पाकिस्तान ने दुनिया के सामने फिर से हाथ फैलाया, अब नूर खान एयरबेस पर क्यों उतरा अमेरिकी सैन्य विमान?

पाकिस्तान इन दिनों भीषण बाढ़ से जूझ रहा है, और हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब देश को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार लगानी पड़ रही है.

Why did the US military plane land at Noor Khan Airbase
प्रतिकात्मक तस्वीर/ X

इस्लामाबाद/कराची: पाकिस्तान इन दिनों भीषण बाढ़ से जूझ रहा है, और हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब देश को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार लगानी पड़ रही है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में तबाही का आलम ऐसा है कि अमेरिका को अपने विशेष सैन्य विमान के जरिए राहत सामग्री भेजनी पड़ी, जो हाल ही में रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस पर आपातकालीन स्थिति में उतरा.

आपात राहत सामग्री लेकर पहुंचा सैन्य विमान

पाकिस्तान में मौजूद अमेरिकी दूतावास ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जानकारी दी कि यह राहत सामग्री पाकिस्तानी सेना के अनुरोध पर भेजी गई है.

इस बारे में चार्ज द’अफेयर्स नताली बेकर ने बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदना प्रकट की और कहा कि अमेरिका हर संभव मानवीय सहायता के लिए तैयार है.

विमान से आए सामान में तिरपाल, दवाइयां, शुद्ध पेयजल उपकरण, और प्राथमिक चिकित्सा किट शामिल हैं, जिन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाया जाएगा.

पंजाब बना बाढ़ का केंद्र, फसलें हुई तबाह

पाकिस्तान के सबसे बड़े और कृषि प्रधान प्रांत पंजाब की हालत सबसे खराब बताई जा रही है. यह वही इलाका है जहां देश की लगभग आधी आबादी रहती है और जहां से गेहूं, चावल और अन्य आवश्यक अनाज उपजते हैं.

इस क्षेत्र में तीन प्रमुख नदियाँ रावी, सतलुज और चेनाब उफान पर हैं. हाल के हफ्तों में केवल पंजाब में ही 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि इस मॉनसून सीज़न में देशभर में 230 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं.

नदी किनारे बसे गांवों में हजारों परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा है. सड़कों और खेतों में घुटनों तक पानी भर चुका है.

अब सैटेलाइट से होगी स्थिति की निगरानी

हालात की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तानी प्रशासन ने सैटेलाइट आधारित सर्वेक्षण प्रणाली के ज़रिए बाढ़ से हुए नुकसान का मूल्यांकन शुरू कर दिया है. इसका उद्देश्य है:

  • जिन इलाकों में जलभराव सबसे ज्यादा है, वहाँ तेजी से राहत भेजना
  • प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा देना
  • भविष्य में इसी तरह की आपदाओं से निपटने के लिए स्थायी समाधान तैयार करना
  • सरकारी टीमों के अलावा सेना और अन्य एजेंसियों को भी निकासी और पुनर्वास कार्यों में लगाया गया है.

जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को दो हफ्ते का अल्टीमेटम

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में आयोजित एक आपातकालीन बैठक में स्थिति की समीक्षा की. उन्होंने जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर एक ऐसा व्यापक और ठोस रणनीतिक प्लान तैयार किया जाए जिससे देश भविष्य में आने वाली मानसूनी बाढ़ और जलवायु आपदाओं से बेहतर ढंग से निपट सके.

उनका यह बयान इस बात को दर्शाता है कि सरकार अब स्थिति की गंभीरता को समझ रही है, लेकिन बचाव और राहत प्रयासों की गति अभी भी सवालों के घेरे में है.

फिर संकट की आशंका, नए मॉनसून स्पेल का अलर्ट

पंजाब डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (PDMA) ने चेतावनी दी है कि शनिवार से मॉनसून का 10वां दौर शुरू होने जा रहा है, जो पहले से ही जलमग्न इलाकों के लिए अधिक खतरा बन सकता है.

PDMA ने राज्यभर के सभी कमिश्नरों और डिप्टी कमिश्नरों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा स्वास्थ्य, सिंचाई, स्थानीय प्रशासन, पशुपालन और PWD विभागों को भी आपातकालीन मोड में काम करने को कहा गया है.

खतरे के निशान पार कर चुकी हैं प्रमुख नदियाँ

शनिवार सुबह तक की रिपोर्ट के अनुसार:

  • चेनाब नदी चिनियोट और त्रिमु हेडवर्क्स पर उच्चतम जलस्तर पर बह रही है.
  • सतलुज नदी के जलस्तर में गंडा सिंह वाला और सुलेमानकी इलाकों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
  • रावी नदी भी बेलोकी और सिधनई में खतरनाक स्तर को पार कर चुकी है.

नदी किनारे बसे सैकड़ों गांवों में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और लाखों लोग भय और अनिश्चितता के बीच जीने को मजबूर हैं.

बढ़ रही बाढ़ से 16 लाख से अधिक लोग खतरे में

अब बाढ़ का असर सिंध प्रांत तक पहुंचने लगा है. प्रशासन ने अनुमान लगाया है कि यदि पानी का बहाव ऐसे ही जारी रहा, तो 1,651 गांवों में पानी घुस सकता है, जिससे 16 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हो सकते हैं.

अब तक सिंध में:

  • 1.2 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं.
  • 528 राहत कैंप और 155 मेडिकल कैंप बनाए गए हैं.
  • 33,000 से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है.
  • 3.6 लाख से ज्यादा मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.

सिंध के सूचना मंत्री शर्जील मेमन ने कहा कि सरकार निचले इलाकों से लोगों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चला रही है.

"हमें दुनिया की जरूरत है"- पाकिस्तान की अपील

इन गंभीर हालातों के बीच पाकिस्तान सरकार अब वैश्विक समुदाय की ओर देख रही है. प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय ने एकजुट होकर संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, IMF, और प्रमुख देशों से राहत और पुनर्वास के लिए मदद की अपील की है.

हालांकि सरकार दावा कर रही है कि वह किसी भी कीमत पर जान-माल के नुकसान को कम करना चाहती है, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि हालात उनके नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं. इसलिए अमेरिका से लेकर खाड़ी देशों तक से मदद मांगी जा रही है.

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