कौन होगा अगला चीफ जस्टिस? BR गवई ने सरकार को भेजा नए CJI का नाम

नई दिल्ली की न्यायिक गलियारों में इन दिनों एक नई हलचल है. देश की सर्वोच्च अदालत में अब नेतृत्व परिवर्तन की आहट सुनाई दे रही है. मौजूदा मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई के 23 नवंबर को होने वाले सेवानिवृत्त होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की कमान अब जस्टिस सूर्यकांत के हाथों में आने जा रही है.

Who will become new chief justice of supreme court br gawai sends name to government
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नई दिल्ली की न्यायिक गलियारों में इन दिनों एक नई हलचल है. देश की सर्वोच्च अदालत में अब नेतृत्व परिवर्तन की आहट सुनाई दे रही है. मौजूदा मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई के 23 नवंबर को होने वाले सेवानिवृत्त होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की कमान अब जस्टिस सूर्यकांत के हाथों में आने जा रही है. संविधानिक परंपरा और वरिष्ठता के क्रम में उनका नाम पहले से ही लगभग तय माना जा रहा था, जिसे अब औपचारिक रूप से केंद्र को भेज दिया गया है.

23 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के अगले प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी थी. परंपरा के अनुसार, मौजूदा सीजेआई अपने उत्तराधिकारी का नाम सुझाते हैं. इस औपचारिक प्रक्रिया के तहत जस्टिस बी. आर. गवई ने जस्टिस सूर्यकांत का नाम केंद्र को भेज दिया है. अब औपचारिक मंजूरी मिलते ही वे देश के 51वें मुख्य न्यायाधीश बन जाएंगे. जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा. यह लगभग 15 महीनों की वह अवधि होगी जब वे देश की न्यायपालिका की दिशा तय करेंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि उनका कार्यकाल न्यायिक सुधारों और संस्थागत पारदर्शिता के नए अध्याय की शुरुआत करेगा.

हिसार से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

हरियाणा के हिसार जिले में 10 फरवरी 1962 को जन्मे जस्टिस सूर्यकांत का सफर एक प्रेरणादायक कहानी है. कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में वकालत करने लगे. अपनी सटीक कानूनी समझ, संवेदनशील दृष्टिकोण और संतुलित फैसलों के चलते वे जल्दी ही न्यायपालिका में अपनी पहचान बनाने में सफल हुए. 24 मई 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया. इससे पहले वे हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं.

ऐतिहासिक फैसलों के नायक

अपने दो दशकों से अधिक लंबे न्यायिक करियर में जस्टिस सूर्यकांत ने कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले दिए हैं, जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत किया. वे उस पीठ का हिस्सा रहे जिसने औपनिवेशिक काल के राजद्रोह कानून (सिडिशन लॉ) को निलंबित कर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नया अर्थ दिया. उन्होंने चुनाव आयोग को बिहार के मतदाता सूची से बाहर किए गए नामों का विवरण सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था — एक ऐसा फैसला जिसने चुनावी पारदर्शिता को नई परिभाषा दी. बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित करने का आदेश देकर उन्होंने लैंगिक समानता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया.

संवेदनशील और निर्भीक दृष्टिकोण

जस्टिस सूर्यकांत की पहचान सिर्फ उनके फैसलों से नहीं, बल्कि उनके न्यायिक दृष्टिकोण से भी होती है. वे हमेशा से जनहित और पारदर्शिता के समर्थक रहे हैं. वे उन पीठों का हिस्सा भी रहे हैं जिन्होंने पेगासस जासूसी मामला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा में सुरक्षा चूक, और वन रैंक-वन पेंशन (OROP) जैसे संवेदनशील मामलों की सुनवाई की. इन मामलों में उनका रुख हमेशा संतुलन, तथ्य और संविधान की मर्यादा पर आधारित रहा.

न्यायपालिका के नए युग की उम्मीद

सीजेआई गवई के रिटायर होने के साथ भारतीय न्यायपालिका में एक नए नेतृत्व का आगाज होगा. जस्टिस सूर्यकांत से उम्मीद की जा रही है कि वे अदालतों में लंबित मामलों के समाधान, डिजिटल न्याय प्रणाली के विस्तार और न्याय तक आम नागरिक की आसान पहुंच जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे. उनके नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट से समाज को यह संदेश मिलने की उम्मीद है कि न्याय केवल फैसलों से नहीं, बल्कि दृष्टिकोण से भी होता है — और यह दृष्टिकोण भारतीय संविधान की आत्मा से जुड़ा हुआ है.

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