16वीं शताब्दी में किस महिला ने बनवाया था हुमायूं का मकबरा? उस वक्त खर्च हुए थे बस इतने रुपये

हुमायूं का मकबरा सिर्फ ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा है. यह वह स्थान भी है, जहां 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने शरण ली थी.

Woman behind Humayun s Tomb and its construction cost
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Delhi Humayun Tomb: स्वतंत्रता दिवस की खुशियों के बीच राजधानी दिल्ली से एक डरावनी खबर आई है. शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे हुमायूं टॉम्ब के पीछे स्थित निजामुद्दीन इलाके में एक पुरानी दरगाह की छत अचानक गिर गई. मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई थी. सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया.

मलबे से 10-12 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

दिल्ली पुलिस के डीसीपी के अनुसार, शुरुआती जांच में 10 से 12 लोगों के मलबे में दबने की जानकारी मिली थी. राहत-बचाव दल ने समय रहते कार्रवाई की और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला. इस हादसे में चार लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज नजदीकी अस्पताल में चल रहा है. अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और मलबा हटाने का काम जारी है.

बारिश बनी हादसे की वजह

हालांकि, इस हादसे के पीछे बारिश और पुरानी इमारत की कमजोर संरचना को मुख्य कारण माना जा रहा है. दिल्ली में पिछले दो दिनों से लगातार बारिश हो रही थी, जिससे पुरानी इमारत की छत कमजोर हो गई थी. पानी और नमी की वजह से गुबंद का हिस्सा अचानक गिर गया. अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए नियमित निगरानी और रख-रखाव जरूरी है.

मुगल बेगम की बनाई 16वीं शताब्दी की धरोहर

हुमायूं का मकबरा मुगल वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है. इसे 1569 में सम्राट हुमायूं की पहली पत्नी महारानी बेगा बेगम (हमीदा बानो बेगम) ने बनवाया था. फारसी वास्तुकार मिराक मिर्जा घियाथ ने इसे डिजाइन किया था. लाल बलुआ पत्थर से बनी यह संरचना चार बागों में बटी विशाल परिसर के बीच स्थित है. 1993 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया. इतिहासकारों के अनुसार, इसके निर्माण में उस समय लगभग 15 लाख रुपये खर्च हुए थे, जो उस समय की बड़ी रकम थी.

हुमायूं टॉम्ब का ऐतिहासिक महत्व

हुमायूं का मकबरा सिर्फ ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा है. यह वह स्थान भी है, जहां 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने शरण ली थी. इसके आसपास कई छोटे मकबरे और ऐतिहासिक संरचनाएं मौजूद हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करती हैं.   

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