अमेरिका-ईरान के बीच जंग के आसार, दोनों देशों के बीच छिड़ा युद्ध तो भारत पर क्या पड़ेगा असर?

Iran-America Tension: मध्य-पूर्व में ईरान इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है. अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन पिछले 47 वर्षों में सबसे बड़े पैमाने पर हो रहे हैं.

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Iran-America Tension: मध्य-पूर्व में ईरान इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है. अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन पिछले 47 वर्षों में सबसे बड़े पैमाने पर हो रहे हैं. आर्थिक दबाव, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रियाल की तेजी से गिरती कीमत और बढ़ती महंगाई ने जनता को सड़कों पर उतार दिया है. लोग सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं.

ईरान में फैली अशांति भारत के लिए सिर्फ दूर की खबर नहीं है. रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भारत ईरान के साथ कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में जुड़ा हुआ है. इनमें सबसे अहम है चाबहार बंदरगाह, जो भारत की दक्षिण-पूर्वी एशिया और मध्य-पूर्व तक पहुंच को आसान बनाता है. अगर ईरान में हालात बिगड़ते रहते हैं, तो इस बंदरगाह के माध्यम से भारत की पहुंच और व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है.

चाबहार पोर्ट: भारत की अंतरराष्ट्रीय कड़ी

चाबहार बंदरगाह सिर्फ ईरान का एक बंदरगाह नहीं, बल्कि इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का महत्वपूर्ण हिस्सा है. 7,000 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर भारत को अफगानिस्तान, अजरबैजान, अर्मीनिया, रूस, मिडिल ईस्ट और यूरोप से जोड़ता है. इसकी वजह से माल की ढुलाई में समय और लागत दोनों कम होती हैं. स्वेज नहर वाले पारंपरिक मार्ग की तुलना में यह रास्ता भारत के लिए काफी प्रभावशाली और रणनीतिक रूप से जरूरी है.

व्यापारिक रिश्तों पर असर

कॉमर्स डिपार्टमेंट के आंकड़ों के अनुसार, भारत और ईरान के बीच व्यापार का आकार 2024-25 में लगभग 1.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. भारत ने इसमें से 1.24 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया, जबकि इम्पोर्ट मात्र 0.44 बिलियन डॉलर का रहा. ईरान में बढ़ता तनाव और अशांति इस व्यापारिक संबंध को प्रभावित कर सकता है. खासकर चाबहार बंदरगाह के माध्यम से होने वाले लेन-देन में गिरावट आने की संभावना है.

भारत की रणनीति और विकल्प

ईरान में हालात बिगड़ने के बावजूद भारत के पास इस संकट का सामना करने के लिए विकल्प हैं. भारत ने चाबहार पोर्ट पर निवेश करके न केवल अफगानिस्तान तक पहुंच बनाई है, बल्कि रूस और यूरोप के साथ भी अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत किए हैं. लेकिन अगर ईरान में हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता जारी रहती है, तो भारत को अपने व्यापार और निवेश की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं.

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