क्या करें? ठंड आते ही आ जाता है जोड़ों का दर्द, इन आसान स्टेप्स से पाएं राहत

सर्दियों की दस्तक के साथ ही कई लोगों के लिए सुबहें थोड़ी मुश्किल हो जाती हैं. उठते ही घुटनों में खिंचाव, कमर में जकड़न और कंधों का भारीपन ऐसा महसूस होता है जैसे शरीर अपनी ही रफ्तार भूल गया हो.

Winters Joint Pain tips not to get hurt know here
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सर्दियों की दस्तक के साथ ही कई लोगों के लिए सुबहें थोड़ी मुश्किल हो जाती हैं. उठते ही घुटनों में खिंचाव, कमर में जकड़न और कंधों का भारीपन ऐसा महसूस होता है जैसे शरीर अपनी ही रफ्तार भूल गया हो. तापमान गिरते ही नसों का सिकुड़ना और ब्लड फ्लो का धीमा पड़ना जोड़ों की लचक को कम कर देता है. ऐसे में जो हिस्से पहले चोटिल रहे हों, वे सबसे पहले दर्द का संकेत देने लगते हैं. यही वजह है कि ठंड के मौसम में शरीर थोड़ा संवेदनशील और कमजोर महसूस करने लगता है.

जैसे-जैसे सर्दी गहराती है, शरीर की मांसपेशियों में कसाव बढ़ने लगता है. हल्की-सी खिंचाव वाली तकलीफ भी ठंड में कई गुना ज्यादा परेशान करती है. कई लोगों को तो ऐसा लगता है मानो पूरा शरीर जमने लगा हो और चलने-फिरने तक में आलस घिर आता है. पुराने फ्रैक्चर या एंजरी वाले हिस्से इस मौसम में अचानक ज्यादा दुखने लगते हैं, जैसे वर्षों पुरानी यादें फिर हकीकत बनकर सामने आ गई हों.

शरीर को गर्म रखने का ध्यान क्यों जरूरी?

जोड़ों के दर्द से राहत की शुरुआत शरीर को गर्म बनाए रखने से होती है. ठंडा तापमान स्टीफनेस बढ़ाता है, इसलिए लेयर वाले कपड़े पहनना मददगार रहता है. घर में हल्की गर्माहट, रजाई-दुपट्टा, मोजे, दस्ताने और टोपी—ये छोटी-छोटी चीजें शरीर की गर्मी को संभाले रखती हैं. कमरे में भी बहुत ठंडी हवा रहने पर असुविधा बढ़ जाती है, इसलिए माहौल को थोड़ा आरामदायक रखना फ़ायदेमंद होता है.

हल्की एक्सरसाइज क्यों जरूरी है?

सर्दियों का सबसे बड़ा दुश्मन है—बढ़ता आलस. जितनी कम मूवमेंट होगी, उतनी ही जोड़ों की सख्ती बढ़ेगी. हल्की स्ट्रेचिंग, योग और तेज़ कदमों से चलना ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है. हर एक्सरसाइज से पहले हल्का वॉर्म-अप करना ज़रूरी है क्योंकि ठंडे जोड़ों पर अचानक दबाव से दर्द बढ़ सकता है. लंबे समय तक एक ही पोज़िशन में बैठे रहना भी तकलीफ बढ़ाता है, इसलिए थोड़े-थोड़े समय पर शरीर को हिलाना जरूरी है.

खाद्य आदतों का जोड़ों पर असर

सर्दियों में खान-पान का सीधा असर जोड़ों पर पड़ता है. कैल्शियम, विटामिन डी और ओमेगा-3 से भरपूर भोजन हड्डियों को मज़बूत और जोड़ों को लचीला बनाए रखता है. दूध, दही, हरी सब्जियां, अंडे, मछली और ड्राई फ्रूट्स इस मौसम में खास फायदेमंद हैं. धूप कम मिलने से विटामिन डी की कमी भी बढ़ सकती है, इसलिए हल्की धूप लेना या डॉक्टर की सलाह से सप्लिमेंट लेना उपयोगी रहता है. पानी कम पीने की आदत सर्दियों में आम होती है, जो जोड़ों की ल्यूब्रिकेशन कम कर देती है. पर्याप्त पानी पीना जोड़ों की सेहत के लिए उतना ही जरूरी है जितना गर्म कपड़े पहनना.

गर्म सिकाई कैसे देती है राहत?

ठंड में जकड़न बढ़ने पर गर्माहट राहत का सबसे आसान तरीका है. हल्का गर्म सेक, हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल मांसपेशियों को ढीला करती है और ब्लड फ्लो को बढ़ाती है. गर्म पानी से नहाना भी खासतौर पर सुबह के समय बेहद आराम देता है. बस ध्यान रहे कि गर्माहट ज्यादा तीखी न हो, वरना त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है.

सही पोस्चर का महत्व

सर्दियों में लोग अक्सर सिमटकर बैठने लगते हैं, जिससे कमर और गर्दन पर अनावश्यक तनाव पड़ने लगता है. रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ने से दर्द और ज्यादा तेज महसूस होता है. इसलिए बैठते समय कमर सीधी रखना, पीठ को सपोर्ट देना और मोबाइल-लैपटॉप को आंखों की ऊंचाई पर रखना जरूरी है. घर से काम करने वालों को अपने वर्कस्पेस को शरीर के हिसाब से एडजस्ट करना चाहिए.

पुरानी चोटें इस मौसम में क्यों तंग करती हैं?

जिन लोगों को पहले से फ्रैक्चर, लिगामेंट इंजरी या ऑपरेशन हुआ हो, उनके लिए सर्दी थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकती है. तापमान कम होने पर पुरानी चोटों में खिंचाव बढ़ जाता है. ऐसे में प्रभावित हिस्से को गर्म रखना, हल्की फिजियोथेरेपी या स्ट्रेचिंग करना बेहद राहत देता है और मसल्स को एक्टिव रखता है.

सुबह की रूटीन से मिलती है राहत

सर्दियों की सुबह अक्सर सबसे ज्यादा जकड़न लेकर आती है. उठते ही हल्की स्ट्रेचिंग, कुछ मिनट टहलना या गर्म पानी से नहाना दिन की शुरुआत को आसान बना देता है. इससे शरीर हल्का और सक्रिय महसूस होता है और पूरे दिन दर्द कम परेशान करता है.

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