India Missile Test: भारत द्वारा संभावित मिसाइल परीक्षण की चेतावनी के बाद, हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिका और चीन के जासूसी जहाजों की गतिविधियां बढ़ गई हैं. ये दोनों देश अपने-अपने जहाजों के माध्यम से क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं, जो समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक नजरिये से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि अमेरिका और चीन इन जहाजों को शोध या सर्वेक्षण पोत बताते हैं, पर उनकी सच्चाई जासूसी और निगरानी की है.
चीन का मिसाइल और उपग्रह ट्रैकिंग जहाज युआन वांग 5, जो हाल ही में मलेशिया के पोर्ट क्लैंग में चार दिनों तक रुका था, अब हिंद महासागर में गश्त कर रहा है. यह जहाज चीन के रॉकेट, उपग्रह और बैलिस्टिक मिसाइलों की निगरानी में अहम भूमिका निभाता है. 2007 में नौसेना में शामिल यह जहाज क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराता रहा है और इसका मिशन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है.
अमेरिकी जासूसी जहाज भी भारत के पश्चिमी तट पर सक्रिय
वहीं, अमेरिकी जासूसी जहाज ओशन टाइटन भी भारत के पश्चिमी तट के पास सक्रिय है. यह पोत वैज्ञानिक सर्वेक्षण के साथ-साथ समुद्री निगरानी और जासूसी के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. लगभग 68 मीटर लंबा और 13 मीटर चौड़ा यह जहाज लंबे समय से हिंद महासागर में अमेरिका की रणनीतिक उपस्थिति का हिस्सा है.
भारत ने जारी की मिसाइल परीक्षण की चेतावनी
इसी बीच भारत ने बंगाल की खाड़ी में NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) जारी कर एक बड़ा संकेत दिया है. इस नोटिस के तहत 3550 किलोमीटर के दायरे में ‘नो फ्लाई जोन’ घोषित किया गया है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत 15 से 17 अक्टूबर के बीच किसी नई लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर सकता है. यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव डाल सकता है और इसके कारण अमेरिका-चीन की गश्त में भी वृद्धि हुई है.
रणनीतिक महत्व और भविष्य की संभावनाएं
हिंद महासागर दक्षिण एशिया और विश्व के लिए एक रणनीतिक जलमार्ग है. यहां अमेरिका और चीन की जासूसी गतिविधियां दोनों देशों के समुद्री प्रभुत्व और प्रभाव को दर्शाती हैं. भारत के मिसाइल परीक्षण की आशंका के बीच यह क्षेत्र और भी संवेदनशील होता जा रहा है. आगामी दिनों में इस क्षेत्र से जुड़ी और खबरों पर नजर रखी जाएगी, क्योंकि भारत की यह मिसाइल परीक्षा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम मानी जाएगी.