China Taiwan Conflict: जब दुनिया 2025 को अलविदा कहने और नए साल के स्वागत की तैयारी में जुटी हुई थी, उसी वक्त एशिया के पूर्वी छोर पर हालात अचानक विस्फोटक हो गए. ताइवान की सीमाओं के आसपास जिस तरह की सैन्य हलचल सामने आई है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. बीजिंग से आए एक सख्त संदेश के बाद चीनी सेना ने ताइवान को चारों तरफ से दबाव में लेना शुरू कर दिया है. इसे महज सैन्य अभ्यास कहना अब मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि आसमान से लेकर समंदर तक चीन ने अपनी ताकत का खुला प्रदर्शन कर दिया है.
पिछले 24 घंटों में जो कुछ ताइवान के ऊपर हुआ, वह किसी युद्ध की रिहर्सल से कम नहीं था. चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स के 130 से ज्यादा लड़ाकू विमानों ने ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन को भेदते हुए उड़ान भरी. इनमें चीन के सबसे घातक हथियारों में गिने जाने वाले J-20 स्टील्थ फाइटर जेट्स और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बमवर्षक विमान भी शामिल थे.
इस आक्रामक हवाई गतिविधि ने ताइवान की सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है. आसमान में लगातार गश्त करते चीनी फाइटर जेट्स यह संदेश दे रहे हैं कि बीजिंग अब सिर्फ चेतावनी तक सीमित नहीं रहना चाहता.
समंदर में नाकाबंदी, ताइवान की लाइफलाइन पर चीन का शिकंजा
हवा के साथ-साथ चीन ने समुद्र में भी अपनी ताकत झोंक दी है. ताइवान के दो सबसे अहम बंदरगाह, कीलुंग और काओशुंग, जो देश की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन माने जाते हैं, उनके आसपास चीनी कोस्ट गार्ड और युद्धपोतों की भारी तैनाती कर दी गई है. चीनी जहाज ताइवानी गश्ती नौकाओं से महज कुछ मीटर की दूरी पर आकर खड़े हैं.
यह सीधी चुनौती है, जिसमें शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक दबाव भी साफ झलक रहा है. चीन ने इसे अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास बताया है और वायुसेना के साथ-साथ तोपखाने की यूनिट्स को भी तैनात कर दिया है. संकेत मिल रहे हैं कि अगला कदम लाइव फायर ड्रिल हो सकता है, जो हालात को और ज्यादा खतरनाक बना देगा.
ताइवान की जवाबी तैयारी, मिराज 2000 ने भरी हुंकार
चीनी घेराबंदी के बीच ताइवान ने भी साफ कर दिया है कि वह डरने वाला नहीं है. जैसे ही चीनी लड़ाकू विमान सीमा के करीब पहुंचे, ताइवान के मिराज 2000 फाइटर जेट्स ने सिंचू एयर बेस से तेज गर्जना के साथ उड़ान भरी. यह ताइवान की तरफ से स्पष्ट संदेश था कि उसकी वायुसेना हर हालात के लिए तैयार है.
ताइवान ने अपनी सभी प्रमुख मिसाइल डिफेंस प्रणालियों को ‘एक्टिव मोड’ पर डाल दिया है. रक्षा मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर चीन ने 12 नॉटिकल मील की समुद्री सीमा लांघने की कोशिश की, तो जवाब ‘टोटल वॉर’ यानी पूर्ण युद्ध के रूप में दिया जाएगा.
शहरों में सायरन, बंकरों में छिपने की रिहर्सल
जंग की आशंका अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रही. ताइवान के कई शहरों में नागरिक सुरक्षा अभ्यास (Air Raid Drill) कराए गए. सायरन बजते ही लोग मेट्रो स्टेशनों और अंडरग्राउंड बंकरों में छिपने की प्रैक्टिस करते नजर आए.
आम नागरिकों के चेहरों पर डर साफ दिख रहा है, क्योंकि आशंका है कि चीन किसी भी वक्त अचानक हमला कर सकता है. सरकार का कहना है कि ये अभ्यास एहतियात के तौर पर किए जा रहे हैं, लेकिन हालात जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उसने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
अमेरिका-ताइवान डील से भड़का बीजिंग
इस बढ़ते तनाव की जड़ में हालिया अमेरिका-ताइवान रक्षा डील को अहम वजह माना जा रहा है. ताइवान ने अमेरिका से 11.1 अरब डॉलर के अत्याधुनिक ड्रोन और मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने का समझौता किया है. बीजिंग इसे सीधे तौर पर अपनी संप्रभुता को चुनौती मान रहा है.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस डील से खासे नाराज बताए जा रहे हैं. इसी बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा सामने आया है कि चीन ने अपनी सेना को 2027 तक ताइवान पर पूरी तरह कब्जा करने की तैयारी का निर्देश दे रखा है. मौजूदा सैन्य अभ्यास को उसी बड़े मिशन की एक झलक माना जा रहा है.
ताइवान का सख्त संदेश: झुकेंगे नहीं
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते का बयान भी काफी अहम माना जा रहा है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि “ताइवान कभी भी चीन का हिस्सा नहीं बनेगा.” यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चीनी सैन्य दबाव चरम पर है.
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