Subsea Cable: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले एक महीने से चल रहे युद्ध का असर अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा है. अब इंटरनेट सेवा पर भी खतरा बढ़ने लगा है. वजह यह है कि दुनिया के कई जरूरी इंटरनेट केबल समुद्र के रास्ते गुजरते हैं, जिनमें होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर भी शामिल हैं.
कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने इन केबल को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी है. अगर ऐसा होता है तो भारत समेत कई देशों में इंटरनेट की स्पीड और कनेक्शन पर असर पड़ सकता है. इसी को देखते हुए भारत सरकार सतर्क हो गई है.
कंपनियों को तैयार रहने के निर्देश
सरकार ने दूरसंचार विभाग के जरिए टेलीकॉम कंपनियों और समुद्र में केबल बिछाने वाली कंपनियों को तैयार रहने को कहा है. उन्हें बैकअप योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अगर कोई समस्या आती है तो इंटरनेट सेवा ज्यादा प्रभावित न हो.
युद्ध के कारण केबल टूटने का खतरा ही नहीं, बल्कि उनकी मरम्मत में भी देरी हो सकती है. इससे भारत के साथ-साथ यूरोप के कई देशों में भी इंटरनेट सेवा पर असर पड़ सकता है.
समुद्र के केबल से चलता है इंटरनेट
दुनिया का करीब 95 प्रतिशत इंटरनेट डेटा समुद्र में बिछे केबल के जरिए चलता है. भारत में भी ऐसे कई केबल जुड़े हैं, जिनके स्टेशन चेन्नई, मुंबई, कोच्चि और तूतीकोरिन जैसे शहरों में बने हैं. अगर इन रास्तों में नुकसान होता है, तो इंटरनेट को दूसरे रास्तों से चलाया जा सकता है, लेकिन इससे स्पीड धीमी हो सकती है और नेटवर्क पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है.
इन जगहों पर ज्यादा खतरा
इस समय सबसे ज्यादा खतरा दो जगहों पर है, होर्मुज जलडमरूमध्य और Bab-el-Mandeb. ये दोनों समुद्री रास्ते बहुत अहम माने जाते हैं. होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण है, जबकि बाब-एल-मंदेब के पास ईरान समर्थित हूती विद्रोही सक्रिय हैं. लाल सागर क्षेत्र में पहले से तनाव था, लेकिन अब युद्ध के कारण स्थिति और ज्यादा खराब हो गई है.
क्या हो सकता है असर
अगर हालात और बिगड़ते हैं और केबल को नुकसान पहुंचता है, तो इंटरनेट की स्पीड कम हो सकती है या कुछ समय के लिए सेवा बाधित भी हो सकती है. इसलिए सरकार पहले से तैयारी कर रही है, ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो.
ये भी पढ़ें- अमित शाह ने ममता सरकार के खिलाफ जारी की चार्जशीट, इन 14 मुद्दों को किया उजागर, जानें पूरा मामला