नई दिल्ली: भारतीय रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने अपनी ताकत और सटीकता का लोहा मानवाया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस मिसाइल ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और आतंकवादी ढांचों पर जो प्रभाव डाला, उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के रक्षा उद्योग को खासा आकर्षक बना दिया है. इसी कड़ी में दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में गंभीर रुचि दिखाई है.
इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री सजफ्री सजमसोएद्दीन बुधवार को दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए, जहां वे भारत-इंडोनेशिया रक्षा मंत्रियों के तीसरे डायलॉग में भाग ले रहे थे. इस दौरान उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल सहित रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया. जानकारी के अनुसार भारत और रूस के संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल की खरीद पर चर्चा अब एडवांस स्टेज पर है. रूस ने भी इस डील को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है.
ब्रह्मोस की ताकत और वैश्विक रुचि
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तानी ठिकानों को लक्षित किया. इस मिसाइल ने अपनी सुपरसोनिक गति और सटीक लक्ष्य साधने की क्षमता से सभी को प्रभावित किया. इसके परिणामस्वरूप अब कई देशों की नजर भारत की ब्रह्मोस मिसाइल पर है.
विशेष रूप से इंडोनेशिया ने इस मिसाइल की ताकत और भारतीय रक्षा क्षमताओं की तारीफ की है. देश के रक्षा अधिकारियों का कहना है कि ब्रह्मोस उनकी नौसेना और वायु सेना के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है. इसके अलावा, भारत इस मिसाइल के रखरखाव और ओवरहॉल (MRO) के लिए भी इंडोनेशियाई कर्मियों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देने के लिए तैयार है.
भारत-इंडोनेशिया रक्षा सहयोग
इंडोनेशियाई रक्षा मंत्री सजमसोएद्दीन को भारत में ब्रह्मोस मिसाइल के उत्पादन और परीक्षण केंद्र का दौरा कराया गया. उन्होंने स्क्रू फाइटर जेट्स और अन्य भारतीय रक्षा परियोजनाओं का भी अवलोकन किया. इस दौरे के दौरान उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि इंडोनेशिया भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
भारत ने पहले ही इंडोनेशियाई वायु सेना और नौसेना को मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधाओं के लिए तैयार किया है. इसके तहत भारत तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और उपकरणों की आपूर्ति करता रहा है. इंडोनेशियाई रक्षा मंत्री सजमसोएद्दीन, जो राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो के नज़दीकी सलाहकार माने जाते हैं, हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टि से इस सहयोग को और बढ़ाने के पक्षधर हैं.
डील में बढ़ती गति
इस साल जनवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इंडोनेशियाई राष्ट्रपति सुबियांटो की मुलाकात हुई थी. उस समय भी ब्रह्मोस मिसाइल खरीद का एजेंडा चर्चा का केंद्र रहा. इसके अलावा, इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति सुबियांटो मुख्य अतिथि के रूप में भारत आए थे. उन्होंने भारत की रक्षा क्षमताओं की सराहना की और दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया.
इंडोनेशियाई राष्ट्रपति के साथ उनके उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्रह्मोस फैक्ट्री का दौरा भी किया और CEO जयतीर्थ आर. जोशी से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भारत में मिसाइल की तकनीकी क्षमताओं को देखकर काफी प्रभावित हुए और डील में आगे बढ़ने की संभावना जताई.
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