इस साल साउथ अफ्रीका में होने वाली G20 समिट कई कारणों से सुर्खियों में है. दुनिया की तीन सबसे बड़ी शक्तियों- अमेरिका, रूस और चीन के शीर्ष नेता इसमें शामिल नहीं हो रहे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउथ अफ्रीका में गोरे किसानों के साथ होने वाले कथित उत्पीड़न का हवाला देकर समिट से दूरी बना ली है.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस बार हिस्सा नहीं ले रहे हैं. यूक्रेन युद्ध से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत (ICC) के गिरफ्तारी वारंट के चलते वे किसी विदेशी कार्यक्रम में जाने से बचते रहे हैं. वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अंतिम समय में स्वास्थ्य कारणों से यात्रा रद्द कर बैठे.
दुनिया के इन तीन प्रभावशाली नेताओं की गैरहाज़िरी ने इस बार G20 में भारत की मौजूदगी और भी महत्वपूर्ण बना दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समिट के तीनों प्रमुख सत्रों में भारत की ओर से संबोधन देंगे और वैश्विक मुद्दों पर देश का दृष्टिकोण साझा करेंगे.
मोदी का साउथ अफ्रीका दौरा क्यों महत्वपूर्ण?
पीएम मोदी अपनी यात्रा शुरू करने से पहले जारी बयान में स्पष्ट कर चुके हैं कि यह समिट खास है क्योंकि इतिहास में पहली बार G20 सम्मेलन अफ्रीकी महाद्वीप में आयोजित हो रहा है.
भारत ने 2023 में अपनी अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकन यूनियन को G20 का स्थायी सदस्य बनवाने में अग्रणी भूमिका निभाई थी. अब अफ्रीका में पहली बार समिट होने से भारत और अफ्रीका के संबंधों में नई मजबूती दिख रही है.
गुरुवार को पीएम मोदी के साउथ अफ्रीका पहुंचने पर स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक अंदाज में उनका स्वागत किया. उनकी इस उपस्थिति को अफ्रीकी देशों में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का संकेत माना जा रहा है.
भारत के लिए G20 का बढ़ा महत्व
इस बार ट्रंप, पुतिन और जिनपिंग की गैरमौजूदगी ने G20 के मंच पर भारत की भूमिका को और अधिक केंद्रीय बना दिया है. समिट में पीएम मोदी आर्थिक सहयोग, जलवायु बदलाव से निपटने की रणनीति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग जैसे मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण साझा करेंगे.
भारत लंबे समय से ग्लोबल साउथ यानी विकासशील और निम्न आय वाले देशों की आवाज़ को मजबूत बनाकर उठाने की भूमिका निभा रहा है. यह समिट भारत के लिए उस नेतृत्व को फिर से स्थापित करने का अवसर प्रदान कर रही है.
IBSA बैठक में भी शामिल होंगे मोदी
G20 के अलावा पीएम मोदी इंडिया-ब्राजील-साउथ अफ्रीका (IBSA) की त्रिपक्षीय बैठक में भी भाग लेंगे. इसके अतिरिक्त वे कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय चर्चा भी करेंगे.
प्रधानमंत्री के रूप में यह मोदी की चौथी आधिकारिक साउथ अफ्रीका यात्रा है. इससे पहले वे 2016 में द्विपक्षीय यात्रा और 2018 व 2023 में ब्रिक्स समिट के लिए अफ्रीका जा चुके हैं.
मोदी ने प्रस्थान से पहले कहा कि यह समिट वैश्विक मुद्दों पर सार्थक संवाद और ‘वसुधैव कुटुम्बकम - एक परिवार, एक भविष्य’ के भारत के विचार को आगे बढ़ाएगी.
साउथ अफ्रीका के लिए भी बड़ा अवसर
G20 अपनी दो दशक की यात्रा में पहली बार साउथ अफ्रीका में हो रहा है. देश जलवायु परिवर्तन, बाहरी कर्ज, आर्थिक सुस्ती और बेरोजगारी जैसी कई चुनौतियों से जूझ रहा है.
समिट की वजह से अफ्रीकी देश अपनी समस्याओं को सीधे विश्व शक्तियों के सामने रख पा रहे हैं. इससे उन्हें कर्ज राहत, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश तथा विकास परियोजनाओं पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करने का अवसर मिला है.
यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र के 2030 सतत विकास लक्ष्यों की समयसीमा से पांच साल पहले आयोजित हो रहा है, इसलिए इसे अफ्रीकी देशों के लिए नीतिगत सहयोग का निर्णायक समय माना जा रहा है.
ट्रंप खुद नहीं आए, लेकिन प्रतिनिधि भेजेंगे
डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर की शुरुआत में कहा था कि वे G20 में हिस्सा नहीं लेंगे और कोई अमेरिकी अधिकारी भी साउथ अफ्रीका नहीं भेजेंगे. उनका आरोप था कि वहां श्वेत किसानों पर अत्याचार हो रहा है और अमेरिका ऐसे आयोजन का समर्थन नहीं करेगा.
हालांकि सम्मेलन से ठीक एक दिन पहले अमेरिका ने रुख बदल दिया. साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति ने जानकारी दी कि अमेरिका ने अपना निर्णय पलटते हुए एक आधिकारिक नोटिस भेजा है. इसके अनुसार अमेरिका के कार्यवाहक राजदूत मार्क डी. डिलार्ड समिट के अंतिम सत्र में शामिल होंगे.
भारत में साउथ अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने इस विवाद पर कहा था कि G20 इतना बड़ा और प्रभावशाली मंच बन चुका है कि किसी एक देश की गैरमौजूदगी इसका काम नहीं रोक सकती.
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