World War Three Russia Ukraine: यूरोप में एक बार फिर जंग के बादल मंडराते दिखाई दे रहे हैं. जर्मनी और फ्रांस जैसे प्रमुख यूरोपीय देश अब किसी संभावित सैन्य संघर्ष के लिए न केवल सैद्धांतिक स्तर पर, बल्कि जमीनी स्तर पर तैयारियां शुरू कर चुके हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जर्मनी ने हर दिन 1,000 घायल सैनिकों के इलाज की व्यवस्था करने का खाका तैयार किया है, जबकि फ्रांस 50,000 तक घायल सैनिकों को हैंडल करने की तैयारी में जुटा है.
यह तैयारियां ऐसे वक्त में हो रही हैं जब नाटो और रूस के बीच तनाव चरम पर है, और विशेषज्ञ मान रहे हैं कि रूस वर्ष 2029 तक यूरोप पर हमला कर सकता है. हालांकि मॉस्को इन आरोपों को नकारता रहा है.
युद्धकालीन मेडिकल तैयारी में जुटा जर्मनी
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जर्मन सेना के सर्जन जनरल राल्फ हॉफमैन ने बताया है कि यूक्रेन युद्ध ने जंग के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है.
अब सैनिकों को गोली लगने की बजाय ड्रोन हमलों, विस्फोटों और बर्न इंजरी जैसी गंभीर चोटों का सामना करना पड़ रहा है.
जर्मनी की प्रमुख तैयारियां:
फ्रांस भी हाई अलर्ट पर, 2026 तक की तैयारी
फ्रांसीसी रक्षा रिपोर्ट्स के अनुसार, अस्पतालों को मार्च 2026 तक युद्ध की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया गया है. फ्रांसीसी अखबार ले कैनार्ड एनचाइने की मानें तो, 10 से 180 दिनों की अवधि में 10,000 से 50,000 घायल सैनिक अस्पतालों में भर्ती हो सकते हैं.
क्या तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी कर रहा है यूरोप?
विश्लेषकों का मानना है कि यह तैयारी किसी सीमित संघर्ष की नहीं, बल्कि पूर्ण पैमाने के युद्ध की आशंका की ओर इशारा करती है. रूस की ड्रोन और मिसाइल गतिविधियां बार-बार नाटो की सीमाओं के पास देखी जा रही हैं. यूक्रेन युद्ध ने पूरे यूरोप को रणनीतिक रूप से सतर्क कर दिया है. जर्मनी और फ्रांस जैसे देश अब एक्टिव वॉर ज़ोन की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि रूस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह नाटो या किसी यूरोपीय देश से युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर विश्वास लगातार कम हुआ है.
डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने बढ़ाई हलचल
इस तनावपूर्ण माहौल में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान भी खासा चर्चा में है. न्यूयॉर्क में यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की से मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा, “यूक्रेन अपनी खोई हुई जमीन वापस ले सकता है, क्योंकि रूस अब एक पेपर टाइगर बन चुका है.” यह बयान खास इसलिए है क्योंकि ट्रंप पहले रूस के पक्ष में नरम रुख दिखाते रहे थे. अब उनके सुर बदलने से दुनियाभर में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है.
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