दुनिया की सबसे बड़ी भगवान राम की मूर्ति, जिसका उद्घाटन करेंगे PM मोदी आज

समुद्र की लहरों, खूबसूरत बीचों और रंगीन नाइटलाइफ़ के लिए पहचान रखने वाला गोवा अब एक नई आध्यात्मिक कहानी लिखने जा रहा है. पर्यटन और पुर्तगाली विरासत के बीच अब गोवा का नाम भगवान श्रीराम की भव्यता से भी जुड़ने वाला है.

World’s tallest Ram Statue in Goa Know importance pm modi will inaugurate today
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समुद्र की लहरों, खूबसूरत बीचों और रंगीन नाइटलाइफ़ के लिए पहचान रखने वाला गोवा अब एक नई आध्यात्मिक कहानी लिखने जा रहा है. पर्यटन और पुर्तगाली विरासत के बीच अब गोवा का नाम भगवान श्रीराम की भव्यता से भी जुड़ने वाला है. राज्य में ऐसी प्रतिमा स्थापित होने जा रही है, जो न सिर्फ धार्मिक महत्व बढ़ाएगी बल्कि विश्व स्तर पर भारत के गौरव को भी एक नई ऊंचाई देगी.


गोवा में भगवान श्रीराम की एक विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसका आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अनावरण किया जाएगा. 77 फीट ऊंची यह प्रतिमा कांस्य धातु से निर्मित है और इसे दुनिया में भगवान राम की सबसे ऊंची प्रतिमा बताया जा रहा है. अनावरण समारोह श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवत्तम मठ में हो रहा है, जहां इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटने की उम्मीद है.

नोएडा के मशहूर मूर्तिकार राम सुतार की रचना

भगवान राम की इस प्रतिमा को प्रतिष्ठित मूर्तिकार राम सुतार के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है. यही वे कलाकार हैं जिन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का डिजाइन बनाया था. हाथ में धनुष-बाण लिए, शांत और सौम्य चेहरे वाली यह प्रतिमा भगवान राम के वीर स्वरूप और दिव्यता को एक साथ चित्रित करती है. दूर से देखने पर भी प्रतिमा की ऊर्जा और आभा महसूस की जा सकती है.

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गोकर्ण पर्तगाली जीवत्तम मठ—550 वर्षों की विरासत का उत्सव

इस ऐतिहासिक अनावरण का अवसर भी अत्यंत खास है. श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवत्तम मठ अपने 550 वर्ष पूरे कर रहा है. इसी उपलक्ष्य में भगवान राम की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का लोकार्पण किया जा रहा है. मठ परिसर में केवल प्रतिमा ही नहीं, बल्कि एक रामायण थीम पार्क और राम संग्रहालय का भी निर्माण किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में यह स्थान धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन जाएगा.

द्वैत दर्शन की धारा को आगे बढ़ाता यह ऐतिहासिक मठ

गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ गौड़ सारस्वत ब्राह्मण वैष्णव परंपरा का पहला मठ माना जाता है. यह द्वैतवाद दर्शन का अनुसरण करता है, जिसकी स्थापना 13वीं शताब्दी में जगद्गुरु माधवाचार्य ने की थी. मठ का मुख्यालय दक्षिण गोवा के पर्तगाली कस्बे में कुशावती नदी के किनारे स्थित है—जहां शांत वातावरण, प्राचीन परंपरा और अब यह भव्य राम प्रतिमा एक साथ आस्था का अनोखा संगम बनाती है.

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