Delhi Cold: देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों जबरदस्त शीतलहर की चपेट में है. सर्दी का असर इतना ज्यादा है कि पालम इलाके में न्यूनतम तापमान गिरकर 2.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे पिछले 20 वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया. पहले प्रदूषण और अब कड़ाके की ठंड ने दिल्लीवासियों की परेशानी और बढ़ा दी है. हालात सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे सटे पूरे एनसीआर क्षेत्र में भी ठंड का प्रकोप देखने को मिल रहा है. गुरुग्राम में तो तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है.
आमतौर पर इस तरह की ठंड पहाड़ी इलाकों और हिल स्टेशनों में देखने को मिलती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस समय शिमला और देहरादून जैसे ठंडे माने जाने वाले शहरों का मौसम दिल्ली के मुकाबले ज्यादा बेहतर बना हुआ है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर पहाड़ों से ज्यादा ठंड दिल्ली और एनसीआर में क्यों पड़ रही है?
पहाड़ों से ठंडी हवा और मैदानों में गिरता तापमान
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 13 जनवरी को शिमला का न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस और देहरादून का 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो दिल्ली और आसपास के मैदानी इलाकों से काफी अधिक है. हालांकि यह पहली बार नहीं है जब मैदानी इलाकों में पहाड़ों से ज्यादा ठंड महसूस की जा रही हो.
भारतीय मौसम विभाग के वैज्ञानिक नरेश कुमार के अनुसार, सर्दियों के इस दौर में हिमालय क्षेत्र से ठंडी और शुष्क हवाएं उत्तर भारत की ओर चलती हैं. ये हवाएं जब मैदानी इलाकों तक पहुंचती हैं तो तापमान में अचानक गिरावट दर्ज की जाती है. इस बार यही प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी नजर आ रही है.
पहाड़ों में बादल, मैदानों में खुला आसमान
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार पहाड़ी इलाकों में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के चलते बादल छाए हुए हैं. बादलों की यह परत रात के समय धरती की गर्मी को बाहर निकलने से रोकती है, जिससे वहां का तापमान बहुत ज्यादा नीचे नहीं जाता.
इसके उलट, दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में आसमान ज्यादातर साफ रहा है. साफ आसमान और लगातार चल रही ठंडी हवाओं की वजह से जैसे ही शाम ढलती है, जमीन तेजी से ठंडी होने लगती है. यही कारण है कि मैदानी इलाकों में ठंड ज्यादा तेज महसूस हो रही है.
रेडिएशनल कूलिंग से बढ़ी सर्दी
मौसम वैज्ञानिक इस स्थिति को “रेडिएशनल कूलिंग” से जोड़कर देख रहे हैं. दरअसल, दिन के समय सूरज की रोशनी से जमीन कुछ हद तक गर्म हो जाती है, लेकिन जब आसमान साफ होता है तो रात के वक्त यह गर्मी तेजी से वायुमंडल में निकल जाती है. इसके चलते आसपास की हवा जल्दी ठंडी हो जाती है और सुबह के समय कंपकंपा देने वाली ठंड महसूस होती है.
दिल्ली में पिछले कई दिनों से दिन में धूप खिली रही और रात में आसमान साफ रहा, जिससे रेडिएशनल कूलिंग की प्रक्रिया और तेज हो गई. यही वजह है कि सुबह और देर रात के समय तापमान अचानक बहुत नीचे चला जा रहा है.
पहाड़ों में क्यों कम असर दिख रहा है?
अगर हिमाचल प्रदेश के शिमला या उत्तराखंड के देहरादून की बात करें, तो वहां बादल एक कंबल की तरह काम करते हैं. ये बादल धरती की गर्मी को बाहर जाने से रोकते हैं और तापमान को संतुलित बनाए रखते हैं. इसी वजह से वहां ठंड तो है, लेकिन मैदानी इलाकों जैसी तीव्र गिरावट नहीं देखी जा रही है.
शीतलहर और कोल्ड डे की परिभाषा क्या है?
मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे राज्यों में शीतलहर की स्थिति अक्सर बनती है.
जब पहाड़ी इलाकों में तापमान शून्य डिग्री या उससे नीचे चला जाए और मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस या उससे कम हो जाए, तो उसे शीतलहर की स्थिति माना जाता है. वहीं अगर दिन का अधिकतम तापमान 10 डिग्री से नीचे चला जाए और यह सामान्य से 4.5 से 6.5 डिग्री कम रहे, तो इसे “कोल्ड डे” कहा जाता है. अगर अधिकतम तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री से भी ज्यादा नीचे गिर जाए, तो स्थिति “सीवियर कोल्ड डे” मानी जाती है.
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