमर्रा की चिंताओं को उम्मीद में बदलना चाहती हैं. यह उनकी पहली प्राथमिकता होगी कि आम जनता की जिंदगी बेहतर हो और देश का भविष्य सुरक्षित बने.
आर्थिक विकास और रणनीतिक साझेदारी पर जोर
साने ताकाइची ने 10 वर्षों में जापान की अर्थव्यवस्था को दोगुना करने का वादा किया है. उनका फोकस आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी है. उन्होंने भारत को ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनर’ बताया है और क्वाड और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कही है.
अंतरराष्ट्रीय चुनौतियां और कूटनीतिक दबाव
नए प्रधानमंत्री के रूप में ताकाइची को जल्द ही कूटनीतिक दबावों का सामना करना होगा. खासतौर पर अक्टूबर के अंत में दक्षिण कोरिया में होने वाले APEC सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात उनके लिए बड़ी चुनौती होगी, जहाँ जापान पर रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है.
विवादित विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंध
ताकाइची के रूढ़िवादी और आक्रामक रुख से चीन और दक्षिण कोरिया के साथ जापान के संबंध तनावपूर्ण हो सकते हैं. यासुकुनी मंदिर जाने की उनकी आदत और द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़े इतिहास को लेकर उनका नजरिया पड़ोसी देशों के लिए विवादास्पद माना जाता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रधानमंत्री बनने के बाद ताकाइची को अपने दृष्टिकोण में लचीलापन दिखाना होगा ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे.
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