नई दिल्ली: DGCA द्वारा पायलटों के लिए लागू किए गए नए weekly rest और night-duty नियमों के बाद देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो अचानक गंभीर ऑपरेशनल संकट में फंस गई. उड़ानों में देरी, रद्दीकरण और यात्री परेशानियों की झड़ी लग गई.
हैरानी की बात यह है कि वही नियम अन्य एयरलाइंस- एयर इंडिया, स्पाइसजेट, विस्तारा और अकासा पर लगभग बेअसर साबित हुए. ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि जब नियम सभी के लिए समान थे, तो असर केवल इंडिगो पर ही इतना गहरा क्यों हुआ?
इंडिगो पर क्यों पड़ा सबसे ज्यादा प्रभाव?
DGCA के नियम लागू होते ही इंडिगो का परिचालन ढांचा मानो अचानक झटके से हिल गया. जबकि अन्य एयरलाइंस सामान्य रूप से काम करती रहीं. इसका कारण इंडिगो के नेटवर्क का पैमाना और उसकी संचालन नीति है, जो बाकी कंपनियों से बिल्कुल अलग है.
इंडिगो देश के घरेलू एविएशन सेक्टर का करीब 60% हिस्सा संभालती है. इसके संचालन का दायरा इतना बड़ा और सूक्ष्मता से जुड़ा हुआ है कि किसी एक उड़ान में गड़बड़ होने पर इसका असर देश के कई हिस्सों तक पहुंच जाता है. नए आराम नियमों ने इस आपस में जुड़ी व्यवस्था को अचानक असंतुलित कर दिया.
इंडिगो का परिचालन मॉडल बना बड़ी चुनौती
इंडिगो का नेटवर्क ऐसे संरचित है कि इसकी हर उड़ान, हर सेक्टर और हर क्रू मेंबर अत्यधिक इस्तेमाल (High Utilization) के तहत काम करता है. कम समय के ग्राउंड स्टॉप, लगातार कनेक्टिंग फ्लाइट्स और दिन भर के टाइट शेड्यूल इस मॉडल की मुख्य पहचान हैं.
DGCA के नए नियमों में—
जैसे बदलाव शामिल थे. ये बदलाव इंडिगो के हाइपर-टाइट शेड्यूल के साथ मेल नहीं खा सके. इसका असर यह हुआ कि एक उड़ान लेट होते ही उससे जुड़ी कई उड़ानें प्रभावित होने लगीं और चेन-रिएक्शन की तरह पूरा संचालन गड़बड़ा गया.
बैकअप क्रू की कमी ने स्थिति और बिगाड़ी
इतने बड़े नेटवर्क को संभालने के लिए बड़ी संख्या में पायलटों और क्रू सदस्यों की जरूरत होती है, लेकिन इंडिगो ने समय रहते अपने स्टाफ को बढ़ाया नहीं.
लीन-स्टाफिंग मॉडल: कम कर्मचारी, ज़्यादा उड़ानें
पुराने नियमों में भले ही लागत बचत का अच्छा तरीका था, लेकिन नए नियम आते ही यही रणनीति इंडिगो के लिए सबसे बड़ी कमजोरी बन गई.
DGCA के निर्देशों के बाद इंडिगो को अचानक अतिरिक्त पायलटों की जरूरत पड़ी. लेकिन इतने बड़े पैमाने पर उनकी उपलब्धता नहीं थी, जिसके चलते रोस्टर लगातार टूटते गए और सिस्टम संभल नहीं पाया.
एयर इंडिया और स्पाइसजेट ने यह संकट कैसे टाला?
दूसरी एयरलाइंस पर इसका तीखा असर नहीं दिखा, क्योंकि उनका परिचालन ढांचा इंडिगो से बिल्कुल अलग है.
दोनों एयरलाइंस ने DGCA के नियम लागू होने से पहले ही क्रू रोस्टर में आवश्यक बदलाव कर दिए थे.
इन एयरलाइंस का घरेलू नेटवर्क तुलना में छोटा है. कम उड़ानों के कारण उनका शेड्यूल उतना दबावपूर्ण नहीं होता. एक या दो सेक्टर में बदलाव से पूरे दिन की उड़ानों पर असर नहीं पड़ता. इस वजह से नियमों का प्रभाव इनके लिए सिर्फ एक सामान्य प्रशासनिक संशोधन तक सीमित रहा.
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