खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान का एक संवेदनशील और अशांत क्षेत्र, एक बार फिर अचानक सुर्खियों में आ गया है. देर रात, जब ज्यादातर ग्रामीण गहरी नींद में थे, तब पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने वहां एक हवाई हमला किया जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया. यह हमला साधारण नहीं था, यह LS-6 प्रिसिजन-गाइडेड बम से किया गया एक सटीक हवाई हमला था, जिसने पूरे मत्रे दारा गांव को दहशत में डाल दिया.
इस हमले में कई निर्दोष नागरिकों की जान गई, जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं. हालांकि पाकिस्तान की सेना ने इस ऑपरेशन में अपनी भूमिका से इनकार किया है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों और स्थानीय सूत्रों का दावा है कि हमला पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा ही किया गया और LS-6 बमों का उपयोग इसमें स्पष्ट रूप से देखा गया.
अब सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान ने इसी बम का इस्तेमाल क्यों किया, और LS-6 आखिर है क्या?
LS-6 बम क्या है?
LS-6, जिसे "Thunder Stone Glide Bomb" भी कहा जाता है, एक अत्याधुनिक ग्लाइडिंग प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन है. इसका विकास चीन ने किया है और यह मुख्य रूप से पुराने "डम्ब" यानी फ्री-फॉल बमों को स्मार्ट वेपन में बदलने के लिए डिजाइन किया गया है.
इस बम में दो मुख्य हिस्से होते हैं:
कैसे काम करता है LS-6 बम?
यह बम सिर्फ सीधे गिरता नहीं है, बल्कि अपने विशेष पंखों और टेल सर्फेस की मदद से हवा में फिसलता हुआ (glide करता हुआ) अपने लक्ष्य तक पहुंचता है. इसे GPS और चीन के BeiDou सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम की मदद से बेहद सटीकता के साथ निर्देशित किया जाता है.
गाइडेंस सिस्टम के प्रकार:
इस बम को 8,000–10,000 मीटर की ऊंचाई से गिराया जाए, तो यह लगभग 40 से 60 किलोमीटर की दूरी तक अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है. यह बम हवा में तैरते हुए लगभग 1,200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गिरता है, जिससे इसके प्रभाव क्षेत्र में व्यापक तबाही होती है.
बम का डिजाइन: उन्नत तकनीक और स्मार्ट पंख
LS-6 बम के पंख फोल्डेबल और हल्के मटेरियल जैसे कि कंपोजिट फाइबर और एल्यूमिनियम से बने होते हैं. ये पंख बम को हवा में स्थिर रखते हैं और इसकी दिशा को नियंत्रित करते हैं. यही तकनीक इसे सामान्य बमों से अलग बनाती है.
इसके छोटे वेरिएंट इतने कॉम्पैक्ट होते हैं कि उन्हें लड़ाकू विमानों के अंदरूनी वेपन बे में भी ले जाया जा सकता है, जिससे विमान की स्टील्थ क्षमता बनी रहती है.
JF-17 जेट्स और LS-6 का मेल
पाकिस्तान ने यह हमला अपने JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों से किया, जो चीन और पाकिस्तान का संयुक्त रूप से विकसित एक मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट है. इन विमानों को LS-6 जैसे स्मार्ट हथियारों से लैस किया गया है.
JF-17 विमान, हाई एल्टीट्यूड से हमला करने में सक्षम हैं और उन्हें कम जोखिम में लक्ष्य को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है. LS-6 के कारण इन विमानों को दुश्मन के इलाके में घुसने की जरूरत नहीं पड़ती वे दूर से ही हमले को अंजाम दे सकते हैं.
क्यों हुआ मत्रे दारा गांव पर हमला?
पाकिस्तानी सेना का दावा है कि यह हमला तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी संगठनों को निशाना बनाकर किया गया था. लेकिन स्थानीय रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इस हमले में 30 से अधिक आम नागरिक मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं.
गांव के निवासियों ने बताया कि देर रात करीब 2 बजे तेज धमाकों की आवाज सुनाई दी. लोगों को समझने का मौका भी नहीं मिला कि क्या हो रहा है. धमाके इतने शक्तिशाली थे कि कई घर पूरी तरह तबाह हो गए.
सोशल मीडिया पर आई तस्वीरें और वीडियो बेहद दर्दनाक और विचलित करने वाली हैं. इन तस्वीरों से यह स्पष्ट होता है कि हमला एक सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि एक नागरिक त्रासदी थी.
इन बमों को विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे:
इस बम को किसने बनाया?
LS-6 का विकास लुओयांग इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर (EOTDC) द्वारा किया गया, जो चीन की रक्षा कंपनी AVIC के अंतर्गत आता है. इसका पहला परीक्षण वर्ष 2006 में शेनयांग J-8B विमान से किया गया था, और उसी वर्ष इसे Zhuhai Air Show में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित भी किया गया.
आज, यह बम चीन के साथ-साथ उसके सहयोगी देशों की सेनाओं का एक अहम हिस्सा बन चुका है.
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