INS Vagsheer: भारतीय नौसेना की ताकत में शामिल आईएनएस वाघशीर एक बार फिर चर्चा में है. रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिस स्वदेशी पनडुब्बी में समुद्री यात्रा की, वह भारतीय नौसेना की आधुनिक क्षमता, युद्धक तैयारी और आत्मनिर्भर भारत की सोच का मजबूत प्रतीक मानी जा रही है. आईएनएस वाघशीर न सिर्फ तकनीक के लिहाज से अत्याधुनिक है, बल्कि इसकी खामोशी और मारक क्षमता के कारण इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है.
आईएनएस वाघशीर प्रोजेक्ट-75 स्कॉर्पीन श्रेणी की छठी और अंतिम पनडुब्बी है. इसे इसी साल जनवरी में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था. नौसेना अधिकारियों के अनुसार, यह दुनिया की सबसे शांत और बहु-भूमिका निभाने वाली डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों में गिनी जाती है.
कई मिशनों के लिए तैयार
आईएनएस वाघशीर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह युद्ध के समय कई तरह के मिशन अंजाम दे सके. इसमें सतह पर मौजूद दुश्मन जहाजों पर हमला, दुश्मन पनडुब्बियों की तलाश और उन्हें नष्ट करना, खुफिया जानकारी जुटाना, समुद्री क्षेत्रों की निगरानी और विशेष सैन्य अभियानों को अंजाम देने की क्षमता शामिल है. इसकी ताकत इसे समुद्र के भीतर एक घातक हथियार बनाती है.
यह पनडुब्बी वायर-गाइडेड टॉरपीडो, आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों और अत्याधुनिक सोनार सिस्टम से लैस है. इसके सेंसर और सोनार सिस्टम दुश्मन की गतिविधियों को काफी दूर से पहचानने में सक्षम हैं.
मॉड्यूलर डिजाइन और भविष्य की तकनीक
आईएनएस वाघशीर का निर्माण मॉड्यूलर तकनीक पर आधारित है. इसका फायदा यह है कि भविष्य में इसमें नई तकनीकों को आसानी से जोड़ा जा सकता है. इसमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम जैसी उन्नत तकनीक को इंटीग्रेट करने की सुविधा मौजूद है, जिससे पनडुब्बी की पानी के नीचे रहने की क्षमता और बढ़ सकती है.
INS वाघशीर की प्रमुख खूबियां-
स्टील्थ टेक्नोलॉजी
वाघशीर को इस तरह तैयार किया गया है कि यह दुश्मन के रडार, सोनार और निगरानी प्रणालियों की पकड़ में आसानी से न आए.
डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन
डीजल-इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली के कारण यह बेहद कम शोर करती है, जिससे दुश्मन को इसकी मौजूदगी का पता लगाना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है.
लंबे समय तक समुद्र के नीचे रहने की क्षमता
यह पनडुब्बी कई दिनों तक बिना सतह पर आए पानी के भीतर ऑपरेशन कर सकती है, जो इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाता है.
घातक हथियार प्रणाली
आधुनिक टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइलों से लैस वाघशीर दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों को भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम है.
अत्याधुनिक सेंसर और सोनार
इसमें लगे हाई-एंड सेंसर सिस्टम समुद्र के भीतर होने वाली हलचल को दूर से पकड़ सकते हैं.
मेक इन इंडिया की मिसाल
आईएनएस वाघशीर का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में किया गया है. इसमें फ्रांस की नेवल ग्रुप की तकनीकी सहायता ली गई है, लेकिन निर्माण पूरी तरह भारत में हुआ है.
हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की ताकत
आईएनएस वाघशीर हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी और सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करेगी. चीन और पाकिस्तान की समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने में यह पनडुब्बी अहम भूमिका निभा सकती है.
नाम का अर्थ
‘वाघशीर’ का अर्थ है ‘बाघ का सिर’. यह नाम इसकी आक्रामकता, ताकत और घातक क्षमता का प्रतीक माना जाता है.
राष्ट्रपति की ऐतिहासिक यात्रा
रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पश्चिमी तट पर स्थित कारवार नौसैनिक अड्डे से आईएनएस वाघशीर पर सवार हुईं. वह पनडुब्बी में यात्रा करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति बनीं. इससे पहले फरवरी 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने आईएनएस सिंधु रक्षक पनडुब्बी में समुद्री यात्रा की थी.
राष्ट्रपति के साथ इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी मौजूद थे. राष्ट्रपति ने नौसेना की वर्दी में पनडुब्बी में प्रवेश से पहले नौसैनिकों का अभिवादन किया. राष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इस यात्रा की जानकारी साझा की.
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