WHO से अलग हुआ अमेरिका, जिनेवा हेडक्वार्टर के बाहर से उतारा गया US का झंडा, ट्रंप का सपना पूरा!

अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से आधिकारिक तौर पर खुद को अलग कर लिया है.

World Health Organization America Exit From WHO Trump
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अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से आधिकारिक तौर पर खुद को अलग कर लिया है. गुरुवार, 22 जनवरी को अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि संगठन से बाहर निकलने की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. इसके साथ ही अमेरिका ने WHO को बकाया वित्तीय योगदान चुकाने से भी इनकार कर दिया है. इस फैसले के बाद वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसके असर को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं.

यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस नीति का हिस्सा है, जिसे वे लंबे समय से आगे बढ़ाते आ रहे थे. ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के पहले ही दिन एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए WHO से बाहर निकलने का नोटिस जारी कर दिया था. अमेरिकी कानून के तहत संगठन छोड़ने के लिए एक साल पहले नोटिस देना जरूरी होता है, जो अब पूरा हो चुका है.

WHO को भुगतान नहीं करेगा अमेरिका

WHO से अलग होने के साथ ही अमेरिका ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह संगठन को बकाया राशि का भुगतान नहीं करेगा. वर्तमान में अमेरिका पर WHO का लगभग 260 मिलियन डॉलर, यानी करीब 2,380 करोड़ रुपये का बकाया है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नियमों के अनुसार यह राशि चुकाना जरूरी है, लेकिन WHO के पास अमेरिका को भुगतान के लिए बाध्य करने का कोई ठोस कानूनी साधन नहीं है.

ग्लोबल हेल्थ कानून के जानकारों के मुताबिक, तकनीकी रूप से अमेरिका तब तक पूरी तरह अलग नहीं माना जा सकता जब तक वह अपना बकाया नहीं चुकाता, लेकिन व्यवहारिक तौर पर WHO इस मुद्दे पर टकराव की स्थिति से बच सकता है.

अमेरिकी सरकारी फंडिंग पूरी तरह बंद

अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने यह भी बताया कि WHO में अमेरिका की ओर से दी जाने वाली सभी सरकारी फंडिंग को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है. इसके अलावा WHO में तैनात अमेरिकी कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्टरों को भी वापस बुला लिया गया है.

अमेरिका ने संगठन की स्पॉन्सर कमेटियों, लीडरशिप बॉडी, गवर्नेंस स्ट्रक्चर और तकनीकी कार्य समूहों में अपनी आधिकारिक भागीदारी भी समाप्त कर दी है. एक वरिष्ठ अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारी ने साफ कहा कि अमेरिका न तो ऑब्जर्वर के रूप में WHO से जुड़ा रहेगा और न ही भविष्य में दोबारा सदस्य बनने की कोई योजना है.

WHO मुख्यालय से हटाया गया अमेरिकी झंडा

इस फैसले का प्रतीकात्मक असर भी सामने आया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिनेवा स्थित WHO मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी झंडा हटा दिया गया है. हाल के दिनों में अमेरिका अन्य संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं से भी दूरी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की नीतियां संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़ी संस्थाओं को कमजोर कर सकती हैं. हाल ही में गठित ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर भी ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं.

अमेरिका के भीतर भी फैसले का विरोध

WHO से अलग होने के फैसले को लेकर अमेरिका के भीतर ही तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल संगठनों ने इस कदम को खतरनाक बताया है. उनका कहना है कि वैश्विक स्वास्थ्य खतरों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है.

संक्रामक रोग विशेषज्ञों की एक प्रमुख संस्था के अध्यक्ष ने इसे दूरदर्शिता से रहित फैसला बताया. विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारियां किसी देश की सीमाओं का पालन नहीं करतीं और WHO जैसे संगठन से बाहर निकलने से अमेरिका को इबोला, फ्लू और अन्य उभरती बीमारियों पर निगरानी रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

इसके अलावा, WHO के जरिए मिलने वाली वैश्विक स्वास्थ्य जानकारियों के अभाव में अमेरिका को हर साल सही वैक्सीन स्ट्रेन का चयन करने में भी दिक्कत आ सकती है, जिससे देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा कमजोर हो सकती है.

बकाया राशि पर कानूनी पेंच

ग्लोबल हेल्थ कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार WHO से अलग होने के लिए एक साल का नोटिस और सभी वित्तीय बकाया का भुगतान अनिवार्य है. अमेरिका ने नोटिस की शर्त तो पूरी कर दी है, लेकिन अब भी उस पर 260 से 270 मिलियन डॉलर के बीच की राशि बकाया है.

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि WHO के संविधान के तहत अमेरिका पर इस राशि को चुकाने की कानूनी बाध्यता नहीं बनती. दूसरी ओर WHO ने कहा है कि इस मुद्दे पर फरवरी में होने वाली कार्यकारी बोर्ड की बैठक में चर्चा की जाएगी और उसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी.

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