आसमान से इंजीनियरों से 50 मिनट की बात, फिर भी क्रैश हुआ फाइटर जेट, F-35 को क्यों कहा जा रहा कबाड़?

अमेरिकी वायुसेना का अत्याधुनिक और अत्यधिक महंगा F-35 लड़ाकू विमान एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार इसकी तकनीकी श्रेष्ठता नहीं, बल्कि इसकी गंभीर खामियों को लेकर.

Why is the crashed F-35 now being called junk
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Sociel Media

वॉशिंगटन: अमेरिकी वायुसेना का अत्याधुनिक और अत्यधिक महंगा F-35 लड़ाकू विमान एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार इसकी तकनीकी श्रेष्ठता नहीं, बल्कि इसकी गंभीर खामियों को लेकर. दुनिया की सबसे एडवांस माने जाने वाली इस फाइटर जेट सीरीज को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. हाल ही में अमेरिका के अलास्का में हुई एक दुर्घटना ने इस लड़ाकू विमान की विश्वसनीयता और मेंटेनेंस पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है.

क्या हुआ था अलास्का में?

इस वर्ष की शुरुआत में अलास्का में अमेरिकी वायुसेना का एक F-35A फाइटर जेट रूटीन मिशन पर था. लेकिन उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही पायलट को लैंडिंग गियर से जुड़ी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा. विमान के आगे और मुख्य लैंडिंग गियर की हाइड्रोलिक लाइनों में बर्फ जम गई थी, जिससे वह ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे. जब पायलट ने लैंडिंग गियर को वापस बंद करने की कोशिश की, तो वह असफल रहा.

इसके बाद जब उसने गियर को फिर से नीचे करने का प्रयास किया, तो आगे का पहिया सिस्टम बाईं दिशा में घूमकर फंस गया, जिससे स्थिति और खराब हो गई. पायलट ने हरसंभव प्रयास किया कि वह इस तकनीकी गड़बड़ी को हवा में ही ठीक कर सके.

50 मिनट तक इंजीनियरों से की बातचीत

समस्या हल करने के लिए पायलट ने तत्काल विमान निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन के पांच इंजीनियरों के साथ 50 मिनट लंबी कॉन्फ्रेंस कॉल की. हवा में रहते हुए एक तरफ पायलट विमान को नियंत्रित करने में जुटा था, वहीं दूसरी तरफ वह इंजीनियरों से लगातार सलाह ले रहा था. लेकिन इतनी लंबी तकनीकी चर्चा के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका.

इस घटना की जानकारी जैसे ही सार्वजनिक हुई, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि विमान लैंडिंग के प्रयास में रनवे के पास घूमता है, लेकिन फिर अचानक वह नियंत्रण खो बैठता है और आग की लपटों में घिर जाता है. वीडियो में यह भी दिखा कि पायलट आखिरकार पैराशूट की मदद से विमान से बाहर निकल गया.

लैंडिंग में क्यों असफल रहा पायलट?

कई प्रयासों के बाद जब समस्या का समाधान नहीं निकला, तो पायलट ने “टच एंड गो” लैंडिंग की दो बार कोशिश की. इसका उद्देश्य था कि जाम हो चुके लैंडिंग गियर को रनवे से छूकर सीधा किया जा सके. लेकिन दोनों बार यह कोशिश नाकाम रही. इसके बाद लैंडिंग गियर की स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ गई.

बाद में विमान के सेंसरों ने गलत संकेत देना शुरू कर दिया कि जेट पहले ही जमीन पर उतर चुका है. इस कारण पायलट के पास कोई विकल्प नहीं बचा और उसे विमान से इजेक्ट करना पड़ा.

सबसे महंगे विमान पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

F-35 को अब तक का सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट माना जाता है. यह पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जो स्टेल्थ तकनीक, मल्टीरोल क्षमता और एआई-आधारित सिस्टम्स से लैस है. अमेरिका समेत जापान, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और इजराइल जैसे देशों ने इसे अपनी वायुसेनाओं में शामिल किया है.

लेकिन इसके साथ कई समस्याएं भी सामने आ चुकी हैं:

  • ऑपरेशनल लागत बहुत अधिक है
  • मेंटेनेंस जटिल और महंगा है
  • उपलब्धता (availability rate) कई देशों में 50% से भी कम बताई गई है
  • तकनीकी गड़बड़ियों और बार-बार इमरजेंसी लैंडिंग की घटनाएं भी सामने आती रही हैं

भारत और जापान में भी F-35 की इमरजेंसी लैंडिंग की घटनाएं हो चुकी हैं. दक्षिण कोरिया की वायुसेना ने तो इस विमान की “mission availability rate” को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जाहिर की थी.

वॉशिंगटन: अमेरिकी वायुसेना का अत्याधुनिक और अत्यधिक महंगा F-35 लड़ाकू विमान एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार इसकी तकनीकी श्रेष्ठता नहीं, बल्कि इसकी गंभीर खामियों को लेकर. दुनिया की सबसे एडवांस माने जाने वाली इस फाइटर जेट सीरीज को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. हाल ही में अमेरिका के अलास्का में हुई एक दुर्घटना ने इस लड़ाकू विमान की विश्वसनीयता और मेंटेनेंस पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है.

क्या हुआ था अलास्का में?

इस वर्ष की शुरुआत में अलास्का में अमेरिकी वायुसेना का एक F-35A फाइटर जेट रूटीन मिशन पर था. लेकिन उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही पायलट को लैंडिंग गियर से जुड़ी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा. विमान के आगे और मुख्य लैंडिंग गियर की हाइड्रोलिक लाइनों में बर्फ जम गई थी, जिससे वह ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे. जब पायलट ने लैंडिंग गियर को वापस बंद करने की कोशिश की, तो वह असफल रहा.

इसके बाद जब उसने गियर को फिर से नीचे करने का प्रयास किया, तो आगे का पहिया सिस्टम बाईं दिशा में घूमकर फंस गया, जिससे स्थिति और खराब हो गई. पायलट ने हरसंभव प्रयास किया कि वह इस तकनीकी गड़बड़ी को हवा में ही ठीक कर सके.

50 मिनट तक इंजीनियरों से की बातचीत

समस्या हल करने के लिए पायलट ने तत्काल विमान निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन के पांच इंजीनियरों के साथ 50 मिनट लंबी कॉन्फ्रेंस कॉल की. हवा में रहते हुए एक तरफ पायलट विमान को नियंत्रित करने में जुटा था, वहीं दूसरी तरफ वह इंजीनियरों से लगातार सलाह ले रहा था. लेकिन इतनी लंबी तकनीकी चर्चा के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका.

इस घटना की जानकारी जैसे ही सार्वजनिक हुई, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि विमान लैंडिंग के प्रयास में रनवे के पास घूमता है, लेकिन फिर अचानक वह नियंत्रण खो बैठता है और आग की लपटों में घिर जाता है. वीडियो में यह भी दिखा कि पायलट आखिरकार पैराशूट की मदद से विमान से बाहर निकल गया.

लैंडिंग में क्यों असफल रहा पायलट?

कई प्रयासों के बाद जब समस्या का समाधान नहीं निकला, तो पायलट ने “टच एंड गो” लैंडिंग की दो बार कोशिश की. इसका उद्देश्य था कि जाम हो चुके लैंडिंग गियर को रनवे से छूकर सीधा किया जा सके. लेकिन दोनों बार यह कोशिश नाकाम रही. इसके बाद लैंडिंग गियर की स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ गई.

बाद में विमान के सेंसरों ने गलत संकेत देना शुरू कर दिया कि जेट पहले ही जमीन पर उतर चुका है. इस कारण पायलट के पास कोई विकल्प नहीं बचा और उसे विमान से इजेक्ट करना पड़ा.

सबसे महंगे विमान पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

F-35 को अब तक का सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट माना जाता है. यह पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जो स्टेल्थ तकनीक, मल्टीरोल क्षमता और एआई-आधारित सिस्टम्स से लैस है. अमेरिका समेत जापान, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और इजराइल जैसे देशों ने इसे अपनी वायुसेनाओं में शामिल किया है.

लेकिन इसके साथ कई समस्याएं भी सामने आ चुकी हैं:

  • ऑपरेशनल लागत बहुत अधिक है
  • मेंटेनेंस जटिल और महंगा है
  • उपलब्धता (availability rate) कई देशों में 50% से भी कम बताई गई है
  • तकनीकी गड़बड़ियों और बार-बार इमरजेंसी लैंडिंग की घटनाएं भी सामने आती रही हैं

भारत और जापान में भी F-35 की इमरजेंसी लैंडिंग की घटनाएं हो चुकी हैं. दक्षिण कोरिया की वायुसेना ने तो इस विमान की “mission availability rate” को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जाहिर की थी.

ये भी पढ़ें- अमेरिकी टैरिफ से निपटने के लिए क्या है भारत सरकार का प्लान? वित्त मंत्री सीतारमण ने सबकुछ बताया