कैब बुकिंग में महिलाएं चुन सकेंगी फीमेल ड्राइवर, अब ओला-उबर जैसे ऐप में मिलेगा जेंडर चॉइस ऑप्शन

ऑनलाइन कैब सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के लिए जल्द ही कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे.

Women will be able to choose female driver in cab booking
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

ऑनलाइन कैब सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के लिए जल्द ही कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. ओला, उबर और रैपिडो जैसे कैब एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स को अब अपने ऐप में यात्रियों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने से जुड़े नए फीचर्स जोड़ने होंगे. खास बात यह है कि महिला यात्रियों को अब फीमेल ड्राइवर चुनने का विकल्प मिलेगा, बशर्ते ड्राइवर उपलब्ध हो.

ये बदलाव मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स गाइडलाइंस, 2025 में किए गए ताजा संशोधनों का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य कैब सेवाओं को ज्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और उपभोक्ता हितैषी बनाना है.

ऐप में जरूरी होगा सेम जेंडर ड्राइवर का विकल्प

नई गाइडलाइंस के अनुसार, सभी कैब एग्रीगेटर कंपनियों को अपने मोबाइल ऐप में ऐसा फीचर शामिल करना अनिवार्य होगा, जिससे यात्री जरूरत पड़ने पर अपने ही जेंडर के ड्राइवर के साथ यात्रा कर सकें. यह सुविधा खासतौर पर महिला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लाई गई है.

हालांकि, यह विकल्प पूरी तरह ड्राइवर की उपलब्धता पर निर्भर करेगा. यानी अगर आसपास महिला ड्राइवर मौजूद नहीं है, तो ऐप सामान्य ड्राइवर ही अलॉट करेगा.

महिला ड्राइवरों की कमी बन सकती है चुनौती

इस फैसले को लागू करना आसान नहीं होगा. इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का कहना है कि देशभर में कैब चलाने वाली महिलाओं की संख्या फिलहाल 5% से भी कम है. ऐसे में हर जगह फीमेल ड्राइवर की उपलब्धता सुनिश्चित करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो सकता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे खासकर रात के समय बुकिंग में इंतजार का समय बढ़ सकता है, क्योंकि उस दौरान ड्राइवरों की संख्या सीमित होती है और मांग अधिक रहती है. ऑन-डिमांड सर्विस मॉडल पर भी इसका असर पड़ सकता है. हालांकि, ओला, उबर और रैपिडो ने इस मुद्दे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

अब ड्राइवर को सीधे मिलेगी पूरी टिप

नई गाइडलाइंस में टिपिंग सिस्टम को भी पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है. यात्री अब अपनी इच्छा से ड्राइवर को टिप दे सकेंगे, लेकिन इसके लिए कुछ स्पष्ट नियम तय किए गए हैं.

  • टिप देने का विकल्प सिर्फ यात्रा पूरी होने के बाद दिखाई देगा
  • बुकिंग या ट्रिप के दौरान टिप मांगने की अनुमति नहीं होगी
  • दी गई टिप की 100% राशि ड्राइवर को मिलेगी
  • कैब कंपनियां इसमें से कोई कमीशन या कटौती नहीं कर सकेंगी

कंपनियों को ऐसा कोई डिज़ाइन या तरीका अपनाने से रोका गया है, जो यात्रियों को टिप देने के लिए गुमराह करे या दबाव बनाए. इससे ड्राइवरों की आमदनी में सीधा फायदा होगा और यात्रियों को भी भरोसा मिलेगा कि उनका दिया गया पैसा सही व्यक्ति तक पहुंच रहा है.

किराए पर भी लगाई गई सीमा

सरकार ने किराए से जुड़े नियमों में भी अहम बदलाव किए हैं. नई गाइडलाइंस के तहत:

  • कंपनियां बेस फेयर से 50% तक कम किराया चार्ज कर सकती हैं
  • पीक ऑवर्स में सर्ज प्राइसिंग बेस फेयर के दोगुने से ज्यादा नहीं हो सकेगी

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी रूट का सामान्य किराया ₹50 है, तो व्यस्त समय में भी ₹100 से ज्यादा नहीं लिया जा सकेगा

इससे यात्रियों को मनमानी कीमतों से राहत मिलेगी, खासकर ऑफिस टाइम और बारिश जैसे हालात में.

‘डेड माइलेज’ चार्ज पर भी रोक

नई गाइडलाइंस में यात्रियों से डेड माइलेज यानी ड्राइवर के पिकअप पॉइंट तक पहुंचने की दूरी का चार्ज लेने पर भी रोक लगा दी गई है. अब:

  • ड्राइवर के पिकअप तक आने का खर्च यात्रियों से नहीं लिया जा सकेगा
  • सिर्फ 3 किलोमीटर से कम दूरी के मामलों में ही सीमित शुल्क लिया जा सकेगा
  • इस कदम से छोटे सफर करने वाले यात्रियों को खास राहत मिलेगी.

सरकार ने साफ किया है कि इन गाइडलाइंस का उल्लंघन करने वाली कैब कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है. गंभीर मामलों में लाइसेंस रद्द किए जाने का प्रावधान भी रखा गया है.

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